छत्तीसगढ़
पत्रकार सुनील नामदेव की हाईकोर्ट याचिका के बाद तत्काल CBI सक्रिय
Shantanu Roy
26 March 2025 8:24 PM IST

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जनहित याचिका के बाद CBI की एंट्री
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टा गेमिंग का अवैध कारोबार तेजी से फलफूल रहा है। सट्टेबाजी पर प्रतिबंध के बावजूद राज्य में कई ऑनलाइन कंपनियां लोगों को करोड़ों का चूना लगा रही हैं। शासन-प्रशासन की निष्क्रियता को देखते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस पर सख्ती दिखाई है और राज्य के गृह सचिव से जवाब मांगा है। वही सीबीआई की टीम भूपेश बघेल के निवास से 11 घंटे की पूछताछ और रेड़ कार्रवाई करने के बाद रवाना हुई है। छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टा कारोबार को लेकर दायर जनहित याचिका के बाद सीबीआई की सक्रियता तेज हो गई है। वरिष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिका के तुरंत बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कई आईएएस-आईपीएस अधिकारियों और वरिष्ठ राजनेताओं के ठिकानों पर सीबीआई ने आज सुबह छापा मारा। मिली जानकारी के अनुसार, सीबीआई की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टेबाजी और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के सिलसिले में हुई है। पत्रकार सुनील नामदेव की याचिका में दावा किया गया था कि प्रदेश में ऑनलाइन सट्टा प्रतिबंधित होने के बावजूद यह कारोबार धड़ल्ले से जारी है। हाईकोर्ट में पेश किए गए सबूतों में कई बड़ी हस्तियों के इस गोरखधंधे से जुड़े होने की बात भी सामने आई थी। गौरतलब है कि ये वही सुनील नामदेव है जो सौम्या चौरसिया का फर्जीवाड़ा और भ्रष्ट्राचार भूपेश शासन काल में खुलासा किया था। जिसके बाद भूपेश सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव को कई सारे अपराधी तथाकथित फर्जी मामलें में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। तब से सुनील नामदेव और भूपेश बघेल का 36 का आकंड़ा है। समय बदलते देर नहीं लगती एक समय भूपेश का था अब ये समय पत्रकार सुनील नामदेव के हाथ में है। ऐसा लगता है कि परिस्थित और ग्रह नक्षत्र सुनील नामदेव के पक्ष में आ गए है।
भूपेश बघेल के पूर्व गनमैन कचरू तक पहुंच सकती है सीबीआई जांच
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े मामलों की जांच अब उनके पुराने गनमैन कचरू तक पहुंच सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई (CBI) इस मामले में आगे की तहकीकात कर सकती है और कचरू से भी पूछताछ संभव है। जानकारी के अनुसार, सीबीआई द्वारा की जा रही जांच में कुछ ऐसे पहलू सामने आए हैं, जो भूपेश बघेल के सुरक्षा दल से जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े कर सकते हैं। ऐसे में कचरू को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि, अभी इस मामले में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां लगातार नए साक्ष्य जुटाने में लगी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीबीआई को कचरू से जुड़े किसी वित्तीय लेन-देन या अन्य संदिग्ध गतिविधियों के सुराग मिलते हैं, तो उससे पूछताछ की जा सकती है। आने वाले दिनों में इस पर बड़ा खुलासा संभव है।
भूपेश बघेल के पुणे के वाकड स्थित होटल पर सीबीआई की नजर
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की संपत्तियों की जांच के दायरे को सीबीआई (CBI) ने और विस्तारित कर दिया है। अब पुणे के वाकड इलाके में स्थित एक होटल जांच के रडार पर आ गया है, जिसे छत्तीसगढ़ के किसी एक अधिकारी से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई को इस होटल से जुड़े कुछ वित्तीय लेन-देन और निवेश से संबंधित दस्तावेज मिले हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि इस होटल के स्वामित्व और संचालन को लेकर सीबीआई जल्द ही संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर सकती है। इससे पहले भी कई मामलों में भूपेश बघेल से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच हो चुकी है और अब पुणे में उनकी कथित संपत्ति को लेकर भी एजेंसियों ने नजर गड़ा दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह होटल किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है।
चर्चित मठ और आश्रम भी सीबीआई के रडार पर, जल्द हो सकती है जांच
छत्तीसगढ़ में सीबीआई (CBI) की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब एक चर्चित मठ और आश्रम भी संदिग्ध गतिविधियों को लेकर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई जल्द ही इस मामले में जांच शुरू कर सकती है और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की संभावना है। जानकारी के अनुसार, इन मठों और आश्रमों में हुए वित्तीय लेन-देन, भूमि सौदे और कथित राजनीतिक संबंधों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल किसी आर्थिक अनियमितता या मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई पहले से ही इन मठों से जुड़े बैंक खातों, संपत्ति दस्तावेजों और अन्य वित्तीय गतिविधियों की निगरानी कर रही है। अगर प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो जल्द ही इन मठों और आश्रमों में छापेमारी भी हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है और अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि सीबीआई कब तक इन मठों और आश्रमों तक पहुंचती है।
CBI की छापेमारी कहां-कहां?
सीबीआई की टीम ने रायपुर में भूपेश बघेल के निवास, कुछ वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के घरों, और राज्य के कुछ बड़े राजनेताओं के ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी ने संबंधित दस्तावेज और डिजिटल डेटा को अपने कब्जे में लिया है। सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी ऑनलाइन सट्टे और अवैध फंडिंग को लेकर हो रही है।
याचिका में क्या कहा गया था?
वरिष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव की ओर से हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टेबाजी पर पाबंदी के बावजूद कई कंपनियां खुलेआम कानून का उल्लंघन कर रही हैं। याचिका में यह भी दावा किया गया कि सट्टा कारोबार में राज्य के कई बड़े अधिकारी और प्रभावशाली लोग शामिल हैं। सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। भूपेश बघेल सहित अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम जांच के घेरे में आ सकते हैं। सोमवार को चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने सट्टा कंपनियों को नोटिस जारी किया और राज्य अधिवक्ता को इस मामले की पूरी रिपोर्ट सौंपने को कहा।
याचिकाकर्ता पत्रकार सुनील नामदेव ने किए अहम खुलासे
यह जनहित याचिका वरिष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव द्वारा दायर की गई थी। उनके वकीलों वैभव तिवारी और अमृतो दास ने कोर्ट को बताया कि छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टा प्रतिबंधित होने के बावजूद यह कारोबार तेजी से चल रहा है। उन्होंने आईपीएल से जुड़े विज्ञापनों और सट्टेबाजी के सबूत पेश किए, जिससे साफ हुआ कि प्रतिबंध के बावजूद कई कंपनियां खुलेआम नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।
गृह सचिव को देना होगा व्यक्तिगत शपथ पत्र
कोर्ट ने राज्य के गृह विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वे मामले में अपना व्यक्तिगत शपथ पत्र पेश करें। अदालत ने राज्य के अधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भारत, उप महाधिवक्ता शशांक ठाकुर और अधिवक्ता तुषार धर दीवान की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला दिया। 15 हजार करोड़ के महादेव ऐप सट्टा घोटाले के बावजूद प्रदेश में ऑनलाइन सट्टा कारोबार धड़ल्ले से जारी है। सरकार डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन सट्टा कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वे डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर मुनाफा कमा रही हैं। ऑनलाइन सट्टे में हजारों लोग अपनी जमा-पूंजी गंवा चुके हैं। हारने के बाद कई परिवार आर्थिक तंगी में आ गए हैं, जिससे उनकी जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अदालत की अगली सुनवाई 4 अप्रैल को होगी, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
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