
x
आश्रम में दिखी आदिवासी संस्कृति की झलक
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार को राजधानी रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित वनवासी कल्याण आश्रम में आयोजित करमा पूजा पर्व महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को विशेष महत्व दिया गया। मुख्यमंत्री की सहभागिता से यह आयोजन चर्चा में रहा।
वनवासी कल्याण आश्रम पहुंचे मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे 27 अक्टूबर की रात करीब नौ बजे रोहिणीपुरम स्थित वनवासी कल्याण आश्रम परिसर पहुंचे। यहां करमा पूजा पर्व महोत्सव में उनकी सहभागिता निर्धारित थी। कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी समाज की सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया।
करमा पर्व का आदिवासी समाज में विशेष महत्व
करमा पूजा छत्तीसगढ़ सहित देश के कई आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण पारंपरिक पर्व है। यह प्रकृति, कृषि, सामूहिक एकता और खुशहाली की कामना से जुड़ा हुआ है। इस पर्व में करम देवता की पूजा की जाती है। परंपरागत रूप से लोग करम वृक्ष की डाल स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं। मांदर की थाप पर करमा नृत्य और लोकगीतों की प्रस्तुतियां भी इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण होती हैं।
आदिवासी संस्कृति के संरक्षण का संदेश
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में आदिवासी समाज की परंपराओं का महत्वपूर्ण स्थान है। करमा जैसे उत्सव सामाजिक एकता, सामूहिक सहभागिता और प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पूर्व में भी करमा पर्व से जुड़े आयोजनों में आदिवासी संस्कृति के संरक्षण पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने 9 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित करमा परब महोत्सव में इस पर्व को समृद्ध जनजातीय संस्कृति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बताया था।
दिनभर विभिन्न कार्यक्रमों में रहे व्यस्त
मुख्यमंत्री साय ने मंगलवार को रायपुर में कई शासकीय कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इनमें मंत्रिपरिषद की बैठक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का नियुक्ति पत्र वितरण समारोह और स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक शामिल थी।
इसके अलावा उन्होंने सर्किट हाउस में आयोजित उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान समारोह में भी सहभागिता की। इसके बाद रात में वनवासी कल्याण आश्रम पहुंचे।
परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास
करमा पूजा महोत्सव जैसे आयोजन छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को पहचान दिलाने के साथ नई पीढ़ी को पारंपरिक रीति-रिवाजों से परिचित कराते हैं। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समाज में एकता और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश मिलता है।
Next Story





