छत्तीसगढ़
धुन के पक्के प्रदीप ने अपनी जिद से बदली किस्मत की तस्वीर
Shantanu Roy
8 Jan 2026 12:35 AM IST

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छग
Raipur. रायपुर। धुन के पक्के लोग अपने संकल्प और परिश्रम से न केवल स्वयं का जीवन संवारते हैं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बनते हैं। ऐसा ही प्रेरक उदाहरण वैशाली नगर, राजनांदगांव निवासी प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने प्रस्तुत किया है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) का लाभ लेकर उन्होंने लघुवनोपज आधारित प्रोसेसिंग उद्योग की स्थापना की और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त कदम बढ़ाया। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के सूक्ष्म उद्यमों को सशक्त बनाना, उन्हें औपचारिक स्वरूप देना तथा रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को ऋण आधारित सब्सिडी, ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग सहायता, प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे का सहयोग प्रदान किया जाता है।
प्रदेश में उपलब्ध लघुवनोपज की संभावनाओं को पहचानते हुए देशपांडे ने चिरौंजी, हर्रा और बहेरा पर आधारित प्रोसेसिंग उद्योग की शुरुआत की। उद्योग की स्थापना हेतु मशीनरी और शेड निर्माण के लिए कुल 5 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया, जिसमें से PMFME योजना अंतर्गत 2 लाख 13 हजार 500 रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहयोग ने उनके उद्यम को मजबूती प्रदान की। उद्योग प्रारंभ होने के साथ ही उन्होंने कौरिनभाठा स्थित संस्कारधानी महिला कृषक अभिरुचि स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। इससे महिलाओं को नियमित आय का साधन मिला और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने लगीं। रोजगार मिलने से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
योजना से प्राप्त सहायता राशि का उपयोग कर देशपांडे ने आईटीआई मुंबई से चिरौंजी डिकॉल्डीकेटर मशीन क्रय की। इस मशीन से चिरौंजी का छिलका अलग कर गिरी निकाली जाती है, वहीं छिलकों से चारकोल का निर्माण भी किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त हर्रा-बहेरा की गिरी से तेल निष्कर्षण तथा छाल पृथक्करण का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे उत्पादों का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। ग्रामीण और वनीय क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की समस्या को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने प्रोसेसिंग यूनिट को सोलर प्लांट से संचालित किया है। सोलर ऊर्जा के उपयोग से बिजली खर्च शून्य हो गया है और उत्पादन में निरंतरता बनी हुई है, जिससे लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। चिरौंजी, हर्रा और बहेरा उत्पादों की निरंतर मांग के चलते उनका व्यवसाय अब छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा तक विस्तारित हो चुका है। इस उद्यम से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख रुपये की आय हो रही है। साथ ही वनीय क्षेत्रों में लघुवनोपज के संरक्षण और सतत आजीविका के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। देशपांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना स्वरोजगार को बढ़ावा देने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। उन्होंने योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
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