छत्तीसगढ़

फसलचक्र परिवर्तन बना संजीवनी, बढ़ी आय और बचा पानी

Nilmani Pal
19 March 2026 5:07 PM IST
फसलचक्र परिवर्तन बना संजीवनी, बढ़ी आय और बचा पानी
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धमतरी। कभी धान-प्रधान खेती के लिए पहचाने जाने वाले जिले में आज कृषि का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। यहां के किसान अब परंपरागत खेती के साथ-साथ कम पानी में अधिक लाभ देने वाली फसलों को अपनाकर एक नई दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। यह बदलाव केवल खेती का नहीं, बल्कि सोच और संसाधनों के बेहतर उपयोग का भी प्रतीक बन गया है।

इस परिवर्तन के पीछे जिला प्रशासन की दूरदर्शी रणनीति और कलेक्टर अबिनाश मिश्रा का सतत मार्गदर्शन अहम भूमिका निभा रहा है। उनके नेतृत्व में फसलचक्र परिवर्तन को एक अभियान के रूप में संचालित किया गया, जिसमें किसानों को जागरूक करने, प्रशिक्षण देने और निरंतर निगरानी रखने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशासन और कृषि विभाग की टीम ने गांव-गांव पहुंचकर किसानों से संवाद स्थापित किया, जिससे उनमें नई फसलों के प्रति विश्वास बढ़ा। ग्राम गट्टासिल्ली तालपारा के कृषक रामप्रकाश नेताम इस बदलाव की जीवंत मिसाल हैं। पहले वे केवल धान की खेती करते थे, लेकिन अब 3.5 एकड़ खेत में मक्का की फसल लेकर बेहतर उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा उन्हें समय-समय पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। फसल की देखरेख, कीट प्रबंधन और उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी ने उनकी खेती को और सशक्त बनाया है।

रामप्रकाश ही नहीं, बल्कि जिले के सैकड़ों किसानों ने मक्का सहित अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाया है। खेतों में लहराती मक्का की फसल अब इस बदलाव की गवाही दे रही है। इससे किसानों को न केवल अच्छी आमदनी मिल रही है, बल्कि खेती में जोखिम भी कम हुआ है। फसलचक्र परिवर्तन का सकारात्मक प्रभाव पर्यावरण पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कम पानी वाली फसलों के कारण सिंचाई पर दबाव घटा है, जिससे जल संसाधनों का संरक्षण हो रहा है और भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल रही है। इसके साथ ही, विविध फसलों की खेती से भूमि की उर्वरता भी बेहतर हो रही है।

यह पहल केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय को स्थिर और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है और आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है। कुल मिलाकर, धमतरी में फसलचक्र परिवर्तन एक सफल शासकीय मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। प्रशासन की प्रतिबद्धता और किसानों की सक्रिय भागीदारी ने इसे संभव बनाया है। आने वाले समय में यह पहल न केवल धमतरी, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए कृषि नवाचार और सतत विकास का प्रेरक उदाहरण बनेगी।

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