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Jagdalpur. जगदलपुर। सौर ऊर्जा से किफायती बिजली पैदा कर घरों को रोशन करने और बिजली बिल में बड़ी राहत के उद्देश्य से पीएम सूर्यघर बिजली योजना में मिल रही भारी सब्सिडी से अब सोलर सिस्टम की लागत काफी कम हो गई है। पीएम सूर्यघर बिजली योजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के साथ अब राज्य सरकार ने भी सब्सिडी दिए जाने का ऐलान कर दिया है। केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। वहीं राज्य सरकार ने भी 30 हजार रुपए तक सब्सिडी प्रदान करने की घोषणा की है। इससे उपभोक्ताओं को दोहरा लाभ हो रहा है। एक ओर जहां बिजली बिल में राहत मिल रही है, वहीं सब्सिडी से सोलर सिस्टम लगाने की लागत भी काफी कम आ रही है। जगदलपुर धरमपुरा के रहने वाले गुणवती वर्मा ने अपने घर की छत पर पीएम सूर्यघर बिजली योजना से सोलर सिस्टम लगवाया है। उनके बेटे धीरज वर्मा ने बताया कि पहले उनका औसतन हर माह 1200 से 1500 रुपए तक बिजली बिल आता था। हर महीने इतना बिल परेशानी का कारण था। लेकिन जब से सोलर सिस्टम लगवाया है बिल काफी घट गया है। बीते महीने तो माइनस 1700 रुपए ही बिल आया है। मतलब सोलर प्लेट से पैदा बिजली से घर का काम भी चल गया।
बची बिजली विद्युत विभाग के ग्रिड में ट्रांसफर करने से बिल में भी छूट मिली। उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छी योजना है। यह न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक रूप से राहत देती है बल्कि एक स्वच्छ और ऊर्जा का एक स्थायी विकल्प है। यह पर्यावरण के लिहाज से भी अत्यंत प्रभावी पहल है। उन्होंने अन्य लोगों को भी इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यह भविष्य के ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए एक अच्छा विकल्प है। प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना में केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा भी हितग्राहियों को 30 हजार रूपए तक की सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान किया गया है। जिससे सोलर सिस्टम लगाने की लागत काफी कम हो गई है। इसमें एक किलो वाट सयंत्र लगाने की लागत करीब 60 हजार रूपये आती है, इस पर केंद्र से 30 हजार और राज्य से 15 हजार रूपए सहित कुल 45 हजार रूपये सब्सिडी मिलती है, उपभोक्ता पर सिर्फ 15 हजार रुपए का व्यय भार आता है। इसी प्रकार दो किलो वाट सयंत्र पर एक लाख 20 हजार रुपए की लागत पर केंद्र से 60 हजार रूपए और राज्य से 30 हजार रूपए कुल 90 हजार रुपए सब्सिडी उपभोक्ता को प्राप्त होती है। उपभोक्ता को स्वयं से सिर्फ 30 हजार रुपए देने पड़ेंगे, जो कि वास्तविक लागत का सिर्फ 25 प्रतिशत है। वहीं तीन किलो वाट सयंत्र पर करीब दो लाख रुपए लागत के विरुद्ध केंद्र से 78 हजार रुपए और राज्य से 30 हजार रुपए कुल एक लाख 08 हजार रुपए की सब्सिडी दी जा रही है, इसमें लगभग 80 हजार रुपए ही उपभोक्ता को देने होंगे।
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