छत्तीसगढ़

CG: साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल 8 म्यूल बैंक खाताधारकों पर शिकंजा

Shantanu Roy
15 July 2026 7:20 PM IST
CG: साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल 8 म्यूल बैंक खाताधारकों पर शिकंजा
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Durg. दुर्ग। साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर ठगी की रकम के अवैध लेन-देन में इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 8 खाताधारकों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की है। थाना छावनी, थाना उतई और थाना दुर्ग कोतवाली क्षेत्र में दर्ज तीन अलग-अलग मामलों में यह कार्रवाई की गई है। पुलिस के अनुसार इन खाताधारकों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत कार्रवाई की गई है। जांच में सामने आया कि आरोपी कमीशन के लालच में अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और मनी ट्रेल छिपाने के लिए किया जा रहा था।

दुर्ग पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर साइबर अपराध और म्यूल बैंक खातों के खिलाफ विशेष अभियान चला रही है। इसी अभियान के तहत थाना छावनी, थाना उतई, थाना दुर्ग कोतवाली और एसीसीयू दुर्ग की संयुक्त टीम ने तकनीकी निगरानी, बैंक खातों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की। पुलिस ने बताया कि थाना छावनी के अपराध क्रमांक 312/2026, थाना उतई के अपराध क्रमांक 240/2026 और थाना दुर्ग कोतवाली के अपराध क्रमांक 241/2026 में साइबर ठगी की राशि के लेन-देन में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जांच की जा रही थी। जांच के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क का खुलासा हुआ।

कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराते थे आरोपी
जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी साइबर अपराधियों के संपर्क में आकर अपने बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों की सिम तक उपलब्ध करा देते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन के रूप में रकम दी जाती थी। पुलिस के अनुसार कुछ आरोपियों ने अपने बैंक खाते 10 हजार रुपये से 15 हजार रुपये तक की राशि लेकर साइबर अपराधियों को बेच दिए थे। इसके बाद संबंधित बैंकिंग दस्तावेज और सिम कार्ड भी साइबर अपराधियों को सौंप दिए गए थे। इन खातों का नियंत्रण पूरी तरह अपराधियों के हाथ में चला गया था। साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और असली अपराधियों तक पहुंचने वाली मनी ट्रेल को छिपाने के लिए करते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।

म्यूल बैंक खाते साइबर अपराधियों का बड़ा हथियार
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक साइबर अपराधों में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे खाते आम लोगों के नाम पर होते हैं, लेकिन उनका संचालन साइबर अपराधियों द्वारा किया जाता है। अपराधी इन खातों के जरिए ठगी की रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर करते हैं, जिससे जांच एजेंसियों को असली अपराधियों तक पहुंचने में परेशानी होती है। दुर्ग पुलिस ने तकनीकी जांच और बैंकिंग साक्ष्यों के आधार पर इन खातों की पहचान की और कार्रवाई को अंजाम दिया।

इन लोगों के खिलाफ हुई कार्रवाई
पुलिस द्वारा कार्रवाई किए गए म्यूल बैंक खाताधारकों में
अश्वंश कुमार प्रसाद (25 वर्ष), निवासी बापू नगर, जोन-02, खुर्सीपार, भिलाई।
सागर राम, निवासी शिवाजी नगर, चंद्रमा चौक, खुर्सीपार, भिलाई।
नितिन सिंघल (45 वर्ष), निवासी वर्धमान हाइट्स, गंजपारा, दुर्ग।
अजय कुमार धहरिया (28 वर्ष), निवासी इंदिरा नगर, सुपेला, भिलाई।
सोनू कमलाकर पाटने (34 वर्ष), निवासी हाउसिंग बोर्ड, भिलाई।
राहुल यादव (28 वर्ष), निवासी गोकुल नगर, जामुल।
रेखा सिंह, निवासी सुपेला।
जूही तबस्सुम, निवासी कैंप-02, भिलाई।
पुलिस के अनुसार रेखा सिंह के मामले में अभी विवेचना जारी है।

बैंकिंग दस्तावेज और मोबाइल जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं। इन दस्तावेजों की जांच के आधार पर साइबर ठगी के नेटवर्क की आगे की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

दुर्ग पुलिस की नागरिकों से अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के बहकावे में आकर या कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बैंक खाता किराए पर देना, बेचना या किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना गंभीर अपराध है। ऐसा करने वाले व्यक्ति स्वयं साइबर अपराध के मामले में आरोपी बन सकते हैं। पुलिस ने नागरिकों से कहा है कि किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
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