छत्तीसगढ़
CG BREAKING: गोमर्डा अभ्यारण में भालू की खोपड़ी मिलने से हड़कंप
Shantanu Roy
14 Aug 2025 10:33 PM IST

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छग
Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। गोमर्डा वन्यजीव अभ्यारण में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। अभ्यारण के मल्दा भालुकोना बीट अंतर्गत ग्राम कपरतूंगा स्थित तालाब में भालू की खोपड़ी मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि अज्ञात शिकारियों ने भालू का बेरहमी से शिकार किया, उसकी खाल उतार दी और सिर को तालाब में फेंक दिया। इस घटना ने न केवल वन्यजीव संरक्षण के हालात पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर भी गहरी चोट की है।
स्थानीयों का वन विभाग पर आरोप
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका आरोप है कि रेंजर से लेकर बीट गार्ड तक कोई भी नियमित गश्त नहीं करता, जिससे शिकारियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई बार वन्यजीव शिकार की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। यहां तक कि राष्ट्रीय पशु बाघ के शिकार के मामलों पर भी अधिकारी चुप्पी साधे रहते हैं।
मौके पर जांच और कार्रवाई
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच में स्निफर डॉग की मदद ली गई, लेकिन कई घंटे बीत जाने के बावजूद कोई पुख्ता सुराग नहीं मिल पाया। ग्रामीणों के अनुसार, विभाग का अधिकांश काम केवल कागजों में होता है और जमीनी स्तर पर निगरानी बेहद कमजोर है।
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि गोमर्डा अभ्यारण के कई हिस्सों में वन्यजीवों की सुरक्षा पूरी तरह प्रभारियों और सीमित स्टाफ पर टिकी हुई है, जबकि वास्तविक गश्त या निगरानी के नाम पर खानापूर्ति की जाती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक चुप्पी
गौरतलब है कि इस तरह के वन्यजीव शिकार के मुद्दे पहले भी विधानसभा में उठाए जा चुके हैं, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। वन्यजीव संरक्षण कानून के बावजूद, शिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का अभाव यह दर्शाता है कि विभागीय नाकामी अब गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है।
वन्यजीव संरक्षण पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि भालू जैसे संरक्षित वन्यजीव का इस तरह शिकार किया जाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह पूरे वन्यजीव तंत्र के लिए खतरे की घंटी है। यदि जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो जंगल और उसमें रहने वाले वन्यजीव पूरी तरह असुरक्षित हो जाएंगे। मामले की गंभीरता के बावजूद, इस घटना पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। सूत्रों का कहना है कि अधिकांश अधिकारी मुख्यालय में बैठकर ही काम चलाते हैं, जिससे जमीनी स्तर पर निगरानी कमजोर पड़ जाती है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग की गश्त व्यवस्था को मजबूत किया जाए, दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई हो और शिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण के लिए आधुनिक निगरानी उपकरण, ड्रोन और अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था की जाए। फिलहाल, इस घटना ने पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल बना दिया है, और लोग इंतजार कर रहे हैं कि क्या इस बार विभाग सचमुच अपराधियों तक पहुंचेगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
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