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Raigarh. रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथी की करंट लगने से हुई मौत के मामले में वन विभाग ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए गुरुवार को छह और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस तरह इस गंभीर मामले में अब तक कुल 16 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। घटना रायगढ़ वनमंडल के वन परिक्षेत्र तमनार के ग्राम केराखोल की है, जहां 19-20 अक्टूबर 2025 की दरम्यानी रात को एक हाथी की विद्युत प्रवाहित तार की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
वन विभाग ने इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत गंभीर अपराध मानते हुए वन अपराध प्रकरण क्रमांक पी.ओ.आर./4781/17, दिनांक 20.10.2025 दर्ज किया था। विभाग की जांच टीम ने पहले ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बाद लगातार निगरानी और जांच अभियान चलाते हुए 12 नवंबर को वन विभाग की विशेष टीम ने और छह आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में रामचरण पिता भंवर सिंह राठिया, जयलाल पिता सिदार राठिया, श्रवण कुमार पिता भगेश्वर राठिया, गोविंद पिता हंसराम राठिया, करमसिंह पिता भगतराम राठिया और मकुंद पिता चैतराम राठिया शामिल हैं। सभी आरोपी ग्राम केराखोल के ही निवासी हैं। विभाग ने इन सभी को माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, घरघोड़ा, जिला रायगढ़ के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
वनमंडलाधिकारी रायगढ़ ने बताया कि जांच के दौरान यह पाया गया कि ग्रामीणों द्वारा जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों में अवैध रूप से बिजली का तार बिछाया गया था, जिससे करंट प्रवाहित हो रहा था। इसी के संपर्क में आने से हाथी की मौत हुई। उन्होंने कहा कि यह वन्यजीवों के प्रति अमानवीय कृत्य है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 और 51 के तहत यह दंडनीय अपराध है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग की नीति ऐसी घटनाओं पर "शून्य सहनशीलता" (Zero Tolerance) की है। किसी भी व्यक्ति द्वारा अवैध विद्युत प्रवाह, शिकार या वन्यजीवों को हानि पहुंचाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी व्यक्ति इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। रायगढ़ जिला लंबे समय से हाथियों के विचरण क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में हाथियों की मौत के कई मामले बिजली के करंट, जाल और अवैध शिकार से सामने आए हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए वन विभाग ने अब लगातार गश्त और निगरानी बढ़ा दी है।
वनमंडलाधिकारी ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा दिलाना नहीं, बल्कि लोगों में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। यदि ग्रामीण अपने खेतों में फसलों की सुरक्षा चाहते हैं, तो उन्हें विभाग से संपर्क कर कानूनी और सुरक्षित उपाय अपनाने चाहिए। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी अवैध गतिविधि, करंट बिछाने या शिकार जैसी घटनाओं की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें। विभाग ने इसके लिए हेल्पलाइन और स्थानीय रेंज कार्यालयों को सक्रिय किया है, ताकि ऐसी घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि ऐसी सख्ती से भविष्य में कोई भी व्यक्ति वन्यजीवों के प्रति गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने से पहले कई बार सोचने को मजबूर होगा। इस पूरी कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि रायगढ़ वनमंडल में वन विभाग वन्यजीव संरक्षण को लेकर पूरी तरह सक्रिय और सतर्क है। विभाग अब इस प्रकरण से जुड़ी आगे की जांच जारी रखेगा और यह पता लगाएगा कि क्या किसी और व्यक्ति की संलिप्तता इस अवैध गतिविधि में थी।
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