छत्तीसगढ़

रायपुर में मानसून से पहले जलभराव की चिंता, निगम के दावे फेल: पार्षद आकाश तिवारी

Shantanu Roy
4 July 2026 7:41 PM IST
रायपुर में मानसून से पहले जलभराव की चिंता, निगम के दावे फेल: पार्षद आकाश तिवारी
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छग
Raipur. रायपुर। रायपुर में मानसून की पहली दस्तक के साथ ही शहर की जलनिकासी व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हर साल करोड़ों रुपये नालों की सफाई पर खर्च किए जाने के बावजूद पहली ही बारिश में कई इलाके जलभराव की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी शहर तैयारी के दावों में डूब जाएगा या वास्तव में जमीन पर काम हुआ है। नगर निगम का दावा है कि 10 जोन, 70 वार्ड और 100 से अधिक छोटे-बड़े नालों की सफाई पूरी कर ली गई है। निगम के अनुसार प्रमुख नालों में
जयस्तंभ चौक
–कोतवाली नाला, टाटीबंध–सरोना नाला, तेलीबांधा–वीआईपी रोड नाला, पंडरी–देवेंद्र नगर नाला, मोवा–कचना और गुढ़ियारी नाला, तथा टिकरापारा–संतोषी नगर और भाठागांव नालों की सफाई की गई है। इन सभी नालों का अंतिम प्रवाह खारून नदी में होता है, लेकिन इसके बावजूद हर साल बारिश में शहर की सड़कें जलमग्न हो जाती हैं।

वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने नगर निगम के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष
आकाश तिवारी
का कहना है कि यदि वास्तव में सभी नालों की सफाई हो चुकी होती तो पहली बारिश में जलभराव नहीं होता। उनका आरोप है कि कई मोहल्लों और गलियों में नालों की सफाई अब भी अधूरी है। आकाश तिवारी के अनुसार शहर में लगभग 250 नाले हैं, लेकिन उनमें से 100 नालों की भी पूरी सफाई नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई हल्की बारिश में ही शहर के कई मुख्य मार्गों पर पानी भर गया, जिससे निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र, राज्य और नगर निगम—तीनों जगह एक ही दल की सरकार होने के बावजूद ड्रेनेज सुधार के लिए स्वीकृत 220 करोड़ रुपये की योजनाएं समय पर जमीन पर नहीं उतर पाई हैं। विपक्ष का कहना है कि नालों की सफाई और सुधार कार्य सही समय (जनवरी से अप्रैल) में होना चाहिए था, लेकिन देरी के कारण उसकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। नगर निगम के अनुसार जलभराव रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मशीनें भी लगाई जा रही हैं। हालांकि विपक्ष का दावा है कि जमीनी स्थिति अलग है और पहली बारिश ही वास्तविकता सामने ला देती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल यही स्थिति दोहराई जाती है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी होती है। कई इलाकों में थोड़ी बारिश में ही सड़कें तालाब में बदल जाती हैं। अब निगाहें आने वाली तेज मानसूनी बारिश पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि नगर निगम के दावे सही साबित होते हैं या विपक्ष की आशंका।
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