
रायपुर। जमीन की नई गाइडलाइन दरों पर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में आपत्तियां आईं हैं। बताया गया कि सबसे ज्यादा आपत्तियां चार जिले रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में आई है। गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण प्रस्ताव पर बुधवार को कैबिनेट में चर्चा होगी। सरकार ने सात साल बाद जमीन की गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी की है। गाइडलाइन दरों में कई जगहों पर एक हजार फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। इसका चौतरफा विरोध हुआ, और कुछ संशोधन किए गए। साथ ही दरों पर आपत्तियां बुलाई गई।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के ज्यादातर जिलों में गाइड लाइन दरों को लेकर आपत्तियां आईं हैं। सबसे ज्यादा आपत्ति रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, और राजनांदगांव जिले में आई है। अंबिकापुर, जशपुर, रायगढ़ और कोरबा में भी गाइडलाइन दरों को लेकर आपत्तियां आईं हैं।
आपत्तियों में यह कहा गया कि जमीन की वास्तविक कीमत से अधिक गाइडलाइन दर हो गई है। गाइडलाइन दरों में वृद्धि के चलते जमीन के कारोबार पर असर पड़ा है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल, और कई विधायकों ने गाइडलाइन दरों पर असहमति जताई है। बृजमोहन अग्रवाल ने तो सीएम विष्णु देव साय को पत्र लिखकर सीधे सीधे पत्र लिखकर नई गाइडलाइन दरों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का आग्रह किया है। विभागीय सूत्रों ने ‘छत्तीसगढ़़’ से चर्चा में बताया कि बुधवार को पुनरीक्षण प्रस्ताव पर कैबिनेट में चर्चा होगी। दूसरी तरफ, जमीन के कारोबारी नई गाइडलाइन दरों के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। इस सिलसिले में कारोबारियों की राज्यसभा सदस्य, और सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा से चर्चा हो चुकी है। इस सिलसिले गाइडलाइन दरों से जुड़े नियमों को खंगाला जा रहा है।





