
कर्नाटक | होली के त्योहार के दौरान जहरीले रंगों के इस्तेमाल से स्कूली छात्राओं को जानलेवा नुकसान उठाना पड़ा। उत्तर भारत के एक शहर में कुछ असामाजिक तत्वों ने स्कूल की छात्राओं पर जहरीले रंग फेंक दिए, जिससे 7 छात्राएं अस्पताल में भर्ती हो गईं। इनमें से 4 की हालत नाजुक बताई जा रही है और उनका इलाज जारी है।
कैसे हुआ यह हादसा?
घटना उस समय हुई जब छात्राएं स्कूल से घर लौट रही थीं और कुछ लोगों ने होली के रंगों के नाम पर खतरनाक केमिकल मिश्रित रंग उन पर फेंक दिए। धंधेबाजों द्वारा तैयार किए गए जहरीले रंगों ने छात्राओं की त्वचा को नुकसान पहुंचाया और उन्हें उल्टियां, सांस की परेशानी और त्वचा में जलन की शिकायतें आईं।
अस्पताल में भर्ती छात्राओं की हालत
अस्पताल में भर्ती छात्राओं में से चार की स्थिति काफी गंभीर है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि ये छात्राएं जल्द ठीक नहीं हो सकतीं, क्योंकि रंगों में रासायनिक पदार्थ थे, जो त्वचा के साथ-साथ सांस और आंखों में भी घातक असर डाल सकते हैं।
पुलिस कार्रवाई
इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के जहरीले रंगों का व्यापार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
नशे में रंगों का इस्तेमाल खतरनाक
इस घटना ने एक बार फिर जहरीले रंगों के इस्तेमाल के खतरों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि खतरनाक रासायनिक रंग स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकते हैं और इनका प्रयोग बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।
सावधानी बरतें, रंगों का चयन करें
होली के त्योहार के दौरान सभी से अपील की जा रही है कि केमिकल रंगों से बचें और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें। साथ ही, बच्चों और युवाओं को इस तरह की असामाजिक घटनाओं से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
समाज को क्या सिखने की जरूरत है?
इस घटना से यह साफ होता है कि हमें त्योहारों को सुरक्षित और खुशी के साथ मनाने के लिए जिम्मेदार बनना होगा। रंगों के नाम पर खतरनाक पदार्थों का उपयोग न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि यह समाज में हिंसा और असुरक्षा का भी कारण बन सकता है।





