छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़: 1 मई से शुरू होगा जनगणना का पहला फेज, जनता से पूछे जाएंगे इस तरह के सवाल
jantaserishta.com
12 April 2026 8:56 AM IST

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रायपुर: भारत सरकार की जनगणना-2027 के तहत छत्तीसगढ़ में पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान “हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस” के तहत हर घर, बिल्डिंग और उसकी सुविधाओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। प्रगणक तय समय में घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे।
इस बार प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच लोग ऑनलाइन पोर्टल पर खुद भी अपने घर और परिवार की जानकारी भर सकेंगे। इसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा गया है। ऑनलाइन जानकारी भरने वालों को एक यूनिक आईडी मिलेगी, जिसे बाद में प्रगणक को दिखाना होगा।
जनगणना के इस चरण में मकान की स्थिति, उपयोग (रहवासी या व्यवसायिक), निर्माण की गुणवत्ता (कच्चा-पक्का), परिवारों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, बिजली, कुकिंग फ्यूल, इंटरनेट, टीवी-रेडियो जैसी सुविधाओं की भी जानकारी ली जाएगी।
घर में कितने लोग रहते हैं और कौन-कौन से वाहन उपयोग होते हैं, यह भी दर्ज किया जाएगा।
1. परिवार से जुड़ी जानकारी
परिवार के मुखिया का जेंडर
परिवार के सदस्यों की संख्या
सामाजिक वर्ग (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य)
2. मकान से जुड़ी जानकारी
मकान के स्वामित्व की स्थिति (खुद का / किराए का / अन्य)
मकान का प्रकार (कच्चा / पक्का / अर्ध-पक्का)
मकान का उपयोग (आवासीय / व्यावसायिक)
3. बुनियादी सुविधाएं
पेयजल की उपलब्धता
शौचालय की सुविधा
बिजली कनेक्शन
4. डिजिटल और संचार सुविधाएं
टेलीविजन
इंटरनेट सुविधा
लैपटॉप / कंप्यूटर
टेलीफोन / मोबाइल / स्मार्टफोन
5. परिवहन साधन
साइकिल
स्कूटर / मोटरसाइकिल
अन्य वाहन (संभावित आगे के प्रश्न)
इस बार हर मकान की जियो-टैगिंग कर उसे डिजिटल मैप पर दर्ज किया जाएगा। इसका फायदा कई स्तर पर मिलेगा। आपदा के समय राहत और बचाव तेजी से होगा, किस घर में कितने लोग हैं, तुरंत पता चलेगा।विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन में सटीक डेटा मिलेगा।
शहरों में सड़क, स्कूल, अस्पताल और पार्क की बेहतर प्लानिंग हो सकेगी। पलायन और शहरीकरण की सही तस्वीर सामने आएगी। मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम हटाने में मदद मिलेगी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई सभी जानकारी गोपनीय रखी जाएगी। इसका इस्तेमाल सिर्फ योजनाएं बनाने और नीतिगत फैसलों के लिए किया जाएगा।
जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग करेंगे और शिकायत के लिए हेल्पलाइन भी उपलब्ध रहेगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अधिकृत पहचान पत्र वाले प्रगणकों को ही जानकारी दें और सही व पूरी जानकारी साझा करें।
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