छत्तीसगढ़

बिलासपुर में त्योहारों से पहले डीजे बैन पर बढ़ा विवाद, आजीविका और कानून व्यवस्था के बीच टकराव

Shantanu Roy
1 Sept 2025 7:13 PM IST
बिलासपुर में त्योहारों से पहले डीजे बैन पर बढ़ा विवाद, आजीविका और कानून व्यवस्था के बीच टकराव
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छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक शहर बिलासपुर इन दिनों गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहारों की तैयारियों में जुटा हुआ है। लेकिन इसी बीच डीजे संचालकों और प्रशासन के बीच गहराता विवाद लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। प्रशासन की ओर से ध्वनि प्रदूषण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीजे साउंड सिस्टम पर सख्त पाबंदी लगाने का फैसला लिया गया है। दूसरी ओर, डीजे संचालकों का कहना है कि यह निर्णय उनकी रोज़ी-रोटी पर सीधा प्रहार है। त्योहारों से ठीक पहले उठे इस विवाद ने पूरे जिले में तनाव का माहौल बना दिया है।
प्रशासन का सख्त रुख
हाल ही में बिलासपुर जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश और कोलाहल अधिनियम का हवाला देते हुए त्योहारों में डीजे साउंड सिस्टम बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। प्रशासन का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन आवश्यक है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि निर्धारित डेसिबल सीमा (50 डेसिबल से अधिक नहीं) का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ न केवल जुर्माना वसूला जाएगा बल्कि उनके साउंड सिस्टम भी जब्त कर लिए जाएंगे। इसके लिए प्रशासन ने पुलिस और स्थानीय निकायों को आवश्यक निर्देश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
डीजे संचालकों की नाराज़गी
दूसरी ओर, डीजे संचालकों ने इस फैसले का पुरज़ोर विरोध किया है। उनका कहना है कि गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहार उनकी सालभर की आय का मुख्य साधन होते हैं। प्रतिबंध के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा। डीजे संचालकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या सुनवाई के यह एकतरफा आदेश जारी कर दिया है।
कई संचालकों ने कहा कि वे भी नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध किसी भी तरह से उचित नहीं है। उनका तर्क है कि आधुनिक साउंड सिस्टम में वॉल्यूम और डेसिबल नियंत्रण की सुविधा होती है, जिसे लागू किया जा सकता है। यदि प्रशासन चाहे तो समय और ध्वनि सीमा तय कर दे, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध उनके लिए रोज़ी-रोटी छीनने जैसा है।
धार्मिक समितियों की दुविधा
गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा समितियां भी इस विवाद से असमंजस की स्थिति में हैं। समितियों का कहना है कि इन त्योहारों की शोभा और रौनक डीजे साउंड से ही बढ़ती है। जुलूस और कार्यक्रमों में डीजे संगीत का होना आम परंपरा बन चुका है। ऐसे में प्रतिबंध से उत्सव फीका पड़ सकता है। हालांकि समितियां यह भी मानती हैं कि शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है।
जनता की राय बंटी
बिलासपुर की आम जनता इस मुद्दे पर दो हिस्सों में बंट गई है। एक वर्ग का कहना है कि डीजे से बढ़ने वाले शोर से बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को परेशानी होती है। इसलिए प्रशासन का निर्णय सही है। वहीं, दूसरा वर्ग मानता है कि त्योहारों में डीजे की धुनें उत्साह और एकता का माहौल बनाती हैं। इसलिए प्रशासन को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए और डीजे संचालकों को सीमित समय और आवाज़ की अनुमति देनी चाहिए।
राजनीतिक हलचल की आशंका
त्योहारों के मद्देनजर इस विवाद के राजनीतिक रंग लेने की भी संभावना है। विपक्षी दल प्रशासन के इस कदम को जनता की धार्मिक भावनाओं से जोड़ सकते हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे कानून और स्वास्थ्य सुरक्षा का मुद्दा बताकर बचाव करेगा। त्योहार नज़दीक हैं और विवाद सुलझा नहीं है। डीजे संचालक प्रशासन से बातचीत कर नियमों में ढील की मांग कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन अपने आदेश पर अडिग दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचते हैं या त्योहारों के दौरान डीजे रहित जुलूस और कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।
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