छत्तीसगढ़
CM साय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डॉ. मोहन भागवत का संदेश सुना
Shantanu Roy
31 Dec 2025 8:57 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज असंग देव कबीर आश्रम, ग्राम सोनपैरी में आयोजित विशाल हिंदू सम्मेलन में भाग लिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का मार्गदर्शक उद्बोधन सुना। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. भागवत जी का संदेश न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे भारत के नागरिकों के लिए प्रेरणास्रोत है। डॉ. मोहन भागवत ने अपने उद्बोधन में समाज निर्माण और राष्ट्र-जागरण के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक समरसता और एकजुटता के मूल्यों को अपनाना चाहिए। उनके अनुसार जाति, पंथ, भाषा और अन्य भेदभावों से ऊपर उठकर सभी के साथ समान व्यवहार करना ही समाज के समग्र विकास और हिंदू संस्कारों का सार है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि डॉ. भागवत जी ने संस्कृति संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और राष्ट्र के समक्ष उपस्थित समसामयिक प्रश्नों के समाधान पर भी विस्तृत चर्चा की। उनका कहना था कि समाज के प्रत्येक सदस्य को अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता सुदृढ़ बनी रहे। डॉ. भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत में हर व्यक्ति की समान गरिमा और अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए। उनका यह संदेश केवल हिंदू समाज को संगठित करने का नहीं है, बल्कि पूरे राष्ट्र में सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी को जागृत करने का मार्गदर्शक भी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस सम्मेलन में उपस्थित होकर उन्होंने अनेक विचारों और अनुभवों को सुना, जो छत्तीसगढ़ की जनता और समाज के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. भागवत जी का संदेश छत्तीसगढ़ से निकलकर सम्पूर्ण भारत में लोगों को प्रेरित करेगा और सामाजिक सद्भाव, एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत बनाएगा। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए संत, विद्वान और नागरिक भी उपस्थित थे, जिन्होंने डॉ. भागवत के संदेश को गहन रूप से सुनकर अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना बढ़ाते हैं, बल्कि लोगों में राष्ट्रीय जिम्मेदारी और सामाजिक सेवा के प्रति जागरूकता भी पैदा करते हैं।
इस भव्य हिंदू सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि सामाजिक समरसता, संस्कृति का संरक्षण और राष्ट्र-जागरण के संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाना आवश्यक है। डॉ. मोहन भागवत का उद्बोधन ऐसे संदेशों को प्रभावी रूप से साझा करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंत में कहा कि डॉ. भागवत जी के विचारों और संदेशों को अपनाकर प्रत्येक नागरिक समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान दे सकता है। यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ और पूरे भारत के लिए एक प्रेरणादायक और मार्गदर्शक आयोजन के रूप में याद रखा जाएगा।
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