छत्तीसगढ़

CG BREAKING: सालभर बाद रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए कवासी लखमा

Shantanu Roy
4 Feb 2026 7:06 PM IST
CG BREAKING: सालभर बाद रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए कवासी लखमा
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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा करीब एक साल बाद बुधवार को रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए। जेल से रिहाई के दौरान उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा गया। इस मौके पर लखमा की धर्मपत्नी कवासी बुदरी, कोंटा विधायक विक्रम मंडावी, सावित्री मंडावी सहित बस्तर अंचल से बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। जेल से बाहर निकलते ही कवासी लखमा ने हाथ जोड़कर समर्थकों का अभिवादन किया और इसे “सत्य की जीत” बताया।

कवासी लखमा पिछले एक वर्ष से शराब घोटाले के मामले में रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। उन पर आरोप है कि शराब घोटाले में उन्हें करीब 70 करोड़ रुपये का कमीशन मिला। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बाक्ची और जस्टिस पंचोली शामिल थे, ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) में दर्ज मामलों की एक साथ सुनवाई की। विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने कवासी लखमा को अंतरिम जमानत प्रदान की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के साथ कड़ी शर्तें भी लगाई हैं। जमानत की शर्तों के अनुसार कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा। हालांकि, कोर्ट में पेशी या कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ आने की अनुमति होगी।

इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और वर्तमान पता व मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा। उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद ED ने उन्हें 7 दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। इसके पश्चात 21 जनवरी से 4 फरवरी तक उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। इसके बाद से लगातार कवासी लखमा रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आए हैं। ED का आरोप है कि कवासी लखमा छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट के अहम हिस्से थे। जांच एजेंसी के मुताबिक लखमा के निर्देश पर ही पूरा सिंडिकेट काम करता था और उन्हें शराब सिंडिकेट से नियमित रूप से लाभ पहुंचाया जाता था। ED का यह भी दावा है कि लखमा ने राज्य की शराब नीति में बदलाव करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इशारे पर ही छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई, जिससे निजी हाथों को शराब कारोबार में व्यापक लाभ मिला।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, कवासी लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ED के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में दलील दी थी कि करीब तीन साल तक शराब घोटाला चलता रहा और इस दौरान कवासी लखमा को हर महीने लगभग 2 करोड़ रुपये की अवैध राशि मिली। इस तरह 36 महीनों में उन्हें कुल 72 करोड़ रुपये की रकम मिली। ED का दावा है कि इस अवैध कमाई का इस्तेमाल कवासी लखमा के बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और सुकमा में कांग्रेस भवन के निर्माण में किया गया। जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। ED के मुताबिक शराब सिंडिकेट से जुड़े नेताओं, कारोबारियों और अधिकारियों ने मिलकर 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED लगातार जांच कर रही है। ED ने इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में FIR दर्ज कराई है, जिसमें 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का उल्लेख किया गया है। जांच में सामने आया है कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। फिलहाल कवासी लखमा को अंतरिम जमानत मिली है और मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी। उनकी रिहाई को जहां समर्थक न्याय की जीत बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तीखी बहस भी शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित मामले पर देश की राजनीति और छत्तीसगढ़ की सियासत की नजरें टिकी रहेंगी।
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