छत्तीसगढ़

दो दिवसीय छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट 2026 का समापन समारोह

Shantanu Roy
14 March 2026 10:03 PM IST
दो दिवसीय छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट 2026 का समापन समारोह
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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित Chhattisgarh Green Summit 2026 – Sustainable Synergy: Traditionally Futuristic का दो दिवसीय भव्य आयोजन आज 14 मार्च 2026 को पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सभागार में सम्पन्न हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में वन मंत्री केदार कश्यप, सी. पी. मारक (चैयरमेन मेघालय लोकायुक्त), वी. श्रीनिवास राव (पीसीसीएफ), सरिता अग्रवाल (सचिव, मैक कॉलेज), प्रो सच्चिदानंद शुक्ला (कुलपति), शैलेन्द्र पटेल (कुलसचिव) और प्राध्यापक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएँ तथा कला-संस्कृति से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद स्वागत उद्बोधन में वी. श्रीनिवास राव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह दो दिवसीय ग्रीन समिट जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अनूठी पहल है। इस मंच के माध्यम से विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थी पर्यावरणीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर सतत विकास के लिए नए समाधान तलाश सकते हैं।

कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला ने अपने उद्बोधन में अनुभव, ज्ञान और शोध आधारित दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का भी एक सशक्त माध्यम है। इस तरह के आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने अनुभव और ज्ञान को साझा करने और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान खोजने का अवसर मिलता है।

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के लिए विशेष पहचान रखता है। उन्होंने सरकार, समाज और युवाओं से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी विकास के बीच जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन गया है। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, हिमनदों का पिघलना और समुद्र स्तर में वृद्धि जैसी समस्याओं ने वैश्विक तापमान में वृद्धि की चेतावनी दी है। इस संकट से निपटने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने भारत की प्राचीन दर्शन परंपरा “वसुधैव कुटुम्बकम्” का हवाला देते हुए मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य बनाए रखने का संदेश दिया। छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन क्षेत्र और आदिवासी परंपराएँ पर्यावरण के साथ सतत सह-अस्तित्व का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

सी. पी. मारक ने आभार प्रदर्शन में कहा कि दो दिवसीय ग्रीन समिट ने पर्यावरण और जैविक विकास के क्षेत्र में एक अनूठी पहल की है। इस प्रकार के कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण में भी योगदान देते हैं।

समिट के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए शोधार्थियों ने प्रकृति, बायो और ग्रीन टेक्नोलॉजी से जुड़े अपने शोध पेपर प्रस्तुत किए। इसके अलावा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित विद्वानों ने पर्यावरणीय, जलवायु परिवर्तन, रोजगार, संस्कृति और लोक कला जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। इनमें प्रमुख थे:

  • पद्मश्री पाण्डीराम मांडवी (मुरिया कास्ट कलाकार)

  • पद्मश्री अजय मांडवी (कांकेर, छत्तीसगढ़)

  • पद्मश्री उषा बारले (भिलाई)

  • पद्मश्री चैतराम पवार (धुले, महाराष्ट्र)

  • पद्मश्री फुलबासन यादव (राजनांदगांव)

विद्वतजनों ने विशेष विषय सत्रों में भाग लेकर शोध और नवाचार के महत्व पर चर्चा की। समारोह में पर्यावरण संरक्षण, जल, जंगल और जमीन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों को ग्रीन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसमें शामिल थे:

  • मान सिंह बघेल

  • शशिकला सिन्हा

  • बलदेव मंडावी

  • मीतू गुप्ता

पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने जनजाति कला, साहित्य और उनके जनजीवन पर मनमोहक चित्रकारी प्रस्तुत की। विजेताओं में शामिल थे: परम चक्रधारी, एल वेंकट रम्मा राव, एकता दीवान, श्रेया भारद्वाज और अर्शी फरीदी। कार्यक्रम में विभिन्न स्थानों से आए कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, जनजाति नृत्य, संगीत और वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इसके अतिरिक्त हाथकरघा, पारंपरिक वेशभूषा, भित्ति चित्र, छत्तीसगढ़ी आभूषण और हस्तशिल्प की झलक भी देखने को मिली।


इस आयोजन में भारतीय सेना ने जागरूकता, रक्षा और सेवाभाव को दर्शाने वाले स्टॉल लगाए। अंत में सभी की सक्रिय सहभागिता से यह दो दिवसीय Chhattisgarh Green Summit 2026 भव्य और सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस समिट ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों को पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और पारंपरिक व आधुनिक तकनीक के संयोजन पर विचार करने का सशक्त मंच प्रदान किया। ऐसे आयोजनों से भविष्य में छत्तीसगढ़ और देश में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने और सतत विकास के नए मॉडल तैयार करने में मदद मिलेगी।

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