छत्तीसगढ़
रायपुर में 2.93 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, 5 आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
31 Oct 2026 9:14 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर दो बड़ी कंपनियों से कुल 2 करोड़ 93 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा टिकरापारा और तेलीबांधा थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में दबिश देकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी की कुल रकम में से 1 करोड़ 38 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में होल्ड कराए हैं। आरोपियों ने दोनों वारदातों में एक ही तरीका अपनाया था। उन्होंने कंपनियों के अधिकृत अधिकारियों के नाम और प्रोफाइल फोटो का दुरुपयोग कर फर्जी व्हाट्सएप पहचान बनाई और अकाउंटेंट को बड़ी रकम ट्रांसफर करने के निर्देश भेज दिए। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, पहली घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र की है। कमल विहार निवासी विजय राठी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह राठी बंधुस कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। 19 से 21 अक्टूबर 2026 के बीच अज्ञात साइबर ठगों ने उनके नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर कंपनी के अकाउंटेंट लेखराम चक्रधारी को व्हाट्सएप पर संदेश भेजे। संदेश में कंपनी की रकम दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए थे। अकाउंटेंट ने संदेश को कंपनी निदेशक का वास्तविक निर्देश समझकर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के खाते से 93 लाख रुपये बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। बाद में फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने पर विजय राठी ने टिकरापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अपराध क्रमांक 984/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66डी में मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
दूसरी कंपनी से दो करोड़ रुपये की ठगी
इसी तरह तेलीबांधा थाना क्षेत्र में स्थित ट्रांसफॉर्मर एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड कंपनी के साथ दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी ओमकार वरु ने पुलिस को बताया कि अज्ञात आरोपियों ने कंपनी के अधिकृत व्यक्ति अंशुल शर्मा के नाम और पहचान का दुरुपयोग किया। आरोपियों ने फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल के जरिए अकाउंटेंट बिरेश तिवारी को संदेश भेजकर टी-के कंस्ट्रक्शन के बैंक खाते में दो करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। अकाउंटेंट ने इसे वास्तविक निर्देश मानकर बैंक ऑफ बड़ौदा की पंडरी शाखा स्थित कंपनी के खाते से रकम ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी। इस मामले में तेलीबांधा थाने में अपराध क्रमांक 458/2026 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश तक पहुंची पुलिस
दोनों घटनाओं में ठगी का तरीका एक जैसा होने पर पुलिस को एक संगठित साइबर गिरोह की संलिप्तता का संदेह हुआ। पुलिस उपायुक्त क्राइम एवं साइबर स्मृतिक राजनाला, पुलिस उपायुक्त पश्चिम जोन रॉबिन्सन गुरिया और पुलिस उपायुक्त उत्तर जोन तारकेश्वर पटेल की निगरानी में संयुक्त जांच टीम गठित की गई। पुलिस ने दोनों कंपनियों के अधिकारियों और अकाउंटेंट से पूछताछ करने के साथ संदिग्ध मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप प्रोफाइल और बैंक खातों की जानकारी जुटाई। तकनीकी साक्ष्यों तथा बैंकिंग लेन-देन के विश्लेषण से आरोपियों के महाराष्ट्र के ठाणे जिले के उल्हासनगर और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस की दो अलग-अलग टीमें संबंधित राज्यों में भेजी गईं। टीमों ने बैंक, एटीएम और संभावित रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर कार्रवाई की गई।
उल्हासनगर से तीन और प्रयागराज से दो आरोपी गिरफ्तार
टिकरापारा थाने में दर्ज 93 लाख रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने उल्हासनगर से आकाश कन्हैया लाल चुथ (20), साहिल रमेश नथानी (23) और राज चन्दर लाल जुमानी (23) को गिरफ्तार किया। तीनों महाराष्ट्र के ठाणे जिले के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने फर्जी पहचान बनाकर साइबर धोखाधड़ी करने की बात स्वीकार की। उनके कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, तीन एटीएम कार्ड और तीन बैंक पासबुक जब्त की गई हैं। वहीं तेलीबांधा थाने में दर्ज दो करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने प्रयागराज से विनय श्रीवास्तव (47) और विनोद कुमार (49) को गिरफ्तार किया। दोनों के कब्जे से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों को प्रयागराज न्यायालय से जमानत मिल गई है। मामले की आगे की विवेचना के लिए उन्हें रायपुर लाने की प्रक्रिया की जा रही है। एक अन्य संदिग्ध को भी रायपुर में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
दोनों मामलों में आरोपियों का आपसी कनेक्शन सामने आया
जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मिली कि टिकरापारा के 93 लाख रुपये की ठगी में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की तेलीबांधा के दो करोड़ रुपये वाले मामले में भी संलिप्तता सामने आई है। पुलिस अब दोनों घटनाओं के बीच आपसी संबंधों, रकम के लेन-देन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।
1.38 करोड़ रुपये बैंक खातों में कराए होल्ड
रायपुर पुलिस ने बैंक अधिकारियों के साथ समन्वय कर ठगी की रकम में से कुल एक करोड़ 38 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में होल्ड कराए हैं। इसमें टिकरापारा के मामले में 24 लाख रुपये और तेलीबांधा के मामले में एक करोड़ 14 लाख रुपये शामिल हैं। हालांकि राशि होल्ड होने का अर्थ यह नहीं है कि रकम पीड़ित कंपनियों को वापस मिल गई है। इसकी वापसी संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जब्त मोबाइल फोन की तकनीकी जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, संदिग्ध बैंक खातों और ठगी की शेष रकम का पता लगाया जा रहा है। इस घटना ने कंपनियों में ऑनलाइन भुगतान की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। साइबर विशेषज्ञों की सलाह है कि व्हाट्सएप या किसी अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर मिले बड़ी रकम ट्रांसफर करने के निर्देशों की संबंधित अधिकारी से सीधे फोन या निर्धारित आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से पुष्टि अवश्य करें। केवल प्रोफाइल फोटो या नाम देखकर किसी संदेश को वास्तविक नहीं मानना चाहिए।
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