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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ पुलिस दस वर्षों तक एक सह-आरोपी के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही। इसके चलते आरोपी ने एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में हुई, जहां पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को शपथ पत्र प्रस्तुत कर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया। इस लापरवाही के कारण एक दर्जन से अधिक पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है।
छात्रों से धन वसूली के आरोपों में घिरे मुंगेली निवासी देव कुमार जोशी ने एफआईआर को रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका लगाई थी। मामले की सुनवाई 12 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने की। डीजीपी द्वारा प्रस्तुत हलफनामे में दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध निंदा, वेतन वृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई की जानकारी दी गई। साथ ही, यह भी बताया गया कि जिन छात्रों को प्रवेश नहीं मिला था, उनके प्रवेश पत्रों पर हस्ताक्षर सत्यापन की रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है और जांच जारी है। कोर्ट ने जांच लंबित रहने के आधार पर एफआईआर रद्द करने की याचिका अस्वीकार कर दी।
सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जिन छात्रों को प्रवेश नहीं मिल सका, उनके प्रवेश पत्रों को हस्ताक्षर सत्यापन के लिए भेजा गया है। हस्तलेखन विशेषज्ञ (हैंडराइटिंग एक्सपर्ट) की रिपोर्ट चार सप्ताह में आने की संभावना है। डीजीपी ने 7 फरवरी 2025 को उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर यह जानकारी दी कि आरोपी देव कुमार जोशी के हस्ताक्षर के नमूने लिए गए हैं और सत्यापन के लिए भेजे जा चुके हैं।
दस्तावेज हस्तलेखन विशेषज्ञ को सौंप दिए गए हैं, और चार सप्ताह के भीतर सक्षम न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। याचिकाकर्ता देव कुमार जोशी ने तर्क दिया कि वह प्रवेश पत्र जारी करने के लिए अधिकृत था, अतः उसके विरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता। हाई कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है और जांच लंबित है, जिसे शीघ्र पूरा किया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है और एफआईआर रद्द करने का कोई औचित्य नहीं बनता। न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह आगामी छह सप्ताह के भीतर मामले की जांच पूरी करे।
डीजीपी के निर्देश पर 5 फरवरी 2025 को जशपुर एसपी को आदेश दिया गया कि वे अपराध क्रमांक 94/2015 की जांच कर रहे अधिकारियों से स्पष्टीकरण लें। इसके पश्चात संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। तत्कालीन थाना कुनकुरी में पदस्थ निरीक्षक मल्लिका तिवारी, निरीक्षक उषा सोंधिया, विशाल कुजूर, भास्कर शर्मा, लाल जी सिंह, सुनील सिंह, जोगेंद्र साहू, सकल राम भगत, जोशिक राम और प्रशिक्षु डीएसपी नितेश कुमार सहित अन्य अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कदम उठाए गए। इनमें से कुछ की वेतनवृद्धि रोकी गई, जबकि कुछ की सेवा पुस्तिका में निंदा प्रविष्ट की गई।
'भारत सेवा संस्थान' नामक संस्था सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करती है। इसी संस्था से जुड़े मुंगेली निवासी देव कुमार जोशी और एक अन्य व्यक्ति पर कुछ छात्रों ने धन वसूली का आरोप लगाया था। 6 जून 2015 को जशपुर जिले के कुनकुरी थाने में देव कुमार जोशी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी, किंतु जांच में विशेष प्रगति नहीं हुई। इस बीच, देव कुमार को अग्रिम जमानत मिल गई, लेकिन नौ वर्षों से अधिक समय बीतने के बावजूद जांच पूरी नहीं हो सकी। इसी आधार पर देव कुमार ने पुनः हाई कोर्ट में एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने 5 फरवरी 2025 को डीजीपी को व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
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