छत्तीसगढ़

अरमान ही बरसों तक जला करते हैं यारों, इंसान तो बस इक पल में खाक हो जाता है

Nil dhankar
25 July 2025 11:20 AM IST
अरमान ही बरसों तक जला करते हैं यारों, इंसान तो बस इक पल में खाक हो जाता है
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ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

बिल्ली वाली पुरानी कहावत याद आ गई जिसमे बिल्ली के मरने के बाद उसके वजन की सोने की बिल्ली दान में देने पर पाप कम होने का सुझाव दिया जाता था, मरी हुई बिल्ली तो वापस आ नहीं पायेगी लेकिन दान लेने वाले की माली हालत जरूर सुधर जाती । लेकिन बिल्ली के उठ कर भाग जाने पर सब मंसूबों पर पानी फिर जाता है। लेकिन यहां जिस सन्दर्भ में बता रहे हैं उसमे मंसूबों पर पानी तो फिरा लेकिन माली हालत सुधार कर। दरअसल हमारे छत्तीसगढ़ में जंगल सफारी में एक मादा वन भैंसा को इसलिए पाल रहे थे कि विलुप्त प्रजाति की इस नस्ल की भैंस को बचाया जाए ताकि इनका नस्ल बढ़ा सकें। इसके लिए करोड़ों रूपये पानी की तरह बहा दिए.लेकिन हासिल आया ज़ीरो। क्योकि जिस भैंस को अधिकारी विलुप्त प्रजाति की वनभैंस समझ कर पालपोस रहे थे वो उस प्रजाति की है ही नहीं इस बात की पुष्टि खुद जंगल विभाग के बड़े अधिकारी ने की है,यानी गई भैंस पानी में। यह जरूर है कि बड़े अरमान से राजकीय पशु को बचाने और उसके वंश बढाने के लिए काफी खर्च किए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ जनता में खुसुर फुसुर है कि जिनका बरसों का दिल का अरमान पूरा होना था हो गया वे मालामाल हो गए अब आगे जो होगा देखा जाएगा । इसी बात पर किसी शायर ने ठीक ही कहा है कि अरमान ही बरसों तक जला करते है यारो, इंसान तो बस इक पल में खाक हो जाता है।

जिण खोजा तिण पाइंया

पिछले दिनों से सोशल मीडिया में फोटो छाया हुआ है कोई सडक़ किनारे बैठ कर बोरे बासी का तुल्फ उठा रहा है, कोई चम्मच से बोरे बासी खा रहा है, कोई खेत खलिहान को निहारते हुए नजऱ आ रहा है ;लेकिन पिछले दिनों एक मंत्री की धन रोपाई का फोटो भी सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद सबसे टॉप में चल रहा है। दरअसल महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े का खेत में खुर्सी पर बैठ कर रोपा लगाते या खरपतवार निकालते फोटो सोशल मीडिया में वायरल हुआ , देखते देखते हजारों लोगों ने देखकर कमेंट्स भी करना चालू कर दिए। हालांकि मंत्री के मुताबिक वे खेत में कुर्सी में बैठकर धन रोपाई नहीं कर रहीं थी बल्कि खरपतवार को उखाड रहीं थी जो सिर्फ कुर्सी या स्टूल में बैठ कर ही उखाड़ा जा सकता है। हो सकता है एैसा होता होगा लेकिन हमने आज तक के एैसा नहीं देखा है। जनता में खुसुर फुसुर है कि सोशल मीडिया में हर कोई बना रहना चाहता है और मंत्री जी उसमे कामयाब हो गईं बाकी जिसे जो बोलना है बोलने दो कुछ दिन बाद लोग वैसे ही इसे भूल जायेंगे। इसे कहते है हर्रा लगे न फिटिकरी रंग चोखा, यानी मुफ्त में पब्लिसिटी का नया तरीका।

हरेली पर हरेला वार पलटवार

राजनीति में बहस के लिए कोई विषय होना जरूरी नहीं है। बस लौका मिल जाना चाहिए तो राजनेता रंग जमा देते है। अब किसी के नाम से सम्मान देने पर किसी को कोई हर्ज नहीं होना चाहिए । लेकिन राजनीति में तो लोग काड़ी करने की ही राजनीति करते है। अरे भाई उनकी सरकार है तो किसी के नाम पर भी पुरस्कार देने का हक रखते है। लेकिन विपक्ष के नेता इसे अवसर मान कर पिल पड़ते है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहाकि विधानसभा चुनाव में हम लोगों ने अटल संकल्प पत्र जारी किया था। जल्द ही वादा को हम पूरा करेंगे. चुनाव के समय हमारा वादा था कि धर्मांतरित व्यक्ति को मूल धर्म में वापसी कराने वाले संस्था और व्यक्ति को सम्मानित करेंगे. हम जल्द ही ऐसे संस्था और लोगों जिसमें राजा प्रवीरचंद्र भंजदेव और स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी के नाम पर सम्मान देंगे। इस पर कांग्रेस नेता शिव डहरिया ने तंज कसते हुए कहा कि दिलीप सिंह जूदेव का भाजपा ने जीते जी कोई सम्मान नहीं किया। किसी नेता का बीजेपी ने इतना अपमान नहीं किया, जितना जूदेव का किया है। भाजपा जानबूझकर धर्म और जाति के नाम पर राजनीति करती है, जिससे प्रदेश में हमेशा अशांति का माहौल बना रहता है. कानून व्यवस्था की स्थिति भी इसलिए खराब है।

वहीं हरेली त्योहार को लेकर अरुण साव के बयान पर शिव डहरिया ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ की परंपरा और तीज त्योहारों को बढ़ावा देने का किया. हरेली किसानों और प्रदेश का पहला त्योहार है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि भैया जब सरकार आती है तभी भूले बिसरे लोग याद आते है। कांग्रेस सरकार में तो रोज हरेली मानते थे, अरे एक दिन बाजेपी वाले मना रहे है तो क्य़ा बिगड़ रहा है विपक्ष का। ये बात डहिरया जी को पसंद नहीं आ रही है। वो चाहते है कि कांग्रेस की तरह ही हरेली मनाए यानी हरेलों को हरेली का रंग दें। ताकि तीन करोड़ जनता की आँखों को सुकून मिल जाए।

बड़ दिन बाद माटी के ओ सुगंध ला ले पायेंव

छत्तीसगढ़ की कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े नारी सशक्तिकऱण की मिसाल बन गई है। कभी चुनाव की तैयारियों के बीच खेत में सब्जी बनाते तो कभी शादी में दोना-पत्तल सिलते नजर आती है. अब एक बार फिर से मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का अलग अंदाज देखने को मिला है. दरअसल, प्रदेश में किसानों ने अब अपने खेतों में धान रोपाई का काम शुरू कर दिया है। इस बीच मंत्री राजवाड़े ग्रामीण वेशभूषा में अपने खेत में धान रोपाई करते नजर आई। तस्वीरें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग होने के बाद कई भाषण चंद लोग अपने आप को रोक नहीं पाए औऱ कूद पड़े। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सोशल मीडिया एक्स पर छत्तीसगढ़ी में पोस्ट किया कि आज जम्मो काम-काज के भीड़-भाड़ ले समय निकाल के अपन खेत पहुंचे रहेंव. रोपा बर धान के थहरा उखाड़त बेरा, बड़ दिन बाद माटी के ओ सुगंध ला ले पायेंव. ओ दिन के बेरा मोला आजो साफ-साफ सुरता आथे – जब हमन जम्मो परिवार संग खेत म उतर के रोपा लगावत रहेंन. धान – सिरिफ फसल नो हे, ये हमर अस्मिता आय. ओ माटी जेमे हमर पसीना मिलय हे, ओमा हमर संस्कार जड़ पकड़े हवय. छत्तीसगढ़ के माटी, ओमा उपजत धान, अउ ओ धान ला रोपेइया हाथ – येच हमर असली संस्कृति आय. हमर जिम्मेदारी हे, के ए धरोहर ला हमन सम्हाल के रखन. जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ महतारी। जनता में खुसुर-फुसुर है कि कांग्रेसी शिव डहरिया लक्ष्मी राजवाड़े की लोकप्रियता देख कर चिढ़ गए एैसा उनके बयान से लग रहा है। डहरिया का कहना है कि हम भी बचपन से खेती-किसानी कर रहे हैं. लेकिन ऐसी परंपरा आज तक नहीं देखी।भाजपा के नेता खेती-किसानी की नई परंपरा शुरू कर रहें है। ये सस्ती लोकप्रियता और प्रचार पाने का एक तरीका है। कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के समर्थकों का कहना है कि धान रोपाई ऐसे ही की जाती है। डहिरया को मान लेना चाहिए कि वो मंत्री है इसलिए धान की नई परंपरा की शुरूआत की है। अच्छा होता ये ऊर्जा अपनी पार्टी के लिए तो आने वाले समय में 35 से 50 हो सकता था, लेकिन राजनीति में तो कुछ तय नहीं होता बस मौका-ए-तस्दूर होता है।

स्कूल में जंगल राज...

गरीबों की फजीहत करने का मौका कोई नहीं छोड़ता है। सरकारी मास्टर के भी सींग आ जाते है। मामला ब्लेसिंग इंग्लिश मीडियम स्कूल प्रबंधन 5वीं कक्षा में अध्ययनरत गरीब छात्र को टीसी और अंकसूची देने के एवज में 40 हजार रुपए की मांग कर रहा है। छात्र बबलू कावरे की मां तारा कावरे ने कलेक्टर से अंकसूची और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (ञ्जष्ट) दिलाने के लिए गुहार लगाई है. कलेक्टर ने कार्रवाई का भरोसा दिया है। तारा कावरे ने बताया कि कक्षा पहली से कक्षा पांचवी तक बबलू ब्लेसिंग इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाई किया है। पहले बताया गया था कि शिक्षा नि:शुल्क है. बीपीएल कार्ड द्वारा नि:शुल्क बताकर एडमिशन कराया गया था। अब मेरे बच्चे बबलू कावरे का डीएवी स्कूल भोपालपटनम में चयन हुआ है, जिसमें एडमिशन के लिए ट्रांसफर सर्टिफिकेट और अंकसूची नहीं मिलने से मेरे बेटे के साथ अन्याय होगा। उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।जनता में खुसुर-फुसुर है कि इस तरह की शिकायत आने पर कोर्ट की तरह व्यवहार प्रशासन को करना चाहिए, सरकारी तनख्वाह वो बिना काम के दिया जा रहा है उसके बाद भी टीसी निकलवाने के पैसे लिए जा रहेहै। जागो प्रशासन जागो, ये सुशासन के नाम पर धब्बा लगा रहे है।

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