छत्तीसगढ़

कांग्रेस के आरोप और आशंकाएं सच साबित हुई : मोहन मरकाम

Admin2
15 Oct 2020 6:23 AM GMT
कांग्रेस के आरोप और आशंकाएं सच साबित हुई : मोहन मरकाम
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नए कृषि कानूनों में एमएसपी पर खरीदी की अनिवार्यता नहीं


रायपुर (जसेरि)। केंद्रीय पशुपालन एवं मछलीपालन राज्यमंत्री संजीव बालियान की रायपुर में हुई प्रेसवार्ता में कही बातों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि आखिरकार कांग्रेस के आरोप और किसानों की आशंकाएं सच साबित हुई। मोदी सरकार के तीनों कृषि कानूनों में एमएसपी में उपज खरीदने की अनिवार्यता का उल्लेख नहीं है और यह बिल किसान मजदूर विरोधी है।

मरकाम ने कहा है कि संजीव बालियान ने स्वीकार किया है कि इन कानूनों से उद्योगपति और व्यापारियों को छूट मिलेगी। ये उद्योगपति कौन हैं, यह सारा देश बखूबी समझ रहा है। एमएसपी के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर कानून में हर बात नहीं लिखी जा सकती। इससे स्पष्ट है कि नए कृषि बिल चंद बड़े पूंजीपतियों को किसानों को अपनी फसल औने-पौने दाम में बेचने के लिए मजबूर करने का लाइसेंस है। किसानों के साथ कांट्रेक्ट फार्मिंग कर पूंजीपति किसानों को पांच साल के लिए गुलाम बनाएंगें। चंद बड़े व्यापारियों की अपनी मर्जी की कीमत में किसान की फसल लेंगे। मरकाम ने कहा है कि संजीव बालियान ने किसानों की फसल के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर अन्नदाताओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि कोलकाता का जूता चप्पल देश भर में बिक सकता है तो किसानों की फसल क्यों नहीं? केंद्रीय पशुपालन एवं मछली पालन राज्यमंत्री को इस प्रकार के उदाहरण देने से बचना चाहिए। जूता चप्पल के साथ किसानों की फसल की तुलना नहीं की जा सकती। भाजपा शासनकाल में बीएसएनएल की जो हालात खराब हुई है उसके लिए भाजपा सरकार के निजीकरण की नीतियां जिम्मेदार है। ठीक उसी तरह अब मोदी सरकार कृषि क्षेत्र का निजीकरण कर किसानों की भी हालात को बीएसएनएल की तरह करना चाहती हैं। यह केंद्रीय पशु पालन एवं मछली पालन राज्य मंत्री संजीव बालियान की ओर से दिए गए उदाहरण से स्पष्ट हो गया है।

मरकाम ने कहा है कि संजीव बालियान किसान विरोधी तीन काले कानून को सही ठहराने के लिए कांग्रेस के 2019 के घोषणा पत्र को आधार बना रहे तो उन्हें कांग्रेस के घोषणा पत्र के आधार पर कृषि बिल को तैयार करना था। कांग्रेस के घोषणा पत्र में किसानों को सब्सिडी में खाद,बीज,डीजल, दवाइयों के साथ किसानों के लिए प्रत्येक ब्लॉक में आधुनिक गोदाम, कोल्ड स्टोरेज,खाद्य प्रसंस्करण की स्थापना,किसानों के घर के नजदीक सर्वसुविधायुक्त बाजार, जिसमें किसानों को फसल बेचने में सहजता हो समर्थन मूल्य मिले, सहित अनेक किसान हितैषी योजना शामिल है उसे लागू कर दें।

केन्द्र सरकार के फैसले से बस्तर की जनता के तमाम सपने चकनाचूर

नगरनार स्टील प्लांट को एनएमडीसी से अलग करने और बेचने की तैयारी करने के फैसले को कांग्रेस ने बस्तर और छत्तीसगढ़ की जनता के साथ छल करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि यह छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों पर बालको के बाद एक और खुली डकैती की घटना है,इसका जवाब जनता देगी। उन्होंने कहा है कि नगरनार स्टील प्लांट के लिए जमीन देने वाले भूमि विस्थापितों के अलावा बस्तर की जनता के तमाम सपने केंद्र सरकार के इस फैसले से चकनाचूर हो गए। नगरनार प्लांट के निजीकरण से छत्तीसगढ़ के और खासकर बस्तर के अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग और गरीब लोगों की नौकरी पाने की उम्मीदों को धक्का लगा है। अभी छत्तीसगढ़ के लोग बालको को बेचने को भूले नहीं है। जब बालको को एनडीए की सरकार ने 500 करोड़ रुपए में निजी हाथों में सौंप दिया गया था। जबकि बालको के अंदर उपलब्ध स्क्रैप का मूल्य ही इससे कहीं ज्यादा था।

नगरनार के निजीकरण से बस्तर और छत्तीसगढ़ के विकास का केंद्र सरकार का वादा खत्म हो जाएगा। नगरनार स्टील प्लांट अब निजी हाथों में जाकर किसी उद्योगपति के लिए लाभ कमाने की संस्था बनेगा। अब छत्तीसगढ़ से संसद में चुनकर गए सांसदों और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह को बताना चाहिए कि वे केंद्र में बैठी भाजपा सरकार के इस फैसले पर क्या सोचते हैं? क्या वे बस्तर की जनता के साथ खड़े होकर नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण का विरोध करेंगे? या फिर नरेंद्र मोदी के डर से चुप्पी साधे बैठे रह जाएंगे? छत्तीसगढ़ की जनता प्रदेश के भाजपा नेताओं की चुप्पी को देख रही है और इसका मतलब भी समझ रही है।

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