छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: कार्यकर्ता नाराज तो क्या मंत्री जिम्मेदार नहीं?

Admin2
27 Oct 2020 6:11 AM GMT
छत्तीसगढ़: कार्यकर्ता नाराज तो क्या मंत्री जिम्मेदार नहीं?
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सरकार और संगठन से नाराज हैं आम कांग्रेसी...

असंतोष की लहर क्षेत्र विशेष में नहीं, पूरे प्रदेश में है

अतुल्य चौबे

रायपुर। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी या असंतोष की बात को भले ही कांग्रेस सरकार के कुछ मंत्री और प्रदेश संगठन गलत ठहराए लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि कांग्रेस के पुराने निष्ठावान कांग्रेसी कार्यकर्ता आज स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। आगामी 17 दिसंबर को कांग्रेस की सरकार के दो साल के कार्यकाल पूरे हो जाएंगे। बीते दो साल में पुराने और संघर्ष के दिनों के कार्यकर्ताओं की जहां उपेक्षा हुई तो दूसरी ओर भाजपा-जोगी कांग्रेस से आए लोग आज चलायमान हैं उन्हें तवज्जो मिली। वष्ठि मंत्री टीएस सिंहदेव ने तो स्वीकार किया है कि पुराने कांग्रेसिंयों में असंतोष है, उनके इस बयान इस बात की पुष्टि भी होती है। लेकिन एक और वरिष्ठ मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कार्यकर्ताओं में नाराजगी की बात से साफ इंकार करते हुए कहा है कि सिंहदेव के क्षेत्र में कार्यकर्ता नाराज हो सकते हैं, उनके क्षेत्र में ऐसा कुछ भी नहीं है। इससे लगता है सरकार के कुछ मंत्री जानकर भी सच को स्वीकारना नहीं चाहते हैं। जबकि हकीकत यही है कि कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष सिर्फ टीएस के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में पुराने कार्यकर्ता सरकार और संगठन के अब तक की उपेक्षा से न सिर्फ नाराज है अपितु वे घर भी बैठ गए हैं।

बयान के निकाले जा रहे मायने...

कार्यकर्ताओं में असंतोष को लेकर टीएस के बयान के राजनीति के जानने वाले कई मायने निकाल रहे हैं। कुछ लोग इसे अपनी निजी असंतोष को जाहिर करने तरीका बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे कांग्रेस की अंदरुनी खींचातानी से जोड़ रहे हैं, हालाकि सरकार में मतभेद की अटकलें अब तक गलत ही साबित हुई हैं। लेकिन सिंहदेव के सरकार से अलग बयानबाजी और बैठकों से दूरी को लेकर लोग चर्चा करते रहे हैं। हालिया बयान को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। लेकिन समय-समय पर उन्होंने सरकार से मतभेद की बातों को खारिज किया है। सीएम ने भी कई बार स्पष्ट किया है सरकार में कोई मतभेद नहीं है और मंत्रिमंडल के सदस्य एकमत हैं। ऐसे में अगर अंसतोष की बात को मान भी लिया जाए तो इस पर सवाल उठाने वाले मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठता है कि आखिर कार उन्होंने अपने क्षेत्र या जिले में ऐसा माहौल क्यों नहीं बनाया जिसमें सभी कार्यकर्ताओं की हितों का ख्याल रखा जा सके।

टीएस के बयान से जमीनी हकीकत सामने

कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी को लेकर राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंहदेव के हालिया बयान से यह हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है। विगत दिनों अंबिकापुर में टीएस सिंहदेव ने कहा था कि सरगुजा संभाग में ऐसा देखनेे में आ रहा है कि संघर्ष के दिनों में कांग्रेस के जिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी को आगे ले जाने में भूमिका निभाई उन्हें छोड़ पार्टी में नए जुड़े लोगों को महत्व दिया जा रहा है। सिंहदेव का बयान आने के बाद पार्टी के बड़े नेताओं में उनके बयान को लेकर सनसनी फैल गई है। सरगुजा संभाग में यह देखा गया कि कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं को छोड़ विधायक और उनसे करीबी लोगों को महत्व दिया जा रहा है। इसका उदाहरण मनेंद्रगढ़ विधानसभा में देखने को मिला। जहां पार्टी से 20 साल से जुड़े और विपक्ष में रहने के दौरान पार्टी में आवाज बुलंद करने वालों को एल्डरमैन नहीं बनाया गया. वहीं नए जुड़े लोगों को इस पद पर मनोनीत किया गया। सभी एल्डरमैन विधायक के बहुत नजदीकी माने जाते है। सरगुजा संभाग में संगठन में नियुक्ति को लेकर भी मतभेद सामने आ रहे है। कार्यकर्ताओं ने अपनी बातों से पंचायत मंत्री को अवगत कराया है।

निगम-मंडलों में नियुक्ति की सुगबुगाहट

सीएम भूपेश बघेल के दिल्ली दौरे के साथ ही बचे हुए निगम-मंडलों में नियुक्ति की सुगबुगाहट फिर शुरू हो गई है। शुक्रवार को दिल्ली रवाना होने से पहले सीएम ने संकेत दिया था कि निगम-मंडलों में जल्द नियुक्तियां होंगी। इसके साथ ही पद की लालसा पाले दावेदार फिर सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में अबतक उपेक्षित व ठगा सा महसूस करने वाला आम कांग्रेसी एक बार फिर आशाभरी नजरों से सरकार और संगठन के कर्ता-धर्ताओं की ओर टक-टकी लगाए हुए हैं कि शायद इस बार उनके हक में कोई फैसला हो जाए। हालाकि जानकारों की सोच इसके ठीक विपरीत है। सरकार और संगठन में जिस तरह की सियासत चल रही है उससे निष्ठावान कांग्रेसी उपकृत होंगे इसकी संभावना कम ही है। जो जितना वजनदार होगा कमान उसी को मिलेगा यह तय है।

मरवाही उप-चुनाव के बाद बदलेगी फिजां

कांग्रेस के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले आम कांग्रेसी अब भी आस लगाए हुए हैं कि सीएम के संघर्ष के दिनों में उनका झंडा बुलंद करने वालों की उपेक्षा नहीं हो सकती। ऐसे कुछ समर्पित कार्यकर्ताओं का कहना है कि देर-सबेर हवा का रुख बदलेगा और उनके भी दिन बहुरेंगे। इन कार्यकर्ताओँ को लगता है कि मरवाही उप चुनाव के बाद जब सरकार को दो वर्ष पूरे हो जाएंगे तब भूपेश बघेल सरकार और संगठन दोनों में बड़ा फेरबदल करेंगे। तब आज के फ्रंट लाइन कांग्रेसियों की हवा निकलेगी और सही मायने में आम कार्यकर्ता जो कांग्रेस के जीते-मरते हैं उनकी वापसी होगी।

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