छत्तीसगढ़

दुश्वारियां, बहुत मुश्किल से आसान हुई, मुसाफिऱ बने, तो राह की पहचान हुई...

Nilmani Pal
9 May 2025 11:34 AM IST
दुश्वारियां, बहुत मुश्किल से आसान हुई, मुसाफिऱ बने, तो राह की पहचान हुई...
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ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

पीएम नरेंद्र मोदी ने पहलगाम भारतीयों की आतंकी हत्या से व्यथित होकर कहा था कि अब आतंकवादियों और उनके आकाओं को मिट्टी में मिलाने का वक्त आ गया है। इस घटना ने पूरे देश को उद्वेलित कर दिया। पीएम मोदी को देशवासियों सहित राजनीतिक दलों ने आश्वस्त किया कि आतंकियों के समूल नष्ट करने में जो भी फैसला लेंगे हम आपके साथ खड़े हैं। घटना के तुरंद बाद कैबिनेट और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख के साथ बैठक में आर-पार की लड़ाई का फैसला लिया गया । इस घटना के बाद पूरी देश एक था। पक्ष-विपक्ष सहित पूरे देशवासी एक साथ खड़े हैं। पीएम ने ही भारतीय माताओं बहन -बेटियों और बहुओं की मांग से सिंदूर मिटाने का दुस्साहस करने वालों सबक सिखाने लांच किया आपरेशन सिंदूर जो खुद मोदी जी ने नाम दिया था। माक ड्रिल करने के साथ रातोरात एयर स्ट्राइक कर आतंकियों के ठिकाने को तहस-नहस कर दुश्मन को जता दिया कि भारतीय गीदड़ भभकियों में विश्वास नहीं करते बल्कि हम तो घर में घुस कर बदला लेने की ताकत रखते है जिसका नजारा 6-7 मई की रात को दिखा दिया है। भारतीय़ों में जाति धर्म का जहर घोलने वालों के मंसूबे पर पानी फेरते हुए उनके आकाओं को संदेश दे दिया कि हम पहलगाम के आतंकियों को मिट्टी मिलाकर हा रहेंगे। भारतीय वायु सेना के जवानों के शौर्य की जितनी भी सराहना और प्रशंसा की जाए कम है। पीएम मोदी ने पहलगांम में मिले नासूर को बिना हो हल्ला किए दुश्मन के घर घुस कर आतंकियों के 8 ठिकानों को नेस्तानबूत कर दिया । जनता में खुसुर-फुसुर है कि भारतीय सेना ने इसे मात्र ट्रेलर बताते हुए कहा कि पिक्चर तो अभी बाकी है। अब तो आतंकी को पनाह देने वाले उन्हें पालने पोसने वालों की बारी है। 25 साल का बदला हम 25 मिनट में ले सकते है। हमारी ताकत को कम आंकने की ख्वाब में भी मत सोचना नहीं तो जो तुम्हारे पास है वो भी हाथ से चला जाएगा। पाकिस्तान की औकात पर किसी ने ठीक ही कहा है दुश्वारियां,बहुत मुश्किल से आसान हुई, मुसाफिऱ बने, तो राह की पहचान हुई। हमारी ताकत को कम आंकने की ख्वाब में भी मत सोचना ये है सिंदूर...।

फेल हो जा फेल हो जा की माला जप रहे है दलाल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहर में समस्याओं और शिकाय़तों की मडई निकाल कर लाखों शिकायतों का निराकरण कर सुशासन का झंडा लहरा दिय़ा है। वहीं फर्जी रजिस्ट्री रोकने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए आम नागरिकों की सहूलियत के लिए 3 मई को पंजीयन की 10 क्रांति के अंतर्गत रजिस्ट्री प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी आधारित दस नवाचारों का शुभारंभ किया । इसका उद्देश्य संपत्ति पंजीयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल, डिजिटल और नागरिक केंद्रित बनाना है। इससे आधार आधारित प्रमाणीकरण, ऑनलाइन भारमुक्त प्रमाण पत्र, व्हाट्सएप सूचना सेवा, घर बैठे रजिस्ट्री और स्वत: नामांतरण जैसी सुविधाओं के माध्यम से आम जनता को पंजीयन सेवाओं का लाभ अब कहीं अधिक सहजता से मिल सकेगा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सुशासन तिहार ने कई वंचितों की जिंदगी बदलने के साथ सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ जनता को दिलाने का रास्ता खोल दिय़ा है। जिससे भ्रष्टाचारियों और दलालों की दुकान बंद हो गई है। अब फर्जी रजिस्ट्री कराने वाले गिरोह कोई नया फार्मूला की तलाश में जुट गया है ताकि अब तक जो कमाई करते रहे हैं उसका सिलसिला फिर से चल पड़े। रजिस्ट्री आफिस के आसपास पिछले 25 सालों से दुकान एकाएक बंद होने से माय़ूस होकर सर्वर औऱ नेटवर्क के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं ।रजिस्ट्री आफिस का चक्कर काटते हुए फेल हो जा फेल जा का रट लगाए हुए हैं लेकिन ऐसा होना मुश्किल है क्योंकि ये विष्णु का सुशासन है।

समस्या तो आज भी यथा स्थान दिखाई दे रहा ...

कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने कहा कि सुशासन तिहार मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस का जीवंत उदाहरण है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश और मार्गदर्शन में 08 अप्रैल से सुशासन तिहार 2025 का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आमजन तक पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनना और उनका त्वरित निराकरण करना है. उन्होंने बताया कि हर वार्ड और क्षेत्रों में लगे शिविर में लगभग जिले से 3 लाख आवेदन प्राप्त किए गए. अब इन आवेदनों का निराकरण कर हितग्राहियों को जानकारी दी जा रही है. रायपुर जिला आवेदनों के निराकरण के मामले में राज्य में प्रथम स्थान पर है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि जब वर्षो से पड़े आवेदन से धूल तक नहीं झड़ पाई तो 8 अप्रैल से 7 मई तक आए 3 लाख आवेदनों को कैसे शार्टलिस्ट बनाकर समस्या और शिकायतों को अलग -अलग करने में ही एक माह बीत गए होंगे। निराकरण की तो शुरूआत ही नहीं हुई होगी फिर समस्या-शिकयतों के निकारण में रायपुर कैसे प्रथम हो सकता है। हो सकता टाइपिंग मिस्टेक हो गया हो आवेदनों प्राप्ति की जगह निराकरण टाइप कर दिय़ा हो। क्योंंकि रायपुर में तो बिजली, पानी, नाली की सफाई जगह -जगह कचरे का ढेर आज भी यथा स्थान दिखाई दे रहा है।

बेटियों के लिए शिक्षा जरूरी नहीं, अनिवार्य हो ...

बेटियां होती ही लक्ष्मी -सरस्वती और काली इनकी प्रतिभा को कोई रोक नहीं सकता। बेटे तो एक घर के कुल दीपक हो सकते है लेकिन बेटियां मायके और ससुराल दोंनों की कुलदेवी होती है। गरीबी-अमीरी बेटियों की प्रतिभा में कभी बाधक नहीं बन सकती। रायगढ़ से 10 किमी की दूरी पर स्थित कोड़ातराई गांव की बेटी ने प्रदेश भर में अपना नाम रोशन किया है। कड़ी मेहनत ने 12वीं बोर्ड की परीक्षा में प्रदेश भर में उसे छठवां स्थान लाकर यह सदेश दिया है कि बेटियों के लिए शिक्षा कितनी जरूरी है। रायगढ़ जिले से टॉप टेन में कोड़ातराई की कृतिका यादव का नाम था। उसने छठवां स्थान प्राप्त किया। जनता में खुसुर-फुसुर है कि बेटी को पढ़ाओगे तो बेटी खुद सक्षम होकर दुनिया को बचा लेगी ।इस बात क सबूत अभी 10-12वीं का रिजल्ट तो बता ही रहा है साथ ही पाकिस्तान को धूल चटाने वाले ग्रुप में भी दो बोटियों ने इस बात पर मुहर लगा दी कि बेटियां भी किसी मामले में पीछे नहीं है।

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