छत्तीसगढ़
CG BREAKING: जेल वार्ड में रसूखदार कैदी को स्पेशल ट्रीटमेंट, दो प्रहरी सस्पेंड
Shantanu Roy
28 March 2026 6:31 PM IST

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Ambikapur. अंबिकापुर। सेंट्रल जेल अंबिकापुर में एक रसूखदार कैदी को स्पेशल ट्रीटमेंट मिलने की घटना ने जेल प्रशासन में हलचल मचा दी है। मामला तब उजागर हुआ जब जेल सुपरीटेंडेंट को यह शिकायत मिली कि गंभीर बीमारी के बहाने शिफ्ट किए गए कैदी गुरुबख्श सिंह (61 वर्ष) के परिजन जेल वार्ड में नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। जांच में यह सामने आया कि कैदी और उनके परिजन जेल के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे और वार्ड के बाहर का ताला खुला हुआ था। इस कार्रवाई के तहत दो जेल प्रहरियों को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि कैदी के परिजनों को दी गई विशेष छूट पर रोक लगा दी गई।
जानकारी के अनुसार, मनेंद्रगढ़ जेल से सेंट्रल जेल अंबिकापुर शिफ्ट किए गए कैदी गुरुबख्श सिंह को जेल के डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी बताया। डॉक्टरों द्वारा जारी किए गए मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर जेल सुपरीटेंडेंट अक्षय सिंह राजपूत ने कैदी के परिजनों को अटेंडर के रूप में जेल वार्ड में पर्मानेंट आने-जाने और कैदी के साथ रहने की अनुमति दी थी। इस विशेष अनुमति के बाद कैदी के परिजन जेल वार्ड में कैदी के लिए हर सुविधा उपलब्ध करवा रहे थे। आरोप है कि परिजन मोबाइल फोन और अन्य उपकरण लेकर वार्ड में आ रहे थे। साथ ही घर से खाना, पानी और मिनरल वाटर जैसी चीजें कैदी तक पहुंचा रहे थे। यह स्पेशल ट्रीटमेंट जेल के नियमों का उल्लंघन था, जिसके चलते जेल सुपरीटेंडेंट ने तुरंत कार्रवाई की।
जेल सुपरिटेंडेंट अक्षय सिंह राजपूत ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड का निरीक्षण किया। जांच के दौरान उन्होंने पाया कि जेल वार्ड का बाहर का ताला खुला हुआ था और कैदी के परिजन नियमों की अवहेलना कर रहे थे। उन्होंने तुरंत ड्यूटी पर तैनात जेल प्रहरियों जयप्रकाश कुजूर और लोकनाथ निषाद को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही कैदी के परिजनों को अटेंडर के तौर पर जेल वार्ड में रहने की अनुमति पर रोक लगा दी गई। जेल प्रशासन के अनुसार, सेंट्रल जेल में गंभीर रोगियों का इलाज जेल में पोस्टेड डॉक्टरों के द्वारा किया जाता है। जब किसी बंदी की स्थिति गंभीर होती है, तो उसे मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में रेफर किया जाता है। हालांकि आरोप है कि रसूखदार कैदी अपने प्रभाव और पैसे खर्च कर अन्य बंदियों की तुलना में विशेष सुविधाएं आसानी से प्राप्त कर लेते हैं।
जेल में मिलने वाली इन विशेष सुविधाओं में परिजनों के साथ लगातार मिलने और जेल वार्ड में रहने की छूट भी शामिल है। जेल प्रशासन का कहना है कि जेल वार्ड में नियमों का उल्लंघन गंभीर मामला है। जेल सुपरीटेंडेंट ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन हर कैदी और उनके परिजनों के लिए अनिवार्य है। किसी भी तरह की छूट केवल डॉक्टरों द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट और आपात स्थिति में दी जा सकती है, न कि व्यक्तिगत रुचि या रसूख के आधार पर। जेल में मरीजों का इलाज और सुविधा व्यवस्था का निरीक्षण नियमित रूप से किया जाता है, ताकि सभी कैदी समान रूप से सुरक्षित और उचित इलाज प्राप्त कर सकें। यह घटना जेल प्रशासन की तत्परता और नियमों के पालन की आवश्यकता को उजागर करती है।
स्थानीय लोगों और जेल कर्मचारियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं जेल की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। जेल के नियमों का पालन न केवल सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह सभी कैदियों के लिए समानता सुनिश्चित करता है। जेल में विशेष सुविधा मिलने पर अन्य कैदियों और उनके परिजनों में असंतोष और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जेल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे किसी भी मामले पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी रसूखदार या सामान्य कैदी को नियमों के बाहर कोई विशेष सुविधा नहीं दी जाएगी। जेल में कर्मचारियों और प्रहरियों की ड्यूटी को और अधिक कड़ा करने की योजना बनाई गई है, ताकि नियमों का उल्लंघन रोकना सुनिश्चित किया जा सके। इस घटना ने जेल व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जेल में किसी भी प्रकार का नियमों का उल्लंघन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।
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