छत्तीसगढ़
CG BREAKING: ताड़ापाला के समीप जंगलों से 711 बीजीएल सेल बरामद
Shantanu Roy
5 Nov 2026 10:14 PM IST

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नक्सलियों की बड़ी साजिश नाकाम
Bijapur. बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उसूर थाना क्षेत्र अंतर्गत एफओबी (FOB) ताड़ापाला के समीप केजी हिल्स के जंगलों में सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने सघन सर्च ऑपरेशन चलाकर नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए 711 नग बीजीएल (BGL) सेल बरामद किए हैं। समय रहते भारी मात्रा में इस विस्फोटक सामग्री की बरामदगी से नक्सलियों के एक बड़े मंसूबे को नाकाम कर दिया गया है।
संयुक्त टीम का सर्च ऑपरेशन
बीजापुर जिला पुलिस को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई थी कि उसूर थाना क्षेत्र के ताड़ापाला इलाके में माओवादियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री छिपा रखी है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस बीजापुर, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 196वीं वाहिनी और 204 कोबरा (CoBRA) बटालियन की संयुक्त टीम द्वारा सर्च अभियान शुरू किया गया। 5 नवंबर 2026 को सुरक्षा बलों की टीम जब ताड़ापाला एफओबी से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम दिशा में केजी हिल्स की पहाड़ियों के समीप सर्चिंग कर रही थी, तभी नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखा गया 711 नग बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) सेल का जखीरा बरामद हुआ।
सुरक्षित कब्जे में लिया गया जखीरा
बरामद बीजीएल सेलों को सुरक्षा मानकों और निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए सुरक्षा बलों ने अपनी कस्टडी और सुरक्षित कब्जे में ले लिया। इस विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल माओवादी कैंपों या सुरक्षा बलों के गश्ती दलों पर हमले के लिए करने वाले थे।
आम नागरिकों से अपील: पहाड़ियों की तरफ न जाएं
सुरक्षा बलों और बीजापुर पुलिस ने आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष अपील जारी की है। पुलिस ने कहा है कि स्थानीय ग्रामीण और आम नागरिक कर्रेगुट्टा एवं आसपास की पहाड़ियों तथा जंगलों में जाने से फिलहाल पूरी तरह परहेज करें। क्षेत्र में अभी भी बारूदी सुरंग (आईईडी) अथवा अन्य न फूटे हुए विस्फोटक सामग्री होने की प्रबल आशंका बनी हुई है, जो जान-माल के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में निर्धारित कार्ययोजना के तहत इस पूरे क्षेत्र में व्यापक डी-माइनिंग (बारूदी सुरंग निष्प्रभावीकरण) अभियान चलाया जाएगा, जिसके बाद ही क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किया जाएगा।
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