छत्तीसगढ़
CG: कम ब्याज पर लोन का झांसा देकर 73 लाख की ठगी, 2 आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
7 Dec 2025 9:51 PM IST

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Bilaspur. बिलासपुर। रेंज साइबर थाना बिलासपुर की टीम को एक बड़ी उपलब्धि मिली है। प्रधानमंत्री समृद्धि योजना के नाम पर कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये हड़पने वाले अंतर्राज्यीय साइबर अपराधी गिरोह के दो सक्रिय सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ गए हैं। यह गिरफ्तारी बिहार के वैशाली जिले में की गई। दोनों आरोपियों पर बिलासपुर के एक मेडिकल व्यवसायी से बीते डेढ़ वर्ष के भीतर 73.23 लाख रुपये ठगने का गंभीर आरोप है। पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक बड़े संगठित साइबर अपराध नेटवर्क का भंडाफोड़ है, बल्कि उन आम लोगों के लिए भी चेतावनी है जो सरकारी योजनाओं के नाम पर मिलने वाले फोन कॉल के झांसे का शिकार हो जाते हैं।
पूरा मामला थाना सकरी क्षेत्र से जुड़ा है। सी-24, फेस-1 नेचर सिटी निवासी चिकित्सक एवं व्यवसायी राजेश पांडेय ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें श्रीराम सिटी यूनियन फाइनेंस लिमिटेड, मुंबई का अधिकारी बनकर फोन कॉल किए गए। कॉल करने वालों ने प्रधानमंत्री समृद्धि योजना के तहत 50 लाख रुपये का लोन देने और उस पर 30 प्रतिशत की छूट का लालच दिया। शुरुआत विश्वास जीतने से हुई और इसके बाद अलग-अलग प्रोसेस के नाम पर रकम मांगी जाने लगी। फरवरी 2024 से सितंबर 2025 के बीच लगभग 20 महीनों तक लगातार विभिन्न नंबरों से फोन कर आरोपियों ने पीड़ित को 73,23,291 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा करवाए। आरोपियों ने खुद को ग्रिजेश त्रिवेदी सहित अन्य नामों से परिचित कराया था। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये पहचानें फर्जी थीं। मामले की गहराई में जाने पर पता चला कि इस धोखाधड़ी में कई फर्जी बैंक खातों, फर्जी सिम कार्ड और कई मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा था। साइबर टीम ने कॉल डंप, वारदात में प्रयुक्त बैंक अकाउंट्स, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शंस का विश्लेषण किया। सभी तकनीकी जांचों में एक संगठित नेटवर्क की पुष्टि हुई जो देशभर में फैला हुआ है।
पीड़ित से 20 महीनों तक लगातार ‘कम ब्याज में लोन’ का लालच देकर पैसे वसूलने का यह तरीका बेहद योजनाबद्ध था। आरोपी हर बार किसी न किसी नए प्रोसेस, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, सुरक्षा राशि, फाइल ओपनिंग चार्ज या इंस्पेक्शन फीस जैसे कारणों का हवाला देकर पैसे जमा करवाते रहे। पीड़ित को जब संदेह हुआ तब तक लाखों रुपये उनके खाते से निकल चुके थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी रेंज बिलासपुर डॉ. संजीव शुक्ला (भा.पु.से.) और एसपी रजनेश सिंह (भा.पु.से.) के निर्देशन पर विशेष साइबर टीम गठित की गई। निरीक्षक रजनीश सिंह के नेतृत्व में टीम बिहार के वैशाली जिले रवाना हुई। दो दिनों तक लगातार पतासाजी, सर्विलांस और स्थानीय पुलिस की सहायता से दबिश दी गई और आखिरकार इस गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपी विकास कुमार उर्फ विक्रम सिंह (28 वर्ष) और अमन कुमार सिंह उर्फ पीयूष वैशाली जिले के महुआ थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 13, गढ़वाल कनौली के निवासी हैं।
पूछताछ में पता चला कि आरोपी दिल्ली में किराए के मकानों में रहकर अपने साथियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर साइबर फ्रॉड करते थे। ये लोग विभिन्न राज्यों में फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे और उन्हीं खातों में ठगी की रकम जमा करवाते थे। रकम खाते में आते ही टीम के सदस्य उसे अलग-अलग चैनलों से निकाल लेते थे ताकि ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। फर्जी नाम, फर्जी सिम और फर्जी बैंक खातों के उपयोग से ये साइबर अपराध को अंजाम देते हुए लंबे समय तक पुलिस से बचते रहे। साइबर थाना ने दोनों आरोपियों के खिलाफ 111 बीएनएस (संगठित अपराध) सहित ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के गंभीर प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है। पुलिस का मानना है कि यह साइबर गैंग काफी बड़ा है और पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है। ठगी की रकम कहां-कहां पहुंचाई गई और किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई, इस पर भी जांच जारी है।
यह केस बिलासपुर रेंज साइबर थाना की बड़ी उपलब्धि इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी योजनाओं के नाम पर लोन, सब्सिडी, कैशबैक और छूट देने के नाम पर देशभर में हजारों लोग ठगी का शिकार हो चुके हैं। इस तरह की धोखाधड़ी में अपराधी कॉल सेंटर जैसे तंत्र का उपयोग करते हैं और संगठित रूप से काम करते हैं। अलग-अलग राज्यों से सिम कार्ड और खाते खोलकर वे पुलिस की पकड़ से बचते रहते हैं। बिलासपुर पुलिस ने तकनीक और फील्ड वर्क का बेहतर तालमेल कर इस गिरोह के दो सदस्यों को पकड़कर बड़ी राहत प्रदान की है। साइबर पुलिस ने आम नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि किसी भी सरकारी योजना, बैंक, वित्तीय संगठन या कंपनी के नाम पर आने वाले फोन कॉल पर सावधानी रखें। कोई भी संगठन किसी योजना का लाभ देने के लिए पैसे जमा करने को बाध्य नहीं करता। ऐसे कॉल आने पर तुरंत सावधान होकर 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। यह गिरफ्तारी न केवल एक बड़ी साइबर ठगी का पर्दाफाश है, बल्कि उन हजारों नागरिकों के लिए जागरूकता का संदेश है जो रोजाना ऐसे फ्रॉड कॉल का सामना करते हैं। पुलिस की यह सफलता साइबर अपराध के खिलाफ चल रही मुहिम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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