छत्तीसगढ़
CG BREAKING: गले में चना फंसने से 2 साल के मासूम की मौत, परिजन सदमें में
Shantanu Roy
24 July 2025 11:13 PM IST

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छग
Korba. कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां गले में चना फंसने से एक दो वर्षीय मासूम की मौत हो गई। यह हादसा गुरुवार सुबह उस वक्त हुआ जब बच्चा घर में खेलते हुए गलती से चना निगल गया। मामले को लेकर जहां परिजन अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, वहीं डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा जब अस्पताल लाया गया, उसकी स्थिति पहले से ही बेहद नाजुक थी और मौत इंटरनल ब्लीडिंग के कारण हुई।
घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। मृतक मासूम का नाम दिव्यांश कुमार है, जो मध्यप्रदेश के राजगढ़, ब्यावरा निवासी छोटू कुमार का बेटा था। छोटू अपने भाई के साथ कोरबा में पानी पुरी बेचने का काम करता है और अपने परिवार के साथ अस्थायी रूप से यहीं पर रह रहा था। गुरुवार सुबह लगभग 8 बजे दिव्यांश आंगन में खेल रहा था और अचानक घर के भीतर चला गया। वहां रखे चना खाने के दौरान वह चना उसके गले में फंस गया, जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी और वह रोने लगा।
घबराए परिजनों ने तुरंत दिव्यांश को मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा पहुंचाया। बच्चा उसके चाचा गोलू बंसल की देखरेख में अस्पताल लाया गया। गोलू का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने उपचार में देरी की। जब उन्होंने बच्चे की हालत पूछी, तो उन्हें बार-बार यह कहकर टाल दिया गया कि "बड़े डॉक्टर आकर देखेंगे।" उनका यह भी आरोप है कि समय पर इलाज मिल जाता तो दिव्यांश की जान बचाई जा सकती थी। मामले में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हरबंश ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि बच्चा जब अस्पताल लाया गया, उसी वक्त उसकी स्थिति गंभीर थी। डॉक्टरों की टीम ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया था, लेकिन समस्या यह थी कि चना गले से फेफड़ों तक पहुंच गया था, जिससे अंदरूनी रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) शुरू हो गया था।
उन्होंने लापरवाही के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि डॉक्टरों ने हरसंभव प्रयास किया, लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका। बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है, जिसे वे अपने गृह ग्राम मध्यप्रदेश लेकर रवाना हो गए। इस पूरे मामले को लेकर अब तक सिविल लाइन थाने में कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, हालांकि परिजनों के बयान और घटनाक्रम को देखते हुए पुलिस द्वारा भी स्थिति की समीक्षा की जा सकती है। यह घटना न सिर्फ एक मासूम की दुखद मौत की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि नन्हें बच्चों की देखरेख में थोड़ी सी चूक कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। साथ ही यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की तत्परता और अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर भी कई सवाल खड़े करता है।
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