लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस को शहर अध्यक्ष पद मुस्लिम को ही देने चाहिए

ज़ाकिर घुरसेना
कांग्रेस मुसलमानों का वोट से राजपाट करती है लेकिन मुसलमानों से परहेज!
विधानसभा क्षेत्रवार मुस्लिम आबादी को देखते हुए राजधानी में शहर अध्यक्ष मुस्लिम ही हो
25 साल से लगातार मुस्लिम अध्यक्ष बनते रहे और कांग्रेस चुनाव पे चुनाव जीतती रही
रायपुर में मुसलमानों को विधायक चुनाव नहीं लड़ाया जाता लेकिन शहर अध्यक्ष तो बनाएं, कांग्रेस को वोट मुसलमानों का अधिकार बनता है
रायपुर। कांग्रेस चाहती है कि फिर से अगर छत्तीसगढ़ में तीसरी पार्टी का उदय न हो तो शहर अध्यक्ष का पद किसी मुस्लिम को ही देना चाहिए। मजे की बात प्रदेश में सबसे ज्यादा मुस्लिम वोटर्स रायपुर में ही है तो ऐसे में तो मुस्लिम नेताओ का दावा पुख्ता हो जाता है , साथ ही पूरे प्रदेश में अच्छा सन्देश भी जायेगा, वैसे भी कांग्रेस मुस्लिम समर्थित पार्टी कहलाती है और मुस्लिम वोट की चाहत रखती है लेकिन वर्तमान कांग्रेसियों का आचरण और विचार मुस्लिमो के विपरीत है इनके कथनी और करनी में अंतर है। इसके पहले मुस्लिम कांग्रेस दे दूर हों शहर अध्यक्ष का पद इन्हे दे देना चाहिए। नगरीय निकाय चुनाव निपटने के बाद अब रायपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष के लिए जोड़ -तोड़ शुरू हो चुकी है, दौड़ में जोगी के कट्टर समर्थक रहे और मोतीलाल वोरा के कट्टर समर्थक आपस में भिड़ रहे हैं । सभी दावेदार एक दूसरे की शिकायत आलाकमान और प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट से करते आ रहे हैं । दूसरी ओर भूपेश गुट के दावेदार भी चुपचाप अपनी दावेदारी मजबूती के साथ कर रहे हैं। हालांकि भूपेश बघेल अब पंजाब के प्रभारी बना दिए गए हैं तो प्रदेश में उनकी सक्रियता कितनी रहती है आगे भविष्य में कितना योगदान रहता है देखना होगा। उस लिहाज से भूपेश के समर्थकों को कितनी तवज्जो मिलेगी यह भी सोचने का विषय है। बहरहाल अब अधिकांश कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि बरसों से चली आ रही परंपरा के अनुसार रायपुर शहर कांग्रेस का अध्यक्ष मुस्लिम समाज से ही बनता है विगत 12 साल स्वर्गीय अब्दुल हमीद हयात या फिर स्वर्गीय इक़बाल अहमद रिज़वी जिन्होंने 15 साल कांग्रेस शहर अध्यक्ष रह कर सेवाएं दी। कांग्रेस
की हमेशा परिपाटी रही है ये क्योंकि मुसलमानों का जन संख्या ज़्यादा होने के बावजूद इस शहर में चारों विधानसभा में से एक भी विधानसभा टिकट मुसलमानों को नहीं दी जाती है इसलिए कांग्रेस पार्टी हमेशा मुसलमानों को ख़ुश करने के लिए और अपना वोट बैंक बचाने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष पद से 80 से ही अध्यक्ष पद से नवाज़ रही है।
इतिहास गवाह है जब तक मुसलमानों को अध्यक्ष कांग्रेस पार्टी बनाते रही तब तक कांग्रेस की सरकार छत्तीगढ़ है और मध्य प्रदेश में बनती रही और चार विधानसभा में तीन दो ऐसे कांग्रेस के विधायक बनते रहे। बड़े कांग्रेसी नेताओं ने कहा है कि जब वोट कांग्रेस पार्टी मुसलामानों से चाहती है तो खुलकर मुसलमानों को पद-प्रतिष्ठा से नवाजना चाहिए। क्योंकि चुनाव की राजनीति से छत्तीसगढ़ में मुसलमान कोसो दूर हो चुके है। अब आने वाले सालों में एक भी विधायक मुस्लिम कोटे से नहीं बन पायेगा ऐसा मानना सभी लोगों का है।
कई मुस्लिम नेता दौड़ में शामिल
कांग्रेस में काफी दिनों से मेहनत कर रहे मुस्लिम समाज के आसिफ मेमन, मो. असलम खान, शेख मुशीर खान, सारिक रईस खान, अब्दुल रब सिद्दीकी, सद्दाम सोलंकी जैसे तेज़ तर्रार मुस्लिम युवा नेता शहर अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हैं । ये सब सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में बढ़चढ़ कर हिस्सा भी लेते हैं। बैजनाथ पारा, छोटापारा, टिकरापारा, संजय नगर, बैरनबाजार, नयापारा, तात्यापारा, राजा तालाब, पंडरी, ताजनगर, चौरसिया कालोनी जैसे विशाल क्षेत्र मुस्लिम आबादी से भरे पड़े है और अधिकांश कांग्रेसी नेता मुसलमान के पक्ष में शहर कांग्रेस अध्यक्ष बंनाने के लिए सब बड़े नेताओं के पास सिफारिश करने का मना बना रहे है। इस के लिए पुराने वरिष्ठ कांग्रेसियों की एक बड़ी बैठक हो चुकी है जिसमे यह तय किये जाने की जानकारी मिल रही है कि जिसे भी शहर अध्यक्ष बनायें सब मिलकर सहयोग करेंगे। दक्षिण विधानसभा उपचुनाव, पंचायत और नगर पालिका चुनाव संपन्न हो चुके हैं और तत्काल अभी कोई चुनाव होना नहीं है ऐसे में अब फेरबदल होने की संभावना दिख रही है।क्योकि इन चुनावों कांग्रेस कोई खास दमखम नहीं दिखा सकी है स्वाभाविक है ऊपर से नीचे तक परिवर्तन करने के मूड में कांग्रेस हाई कमान है।
लोकसभा चुनाव में जिन प्रदेशों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया है उन प्रदेशों में अध्यक्षों को अभी हटाने के मूड में नहीं दिख रही है। यहां लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का परफॉर्मेंस अच्छा रहा है। पार्टी कई राज्यों में भी संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटी है। इसके तहत पार्टी कई प्रदेशों में अध्यक्षों और जिला स्तर पर संगठन में बदलाव कर सकती है।जिसमे छत्तीसगढ़ भी शामिल है। यहां भी कांग्रेस के नेता कोई विशेष प्रभाव या छाप नहीं दिखा सके बल्कि उन पर टिकट बेचने तक का आरोप लग रहा है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सबसे बड़े बदलाव छत्तीसगढ़ में हो सकता है। नीचे से लेकर ऊपर तक बदलाव किये जाने की चर्चा पार्टी के अंदरखाने में चल रही है। प्रदेश में प्रदेश कार्यकारिणी के साथ जिला स्तर पर भी बदलाव कर सकती है। क्योंकि यहां कांग्रेस ने कोई खास या कुछ भीअच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। पार्टी के नेता की माने तो छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्य्क्ष सहित जिला समिति में भी आमूलचूल परिवर्तन करने जा रही है। मुस्लिम समुदाय कांग्रेस की फेवर करते आ रही है।
शहर अध्यक्ष पद मुस्लिम को मिल सकता है
राजधानी के चारों विधानसभा सीटों में मुस्लिम वोटर्स की तादाद भी अच्छी खासी है जो अमूमन कांग्रेस के ही वोटर रहे हैं ऐसे में शहर अध्यक्ष का पद कांग्रेस को किसी मुस्लिम को ही देना चाहिए। वैसे भी पिछले कार्यकाल देखे तो कांग्रेस पार्टी हमेशा मुस्लिमो को खुश करने के लिए और अपना वोट बैंक बचाने के लिए सन 80 से शहर अध्यक्ष के पद पर मुस्लिम समुदाय के किसी नेता को नवाज़ रही है। वर्तमान शहर अध्यक्ष गिरीश दुबे 2020 से जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दक्षिण के उपचुनाव और नगर पालिका और पंचायत के चुनाव परिणाम को देखते हुए अब आगे कंटीन्यू होना मुश्किल दिख रहा है। इस चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह पराजित हुई है।
गौरतलब है कि पूर्व पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने ही गिरीश दुबे को शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया था, आपसी गुटबाजी के वजह से अपने कार्यकारिणी में नेताओ के लोगों को शामिल करने में उनको पसीना छूट गया था। जिसके चलते उन्होंने लगभग 125 सदस्यो की भारी भरकम कार्यकारिणी बनाई थी जिसे एक साल बाद वरिष्ठ नेताओ की अनुमोदन मिली थी। चूंकि अब मोहन मरकाम की जगह दीपक बैज पीसीसी चीफ हैं और उनके कार्यकाल में लोकसभा, विधानसभा,नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकी ऐसे में जिन राज्यों में अध्यक्ष बदलने की चर्चा है उसमे छत्तीसगढ़ का भी नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। स्वाभाविक है की नए पीसीसी चीफ बनने के बाद जिलों में भी नए अध्यक्ष बनाया जाना है। ऐसे में कुछ वरिष्ठ कांग्रेसजनो का कहना है की रायपुर में शहर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर मुस्लिम समुदाय के किसी नेता को बिठाया जाय। ताकि कांग्रेस का वोट बैंक बना रहे और मुस्लिम समुदाय खुश भी रहे।





