छत्तीसगढ़
छात्रावासों में रोल मॉडल तैयार करें, बच्चों को दें बेहतर एवं स्वस्थ माहौल: कलेक्टर
Shantanu Roy
26 Jun 2026 9:15 PM IST

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Ambikapur. अंबिकापुर। कलेक्टर अजीत वसंत ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में ट्राइबल विभाग अंतर्गत संचालित छात्रावासों, आश्रमों एवं आवासीय विद्यालयों की संचालन व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों एवं छात्रावास अधीक्षकों को छात्रावासों में रोल मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावास केवल रहने की व्यवस्था तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन, संस्कार एवं सुरक्षित वातावरण के उत्कृष्ट केंद्र बनें। बैठक में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग ललित शुक्ला ने बताया कि जिले में वर्तमान में 139 शासकीय छात्रावास-आश्रम एवं 12 आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
समीक्षा के दौरान कलेक्टर वसंत ने कक्षा 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणामों की जानकारी लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि छात्रावास में निवासरत कोई भी विद्यार्थी अनुत्तीर्ण नहीं होना चाहिए। सभी अधीक्षक लक्ष्य निर्धारित कर विद्यार्थियों की नियमित शैक्षणिक मॉनिटरिंग करें तथा अतिरिक्त अध्ययन, मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराकर शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करें। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, स्वच्छता, पेयजल, निर्बाध विद्युत व्यवस्था, खेल सामग्री, टेलीविजन, समाचार पत्र, इनवर्टर सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने विद्यार्थियों में सामान्य ज्ञान एवं समसामयिक विषयों की जानकारी विकसित करने के उद्देश्य से प्रतिदिन समाचार बुलेटिन देखने तथा समाचार पत्र पढ़ने की आदत विकसित कराने पर विशेष जोर दिया। साथ ही निर्माण हो रहे 18 छात्रावासों को तय समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य पूर्ण करने को निर्देशित किया।
बैठक में छात्रावास परिसरों में किचन गार्डन एवं बागवानी विकसित करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ने कहा कि बागवानी जैसी गतिविधियों से बच्चों का प्रकृति से जुड़ाव बढ़ता है, उनमें जिम्मेदारी एवं श्रम के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है तथा व्यक्तित्व एवं मानसिक विकास को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने छात्रावास अधीक्षकों से स्वयं भी इन गतिविधियों में समय देने तथा विद्यार्थियों को सक्रिय रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चा प्रतिभाशाली होता है। आवश्यकता केवल उसकी प्रतिभा को पहचानकर उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन देने की है। जहां भी बच्चों को किसी प्रकार की समस्या हो, वहां अधीक्षक संवेदनशील एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाएं तथा प्रत्येक उपलब्धि पर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करें।
छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सभी संस्थानों में सीसीटीवी कैमरों को नियमित रूप से कार्यशील रखने, उनकी सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने और कन्या छात्रावासों अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक छात्रावास में दो कंप्यूटर एवं इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, ताकि विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा एवं ऑनलाइन अध्ययन की बेहतर सुविधाएं मिल सकें। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल, सहायक आयुक्त ललित शुक्ला, सहायक संचालक किरण राजपूत, छात्रावास एवं आश्रमों के अधीक्षक, प्राचार्य तथा विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
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