छत्तीसगढ़
जिला अस्पताल में सिकलिन मरीज की मौत मामला, 7 लोगों पर कार्रवाई
Shantanu Roy
28 Jun 2026 7:33 PM IST

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छग
Durg. दुर्ग। जिला अस्पताल में 1 जून को सिकलिन पीड़िता युवती दीपिका गाढ़ा की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले की जांच के बाद दो डॉक्टरों सहित कुल 7 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई है, जबकि कुछ अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। लगभग 20 दिनों तक चली विस्तृत जांच में यह पाया गया कि ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त उपलब्ध होने के बावजूद पीड़िता को समय पर रक्त उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के परिजनों को ब्लड बैंक भेजा गया था, जहां उन्हें ब्लड के लिए डोनर लाने को कहा गया। परिजनों द्वारा प्रयास किए जाने के बावजूद कोई डोनर उपलब्ध नहीं हो सका। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से रक्त उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे स्थिति गंभीर होती चली गई। इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी काफी विवाद हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच तेज की और जिम्मेदारों की पहचान की। जांच में यह भी सामने आया कि डॉक्टरों और स्टाफ की ओर से गंभीर लापरवाही बरती गई। इसी आधार पर रेडक्रॉस सोसायटी से ब्लड बैंक में नियुक्त दो लैब टेक्निशियन और एनएचएम से नियुक्त दो स्टाफ नर्सों की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।
सेवा समाप्त किए गए कर्मचारियों में तरन्नुम जहां (लैब टेक्नीशियन), नशरा परवीन (रेडक्रॉस), जागेश्वरी देवी (स्टाफ नर्स, एनएचएम) और तनुजा चंद्राकर (स्टाफ नर्स, एनएचएम) शामिल हैं। इसके अलावा अनसतसिया केरकेट्टा (स्टाफ नर्स), डॉ. निखिल अग्रवाल (पीजी रेजिडेंट) और डॉ. तृप्ति तिवारी (एनएचएम विशेषज्ञ) के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उनके नियुक्तिकर्ता को पत्र भेजा गया है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जे.पी. मेश्राम और आरएमओ डॉ. अखिलेश यादव के बयान कई बार बदलने के बावजूद उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई, जिससे सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस कार्रवाई को लेकर एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन ने नाराजगी जताई है। संगठन का कहना है कि केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर पूरे मामले को खत्म करने की कोशिश की जा रही है, जबकि जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों को बचाया जा रहा है। संगठन ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और सभी जिम्मेदारों पर समान कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मंगलवार को कलेक्टर दुर्ग से मुलाकात कर दोबारा इस मुद्दे को उठाने की बात कही है। स्थानीय स्तर पर इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय पर रक्त उपलब्ध कराया जाता तो युवती की जान बचाई जा सकती थी। प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है और आगे भी आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन और ब्लड बैंक संचालन व्यवस्था पर बड़े सुधार की जरूरत को उजागर किया है।
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