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Mahasamund. महासमुंद। ओडिशा सीमा से सटी जोंक नदी में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कोमाखान तहसील क्षेत्र के विभिन्न रेत घाटों से बिना रॉयल्टी या पिट पास के रेत निकाले जाने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से यह गतिविधियां जारी हैं, लेकिन अब तक संबंधित विभागों द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्राम पंचायत परकोम के उप सरपंच खिलावन यादव सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि कांदाजेरी और जोंक नदी के तटीय ग्राम- सोनामुंदी, बिंद्रावन, नर्रा, राटापाली, बनियातोरा, परकोम और खट्टी में अवैध रेत उत्खनन खुलेआम चल रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि ओडिशा सीमा से लगे होने के कारण यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रैक्टर और अन्य भारी वाहन सक्रिय रहते हैं।
उनका कहना है कि रोजाना 20 से 25 ट्रैक्टर रेत के परिवहन में लगे दिखाई देते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, परकोम और बनियातोरा घाट पर रात और भोर के समय पोकलेन मशीनों और हाईवा वाहनों के जरिए रेत निकाली जाती है। आरोप है कि निकाली गई रेत को ओडिशा के अंदरूनी इलाकों में भेजा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के अनियंत्रित उत्खनन से नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि नर्रा से खट्टी तट तक नदी की गहराई और बहाव क्षेत्र में बदलाव देखा जा रहा है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे खनन के कारण नदी के किनारों का कटाव बढ़ा है और पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर पड़ा है। कुछ ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
उप सरपंच खिलावन यादव ने बताया कि पहले नदी तट के आसपास किसान तरबूज और सब्जियों की खेती करते थे। नदी की उपजाऊ बालू और जल उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र कृषि के लिए अनुकूल माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी खनन गतिविधियों से खेती प्रभावित हुई है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में ठेका पद्धति के दौरान भी अनियमितताओं की शिकायतें हुई थीं। उनका आरोप है कि उस समय भी अत्यधिक उत्खनन से नदी की गहराई और बहाव क्षेत्र प्रभावित हुआ था। अब दोबारा ऐसी ही स्थिति बन रही है, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और खनिज विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अवैध उत्खनन पर शीघ्र रोक नहीं लगी, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। इस संबंध में संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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