छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ बना फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों का सुरक्षित ठिकाना

Nil dhankar
20 July 2026 10:20 AM IST
छत्तीसगढ़ बना फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों का सुरक्षित ठिकाना
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यूपी, बिहार, उत्तराखंड, तमिलनाडू, आंध्र, मुंबई के फर्जी डिग्रीधारी जनता के स्वास्थ्य के साथ कर रहे खिलवाड़

फर्जी एमबीबीएस डिग्री सर्टिफिकेट सरकार या स्वास्थ्य विभाग पकड़ते क्यों नहीं... जि मेदार कौन...?

फर्जी MBBS डिग्रीधारी प्रदेश में कर रहे जनता का इलाज या खिलवाड़

स्वास्थ्य सेवाएं स्वास्थ्य विभाग के हाथों लेकिन कार्रवाई शून्य, ड्रग्स कंट्रोलर भी खामोश, ह ता वसूली भी चालू

छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक सिंडीकेट और जालसाज डॉक्टरों का भंडाफोड़

गिरोह का साम्राज्य प्रदेश से लेकर दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र तक फैला

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत के बाद जांच की मांग तेज

रायपुर (जसेरि)। राजधानी सहित पूरे छत्तीसगढ़ में फर्जी डिग्रीधारी डाक्टरों ने अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया है। यूपी, बिहार, उत्तराखंड, तमिलनाडू, आंध्र, मुंबई के फर्जी डिग्रीधारी जमता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाडक़र रहे है। कई तो नामी गिरामी अस्पताल में आपरेशन को भीअंजाम दे रहे है। पुलिस को जांच का अधिकार नहीं तब तक नहीं है जब तक कोई शिकायत नहीं करें। लेकिन स्वास्थ्य विभाग क्यों जांच नहीं करती यह सबसे बड़ा सवाल है। बिलासपुर में एक डाक्टर ने अवैध कमाई के लिए सर्पदंश की फर्जी रिपोर्ट दे अपने पेशे को बदनाम कर दिया। दो साल पहले दिसंबर 2024 में छत्तीसगढ़ में एकफर्जी डॉक्टरों का बड़ा खेला हुआ। यहां के कई स्टूडेंट्स कई राज्यों से फर्जी डिग्रियां लेकर डॉक्टरी करने छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्रेशन कराए है। इसे लेकर असली डॉक्टरों का कहना था कि इन पर कार्रवाई होनी चाहिए। ये जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा है।

छत्तीसगढ़ में फर्जी डॉक्टरों का बड़ा राजनीितक खेल चल रहा है। मंत्री विदायक के साथ उनके वोट बैंक औऱ सोशल मीडिया का काम देख रहे है। स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। मंत्री ने इसकी जांच के आदेश भी दे दिए हैं। ये जांच हुई मगर कोई दंडित नहीं हुआ औऱ मामला आया गया होकर दबा दिया गया। छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में मुन्नाभाई डॉक्टर बनाने का गोरख धंधा चल रहा है। महज 20 से 30 लाख रुपये में फर्जी डॉक्टर बनाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक इस पूरे सिंडीकेट और जालसाज डॉक्टरों का भंडाफोड़ हो गया है। यह गिरोह प्रदेश से लेकर दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में फैला है। छत्तीसगढ़ में आयुर्वेदिक, हो योपैथी की 50 से अधिक डिग्रियां फर्जी मिली हैं। कई एमबीबीएस की डिग्रियां भी संदेह के घेरे में आ गई हैं।

जनता से रिश्ता की पड़ताल में पता चला है कि बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री से मेडिकल स्टूडेंट्स छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। इस पड़ताल में ही पता चला है कि छत्तीसगढ़ आयुर्वेद काउंसिल ने इस तरह के कई रजिस्ट्रेशन रद्द किए हैं। अब इसकी जांच मेडिकल काउंसिल भी करेगी। बता दें, फर्जी डिग्रियों का खेल कोचिंग सेंटर, करियर काउंसलिंग के जरिये होता है। काउंसलर युवाओं को बरगलाने उनके घरों तक पहुंच जाते हैं। यहां वे युवाओं के साथ सौदेबाजी करते हैं। इसके बाद घरों में ही परीक्षाएं कराई जाती हैं। इसके बाद रैकेट के जरिये युवाओं को घर बैठे फर्जी डिग्रियां मिल जाती हैं।

कई राज्यों में चल रहा फर्जीवाड़ा : जनता से रिश्ता की टीम की पड़ताल में सामने आया कि देश की प्राइवेट ही नहीं, बल्कि सरकारी यूनिवर्सिटी में भी इस तरह की डिग्रियां दी जा रही हैं। ये डिग्रियां बिहार, झारखंड, ग्वालियर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बांटी जा रही हैं। दूसरी ओर, युवाओं और डॉक्टरों ने इस तरह के मामलों को मेडिकल सर्विस और समाज के लिए खतरा बताया है। उनका कहना है कि इस तरह फर्जीवाड़े करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य मंत्री : इस पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल से बातचीत की गई । इस बातचीत में उन्होंने माना कि पिछले पांच साल में छत्तीसगढ़ में बड़ी सं या में फर्जी डिग्रियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। जैसे ही यह मामल हमारे संज्ञान में आया, वैसे ही इसकी जांच के आदेश दे दिए। जो भी दोषी होगा, उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

फर्जी डॉक्टरों पर शिकंजा कसने अब हर 5 साल में पंजीयन का नवीनीकरण

प्रदेश में दूसरों के रजिस्ट्रेशन नंबर पर अन्य डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं। यही नहीं वे निजी अस्पताल खोलकर मरीजों का इलाज भी कर रहे हैं। ऐसे डॉक्टरों पर शिकंजा कसने के लिए अब छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल (सीजीएमसी) अब हर 5 साल में पंजीयन का रिन्यूअल करेगी। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) का आदेश पहले ही आ चुका है। अब इसे जल्दी से लागू किया जाएगा। इस संबंध में जल्द ही नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके बाद ऐसे फर्जी डॉक्टरों पर लगाम लगने की संभावना है। प्रदेश में दूसरे डॉक्टरों के लाइसेंस या पंजीयन पर प्रैक्टिस करना या अस्पताल खोलना चौंकाने वाला है। बिलासपुर वाले मामले में तो डॉक्टर का पंजीयन भी नहीं है। यह गंभीर मामला है। मामले की जांच करने पर पता चलेगा कि उक्त डॉक्टर की लापरवाही से कितने मरीजों की जान गई होगी। उसके गायब होने से मामला संदिग्ध भी हो गया है। अगर युवक जनरल सर्जरी एसोसिएशन में रजिस्ट्रेशन कराने नहीं पहुंचता तो मामले का खुलासा ही नहीं होता। सीएमएचओ के पास भी उक्त युवक के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मामला सीजीएमसी में है। काउंसिल की पड़ताल में पता चला कि युवक का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। ऐसे ही छुरा वाले मामले में एक डॉक्टर एमबीबीएस तो है, लेकिन एनेस्थेटिस्ट की डिग्री दूसरे डॉक्टर की है। यानी दूसरे डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन पर डॉक्टर ने फेक पंजीयन सीजीएमसी में कराया है। इसलिए मामला गंभीर है। सीजीएमसी में वर्तमान में साढ़े 16 हजार से ज्यादा डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन है। इनमें से कई डॉक्टरों की मौत हो चुकी है। दरअसल जब से राज्य का गठन हुआ है, तब से काउंसिल में इन डॉक्टरों का पंजीयन है। अब 5 साल में पंजीयन में रिन्यूअल होने से मृत डॉक्टरों की जानकारी मिल जाएगी। इससे फेक प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों पर शिकंजा कसेगा। दूसरे के पंजीयन व बिना पंजीयन प्रैक्टिस करने वालों पर भी स ती होगी। एनएमसी के पत्र के बाद काउंसिल रिन्यूअल के नियम को स ती से लागू करेगा। पंजीयन कराने वालों में विदेश से एमबीबीएस पास डॉक्टर भी शामिल हैं। वे भी भारत में पढ़े एमबीबीएस छात्रों के समकक्ष हैं।

बच्ची की मौत पर पता चला कि डॉक्टर का पंजीयन ही नहीं

अंबिकापुर के एक फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट छात्र ने सीजीएमसी में पंजीयन नहीं कराया था। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये छात्र फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (एफएमजीई) पास है भी नहीं। दरअसल वहां एक निजी अस्पताल में ब्लड ट्रांस यूजन के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई। जांच के बाद पता चला कि विदेश से पढ़ा डॉक्टर बच्ची का इलाज कर रहा था। यह मामला भी काउंसिल पहुंचा था। बच्ची के पिता ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया था।

डॉक्टर असली लेकिन रिपोर्ट फर्जी

पिछले दिनों राजनांदगांव जिले में मई 2026 के आखिर में एक बीमार नाबालिग लडक़ी को गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर गर्भवती बताने का गंभीर मामला सामने आया था। सोमनी क्षेत्र की एक 14 वर्षीय बीमार नाबालिग लडक़ी को अस्पताल की गलत मेडिकल जांच रिपोर्ट में गर्भवती घोषित कर दिया गया था। इस गलत रिपोर्ट के आधार पर सोमनी थाने की पुलिस ने लडक़ी को रातभर थाने में रोककर कड़ी पूछताछ की और मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताडि़त किया। बाद में दोबारा जांच में रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। जब पीडि़ता की सोनोग्राफी और अन्य तीन-चार मेडिकल टेस्ट कराए गए, तो उसकी प्रेग्नेंसी रिपोर्ट पूरी तरह नेगेटिव निकली। एक तरफ छत्तीसगढ़ में फर्जी डाक्टरों की तादात बढ़ती जा रही है दूसरी ओर जिनके पास सही डिग्री है वे फर्जी काम करने से बाज नहीं आ रहे हैं। एक डॉक्टर की फर्जी रिपोर्ट से छत्तीसगढ़ीया परिवार को मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा समाज में बेइज्जती का सामना करना पड़ा था। मजे की बात पुलिस भी बहती गंगा में हाथ धो ली। नियमानुसार उन पुलिस वालों को और फर्जी रिपोर्ट देने वाले डाक्टर को कड़ी सजा मिलनी चाहिए सिर्फ ट्रांसफर या सस्पेंड तक ही सीमित नहीं रहें ताकि भविष्य में ऐसा गलत काम करने के पहले कोई हजारों बार सोचें।

फर्जी पीएम रिपोर्ट: डॉक्टर गिर तार, 5 जांच के दायरे में: स्नेक बाइट से फर्जी मौत की रिपोर्ट बनाकर मुआवजा दिलाने के मामले में पुलिस ने सि स में पदस्थ रहीं डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिर तार किया है। उन पर दो मामलों में स्नेक बाइट से मौत की फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है। मामला तोरवा थाना क्षेत्र का है।

दो मामलों की जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा: पुलिस के मुताबिक, तहसील कार्यालय के नायब नाजिर की शिकायत पर महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि दोनों शवों का पोस्टमार्टम तत्कालीन सि स चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी ने किया था और स्नेक बाइट से मौत होने की फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई थी। इसके बाद फरार चल रही डॉक्टर को गिर तार कर जेल भेज दिया गया।

मामले में तीन आरोपी पहले ही भेजे जा चुके हैं जेल : बता दें कि इससे पहले इस मामले में दोनों मृतकों के परिजन और एक वकील समेत तीन आरोपियों को गिर तार कर जेल भेजा जा चुका है। इसके अलावा स्नेक बाइट के 15 मामलों की जांच के दायरे में 4-5 अन्य डॉक्टर भी हैं। इन दोनों मामलों में मृतक निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी और वकील रंजीत कुमार चतुर्वेदी को पहले ही गिर तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं इस पूरे नेटवर्क का मु य आरोपी बताए जा रहे वकील श्रवण वस्त्रकार अब भी फरार हैं। पुलिस के अनुसार, वह लंबे समय से गंभीर बीमारी का इलाज करा रहा है।

डॉक्टर प्रियंका के खिलाफ एक और मामले में भी दर्ज है केस: डॉ. प्रियंका सोनी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में भी एक अलग मामला दर्ज है। आरोप है कि तालापारा निवासी पवन यादव की मौत को उन्होंने स्नेक बाइट बताया था, जबकि जांच में मौत का कारण हार्ट अटैक निकला। इस मामले में पवन यादव की पत्नी और एक अन्य आरोपी की गिर तारी हो चुकी है। सिविल लाइन पुलिस अब जेल से प्रोडक्शन वारंट पर डॉक्टर को हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी।


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