छत्तीसगढ़

नवा रायपुर में बनेगा मध्य भारत का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण लैब

Shantanu Roy
4 Dec 2025 8:31 PM IST
नवा रायपुर में बनेगा मध्य भारत का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण लैब
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छग
Raipur. रायपुर। नवा रायपुर में मध्य भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण होने जा रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ में नकली खाद्य सामग्री और दवाओं की जांच में तेजी आएगी। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि यह प्रयोगशाला नवा रायपुर के डेढ़ एकड़ के कैंपस में स्थापित की जाएगी। इससे पहले दूसरे राज्यों से नमूने जांच के लिए भेजे जाते थे और रिपोर्ट आने में कई महीने लग जाते थे, लेकिन नई सुविधा के साथ अब जांच रिपोर्ट घंटों में उपलब्ध हो जाएगी और आवश्यक कार्रवाई तुरंत की जा सकेगी।

मंत्री जयसवाल ने कहा कि यह लैब मुख्य बजट 2025-26 की बड़ी घोषणाओं में से एक है। निर्माण के लिए 46.49 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है और मशीनरी सहित पूरी लैब का खर्च लगभग 100 करोड़ रुपये होगा। इस सुविधा के शुरू होने के बाद छत्तीसगढ़ की दूसरे राज्यों पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उन्होंने बताया कि लैब के बनने के बाद रासायनिक परीक्षण क्षमता सालाना 500–800 नमूनों से बढ़कर 7,000–8,000 नमूने प्रतिवर्ष हो जाएगी। माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण, जैसे कि इंजेक्शन और आई ड्रॉप, अब सालाना 2,000 नमूने तक होंगे। इसके अलावा, मेडिकल डिवाइस जैसे हाथ के दस्ताने, कैथेटर आदि जिनका वर्तमान में परीक्षण नहीं हो रहा था, अब सालाना 500 नमूनों की जांच की जाएगी। फार्मास्यूटिकल्स नमूनों की जांच क्षमता भी 50 से बढ़ाकर 1,000 नमूने प्रतिवर्ष की जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि लैब में अत्याधुनिक तकनीक और मशीनरी लगाई जाएगी। इससे छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं और मिलावटी खाद्य पदार्थों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। यह प्रयोगशाला न केवल राज्य में सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि मध्य भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक रिफरेंस सेंटर के रूप में कार्य करेगी। जैसवाल ने कहा कि लैब निर्माण का कार्य तेजी से पूरा किया जाएगा और जल्द ही सभी विभागीय कार्यों और अनुमोदनों के बाद इसका उद्घाटन होगा। यह कदम राज्य सरकार की स्वास्थ्य सुरक्षा और सार्वजनिक हित को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस परियोजना के शुरू होने से न केवल दवा और खाद्य सुरक्षा में सुधार आएगा, बल्कि राज्य में उद्योगों और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी विश्वास बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लैब मध्य भारत में स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
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