छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गढ़बेंगाल में इको-फ्रेंडली घोटुल का किया निरीक्षण
Shantanu Roy
30 Jan 2026 3:39 PM IST

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छग
Narayanpur. नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारायणपुर जिले के गढ़बेंगाल में निर्मित इको-फ्रेंडली घोटुल का निरीक्षण कर वहां आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। यह घोटुल बस्तर की समृद्ध और गौरवशाली आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने तथा उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो राज्य सरकार की “बस्तर राइजिंग” योजना के अंतर्गत विकसित की गई है। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासन द्वारा गढ़बेंगाल क्षेत्र में विशेष तैयारियां की गई हैं। इसी क्रम में घोटुल परिसर में सांस्कृतिक मंच, दर्शक व्यवस्था, पारंपरिक सजावट, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अवलोकन किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कार्यक्रम के दौरान बस्तर की सांस्कृतिक गरिमा और परंपराओं का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
गढ़बेंगाल में निर्मित यह घोटुल गोंड़ एवं मुरिया जनजाति की पारंपरिक सामाजिक और शैक्षणिक व्यवस्था का प्रतीक है। घोटुल को आदिवासी युवाओं के लिए पारंपरिक शिक्षा, लोक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रशिक्षण के केंद्र के रूप में प्रमोट किया जा रहा है। यहां बस्तर के प्रसिद्ध नृत्य, वाद्ययंत्र और लोक कलाओं को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस सांस्कृतिक पहल को “दिल मेला रू, दिल में ला” थीम के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बस्तर की संस्कृति को लोगों के दिलों तक पहुंचाना है। इस थीम के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों को मंच मिलेगा, जिससे उनकी कला को पहचान के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।
गढ़बेंगाल में बना यह विशेष इको-फ्रेंडली घोटुल स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक वास्तुकला के अनुरूप तैयार किया गया है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो रहा है। यहां आने वाले पर्यटक बस्तर की जीवनशैली, संस्कृति और परंपराओं को नजदीक से अनुभव कर सकेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह दौरा बस्तर अंचल के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बस्तर की अनूठी पहचान को सहेजते हुए उसे विकास और पर्यटन से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय समुदाय को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।
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