छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़: पूर्व IAS अधिकारी पर ईडी का शिकंजा, अदालत से 63 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की मांग
Rounak Dey
5 Jan 2021 7:30 AM IST

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फाइल फोटो
पूर्व IAS अधिकारी बाबू लाल अग्रवाल
जनता से रिश्ता वेबडेस्क | छत्तीसगढ़/ रायपुर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में रायपुर की नामित अदालत के समक्ष छत्तीसगढ़ के पूर्व ब्यूरोक्रेट बाबू लाल अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है. बाबू लाल अग्रवाल 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जो पूर्व में छत्तीसगढ़ सरकार में प्रमुख सचिव के रूप में भी काम कर चुके हैं.
ईडी ने बाबू लाल अग्रवाल के अलावा, उनके भाइयों अशोक कुमार अग्रवाल, पवन कुमार अग्रवाल और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट सुनील अग्रवाल पर भी आरोप लगाए हैं. अशोक और पवन प्राइम इस्पात लिमिटेड का काम देखते हैं. यह बाबू लाल अग्रवाल के परिवार के सदस्यों और स्वामित्व वाली कंपनी है.
ईडी के अनुसार, जब एजेंसी ने उनकी संपत्तियों की जांच शुरू की तो पता चला कि बाबू लाल अग्रवाल ने अपने भाई अशोक अग्रवाल, पवन अग्रवाल और सीए सुनील अग्रवाल के साथ मिलकर ग्रामीणों के नाम पर 400 से अधिक बैंक खाते खोले थे. जिसमें खरोरा और आसपास के ग्रामीण के नाम शामिल थे.
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक इन खातों समेत कई अन्य खातों में नकदी जमा की गई. सीए सुनील अग्रवाल के स्वामित्व और संचालन वाली 13 शेल कंपनियों का इस्तेमाल भ्रष्ट साधनों से उत्पन्न नकदी के प्लेसमेंट और लेयरिंग में किया गया था. प्राइम इस्पात लिमिटेड (पीआईएल) में शेयर प्रीमियम सहित पूंजी लगाई गई थी. इसी काम के लिए 26 दिल्ली और कोलकाता स्थित अन्य शेल कंपनियों का इस्तेमाल भी किया गया.
पूर्व ब्यूरोक्रेट बाबू लाल अग्रवाल को ईडी ने 9 नवंबर, 2020 को गिरफ्तार किया था. अब वह न्यायिक हिरासत में है. ईडी ने बाबू लाल की 63.95 करोड़ रुपये की संलग्न संपत्तियों को जब्त करने के लिए अदालत के समक्ष एक आवेदन भी दायर किया है.
ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा छत्तीसगढ़ में मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए) के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी. जिसमें खुलासा किया गया था कि बाबूलाल अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों ने बेतरतीब संपत्ति अर्जित की है.
आपको बता दें कि साल 2010 में आयकर विभाग ने भी बाबू लाल अग्रवाल के ठिकानों पर तलाशी ली थी. बाबूलाल अग्रवाल और अन्य के खिलाफ सीबीआई के आरोप पत्र दाखिल करने के बाद 3 और एफआईआर दर्ज की गई थीं. इससे पहले सीबीआई ने भी उन्हें गिरफ्तार किया था.
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