छत्तीसगढ़

ग्राम पंचायतों तक पहुंचा साइबर जागृति अभियान, ग्रामीणों को ठगी से बचाव के बताए तरीके

Shantanu Roy
30 Sept 2026 5:38 PM IST
ग्राम पंचायतों तक पहुंचा साइबर जागृति अभियान, ग्रामीणों को ठगी से बचाव के बताए तरीके
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छग
Khairagarh-Chhuikhadan-Gandai. खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। जिले में साइबर अपराधों की रोकथाम और आम नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “साइबर जागृति अभियान” के अंतिम सप्ताह में पुलिस टीमों ने विभिन्न ग्राम पंचायतों तक पहुंचकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इस दौरान पंच, सरपंच, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों को साइबर ठगी के बढ़ते मामलों से बचाव के उपाय बताए गए। जिला पुलिस खैरागढ़-छुईखदान-गंडई द्वारा संचालित अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित ग्राम सभाओं और स्थानीय कार्यक्रमों में पुलिसकर्मियों ने लोगों से सीधे संवाद किया। ग्रामीणों को बताया गया कि डिजिटल लेन-देन और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और सही जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है।

पुलिस टीम ने ग्रामीणों को OTP, ATM कार्ड से जुड़ी जानकारी, बैंक अकाउंट की गोपनीय जानकारी, UPI PIN और पासवर्ड किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी। समझाया गया कि बैंक या किसी अधिकृत संस्था के नाम पर आने वाले अनजान कॉल पर तुरंत भरोसा नहीं करें और किसी भी प्रकार की गोपनीय जानकारी फोन पर देने से बचें। अभियान के दौरान फर्जी कॉल, वीडियो कॉल, फिशिंग लिंक और ऑनलाइन ठगी के तरीकों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रामीणों को बताया गया कि मोबाइल पर आने वाले किसी संदिग्ध लिंक पर बिना जांच किए क्लिक नहीं करें। अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक के माध्यम से बैंक या अन्य व्यक्तिगत जानकारी भरना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

पुलिस ने फर्जी नौकरी के ऑफर और ऑनलाइन इनाम या लॉटरी के नाम पर की जाने वाली ठगी को लेकर भी लोगों को सतर्क किया। ग्रामीणों से कहा गया कि बिना जांच किए किसी खाते में पैसे ट्रांसफर नहीं करें और नौकरी, लोन या इनाम दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें। सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। पुलिस टीम ने बताया कि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी, बैंक विवरण और अन्य संवेदनशील सूचनाएं साझा करने से बचना चाहिए। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने और संदिग्ध वीडियो कॉल का जवाब देने में सावधानी बरतने की सलाह दी गई। कार्यक्रम में ग्रामीणों को साइबर अपराध का शिकार होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के बारे में भी बताया गया। पुलिस ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है तो घबराने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

इसके साथ ही संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को भी तुरंत सूचना देने की समझाइश दी गई, ताकि संदिग्ध लेन-देन को समय रहते रोका जा सके। पुलिस ने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए शिकायत में देरी नहीं करनी चाहिए। जिला पुलिस द्वारा साइबर जागृति अभियान के माध्यम से अलग-अलग वर्गों तक लगातार पहुंच बनाई जा रही है। अभियान का उद्देश्य केवल साइबर अपराध की जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को ऐसा
डिजिटल व्यवहार
अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वे स्वयं और अपने परिवार को ऑनलाइन ठगी से सुरक्षित रख सकें। पुलिस अधिकारियों ने पंचायत प्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे अपने-अपने गांवों में साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। सामूहिक जागरूकता और सतर्कता के माध्यम से ही साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। जिला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित और साइबर-सजग समाज के निर्माण के लिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे।
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