छत्तीसगढ़

कैंसर पीड़ित महिला व्याख्याता को 2 लाख की राहत, बाबू सस्पेंड और प्राचार्य को नोटिस

Shantanu Roy
23 April 2026 10:13 PM IST
कैंसर पीड़ित महिला व्याख्याता को 2 लाख की राहत, बाबू सस्पेंड और प्राचार्य को नोटिस
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छग
Raipur. रायपुर। रायपुर में कैंसर से जूझ रही एक महिला व्याख्याता को समय पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि नहीं मिलने के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए महज दो दिनों के भीतर लगभग 2 लाख रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही लापरवाही बरतने पर संबंधित सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी (बाबू) को निलंबित कर दिया गया है और विद्यालय के प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जानकारी के अनुसार, पीड़िता
महिला व्याख्याता
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं और आर्थिक रूप से कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही थीं। इलाज के लिए आवश्यक राशि समय पर न मिलने के कारण उन्होंने हाल ही में कलेक्टर से मुलाकात कर सहायता की गुहार लगाई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।

कलेक्टर के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल मामले को आगे बढ़ाया और संचालनालय लोक शिक्षण को मांग पत्र भेजा। प्रशासन की तेजी के चलते मात्र दो दिनों के भीतर चिकित्सा प्रतिपूर्ति राशि स्वीकृत कर दी गई और भुगतान के लिए संबंधित डीडीओ को जारी कर दी गई है। इस त्वरित कार्रवाई से
पीड़िता
को बड़ी राहत मिली है। जांच में यह बात सामने आई कि महिला व्याख्याता ने अपने विद्यालय में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन संबंधित सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी द्वारा उस आवेदन को उच्च कार्यालय तक नहीं भेजा गया। इसे प्रशासन ने गंभीर लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से संबंधित बाबू को निलंबित करने के निर्देश दिए। निलंबन के बाद कर्मचारी को विकासखंड शिक्षा अधिकारी, धरसींवा कार्यालय में अटैच किया गया है।


इसके साथ ही विद्यालय के प्राचार्य पर भी जवाबदेही तय करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, खासकर तब जब मामला किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारी से जुड़ा हो। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में चिकित्सा प्रतिपूर्ति जैसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से निपटाया जाए, ताकि किसी भी कर्मचारी को इलाज के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हलचल देखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक सख्त संदेश है कि कार्य में लापरवाही करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पीड़िता को समय पर सहायता मिलने से प्रशासन की संवेदनशीलता भी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर लोगों ने कलेक्टर के इस त्वरित निर्णय की सराहना की है और इसे एक सकारात्मक कदम बताया है।
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