छत्तीसगढ़
CG के शिक्षकों का फूटा गुस्सा, विभागीय TET परीक्षा पर आदेश जारी नहीं होने से नाराजगी
Shantanu Roy
18 Oct 2026 3:30 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आयोजन को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग के साथ कई दौर की बातचीत और आश्वासन के बावजूद परीक्षा के संबंध में आधिकारिक आदेश जारी नहीं होने से शिक्षक संगठनों ने अब आंदोलन की चेतावनी दे दी है। शिक्षक साझा मंच ने स्कूल शिक्षा विभाग से विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित करने के संबंध में तत्काल स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। मंच का कहना है कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और भविष्य से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर लगातार देरी करना उचित नहीं है। यदि जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से दो बार हो चुकी वार्ता
शिक्षक साझा मंच के प्रांतीय संयोजक एवं छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने बताया कि विभागीय टीईटी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के साथ दो दौर की बातचीत हो चुकी है। इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी तीन दौर की चर्चा की गई है। राठौर के अनुसार, इन बैठकों में शिक्षक प्रतिनिधियों को विभागीय टीईटी आयोजित करने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि चर्चा के दौरान साल में तीन बार विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसके बावजूद अब तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
केवल आश्वासन नहीं, लिखित आदेश जारी करे विभाग
रविन्द्र राठौर ने कहा कि शिक्षकों को लगातार आश्वासन देकर समय बिताने की नीति स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभागीय टीईटी से हजारों शिक्षकों का भविष्य और उनकी सेवा सुरक्षा जुड़ी हुई है। ऐसे में विभाग को परीक्षा आयोजन की प्रक्रिया, समयसीमा और आवश्यक दिशा-निर्देश स्पष्ट करने चाहिए। उन्होंने मांग की कि वार्ता में बनी सहमति के अनुसार तत्काल आदेश जारी किया जाए, ताकि शिक्षकों के बीच बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके।
2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग
शिक्षक साझा मंच से जुड़े प्रदीप पाण्डेय ने शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों के सामने टीईटी संबंधी प्रावधानों को लेकर कई सवाल हैं। उन्होंने विशेष रूप से वर्ष 2010 से पहले नियुक्त समस्त शिक्षक संवर्ग को टीईटी से छूट देने की मांग उठाई। पाण्डेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राज्य सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के संबंध में स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। शिक्षकों की समस्याओं का समाधान केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
आदेश जारी नहीं हुआ तो प्रदेशव्यापी आंदोलन
शिक्षक साझा मंच के संचालक विकास राजपूत ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूल शिक्षा विभाग जल्द निर्णय नहीं लेता है तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि मंच शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति और अन्य लंबित मांगों को लेकर चुप नहीं बैठेगा। राजपूत ने मांग की कि विभागीय टीईटी परीक्षा की घोषणा के साथ पात्रता संबंधी शर्तें, आवेदन प्रक्रिया, संभावित परीक्षा कार्यक्रम और अन्य आवश्यक दिशा-निर्देश भी सार्वजनिक किए जाएं।
सभी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाने की तैयारी
जाकेश साहू और लैलून भारद्वाज ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए सभी संगठनों को एकजुट होना होगा। उन्होंने बताया कि शिक्षक साझा मंच जल्द प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित करेगा। बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाने और पूर्व सेवा गणना सहित अन्य महत्वपूर्ण मांगों को लेकर संयुक्त रणनीति तैयार करने पर चर्चा की जाएगी।
सरकार से समयबद्ध निर्णय लेने की मांग
शिक्षक साझा मंच के रविन्द्र राठौर, विकास राजपूत, प्रदीप पाण्डेय, लैलून भारद्वाज, जाकेश साहू और चेतन बघेल ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि शिक्षकों के भविष्य से जुड़े विषय को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। विभाग को परीक्षा आयोजन की स्पष्ट कार्ययोजना सामने रखनी चाहिए। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में टीईटी योग्यता हासिल करने की समयसीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाई थी और नियमित अंतराल पर परीक्षा आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
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