व्यवसायी को होटल में बंधक बनाकर हत्या की धमकी, तेलीबांधा पुलिस ने नहीं लिखी शिकायत

रायपुर। राजधानी रायपुर में कानून व्यवस्था पर फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रैंड नीलम होटल के मालिक संजय सिंह स्थापक पर व्यवसायी पार्थिव राय को बंधक बनाकर जान से मारने की धमकी देने और जबरन राजीनामा कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने न केवल अनदेखी की, बल्कि थाने में ही उसे धमकियां दी गईं।
पार्थिव राय के अनुसार, 29-30 मार्च 2025 की रात करीब ढाई बजे से 30 मार्च की दोपहर चार बजे तक ग्रैंड नीलम होटल के मालिक संजय सिंह स्थापक ने उन्हें जबरन बंधक बनाकर रखा और बेरहमी से मारपीट भी की गई जिसका है स्पष्ट सीसीटीवी फुटेज होटल ग्रैंड नीलम में लगे कैमरे में गैर हुआ है क्योंकि वहां कैमरा उपस्थित था। पीड़ित ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर मोबाइल के माध्यम से पुलिस को मैसेज भेजा, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें मुक्त कराया और थाने ले गई। लेकिन थाने में पहुंचने के बाद भी पार्थिव राय की परेशानी कम नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय सिंह स्थापक के आदमियों ने थाने में भी खुलेआम उन्हें जान से मारने की धमकियां दीं। घटना के समय थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने यह सब देखा, लेकिन उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में इस शर्मनाक घटना की पूरी रिकॉर्डिंग मौजूद है।
पार्थिव राय ने बताया कि उनके पिताजी को भी थाने बुलवाया गया और उन पर जबरदस्ती दबाव बनाया गया। संजय सिंह स्थापक के गुंडों ने पीड़ित से जबरन एक चेक पर साइन करवा लिया और धमकी दी कि यदि उन्होंने विरोध किया तो अंजाम गंभीर होगा। इस दौरान पुलिस की निष्क्रियता और आरोपी पक्ष को दिए गए संरक्षण ने कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है।
इतना ही नहीं, जब पार्थिव राय अपने अधिवक्ता के साथ थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, तो नाइट ऑफिसर की अनुपस्थिति का बहाना बनाकर शिकायत लेने से साफ इंकार कर दिया गया। घबराए हुए संजय स्थापक के गुंडों के जाने के बाद देर रात जब पीड़ित अपने अधिवक्ता के साथ थाने पहुंचा, तब भी वहां मौजूद मुंशी ने शिकायत पत्र लेने से साफ इंकार कर दिया। पीड़ित ने मजबूरी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) लाल उमेद सिंह को व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायत भेजी और न्याय की गुहार लगाई।
इस घटना ने रायपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आखिर क्यों पुलिस ने एक बंधक और मारपीट जैसी संगीन घटना में शिकायत दर्ज करने से इंकार कर दिया? क्या संजय सिंह स्थापक जैसे रसूखदार लोगों को बचाने के लिए पुलिस कानून की धज्जियां उड़ा रही है?
पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। पीड़ित को न्याय दिलाना अब पुलिस की जिम्मेदारी है, अन्यथा जनता का कानून व्यवस्था से विश्वास उठना लाजमी है।
थाना तेलीबांधा की पुलिस पीड़ित को होटल ग्रैंड नीलम के रूम से सुरक्षित निकालकर थाने लेकर आई थी। थाना तेलीबांधा में एसआई एच.आर. यादव के सामने ही ग्रैंड नीलम होटल के मालिक संजय सिंह स्थापक के गुंडों ने पीड़ित को खुलेआम धमकियां दीं। आरोपियों ने पीड़ित से कहा, "थाने के बाहर निकल, यहां भी तेरा अंजाम बुरा होगा और तू रोज मार खाएगा अगर राजीनामा नहीं किया तो।" चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी घटना थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद एसआई एच.आर. यादव और अन्य पुलिसकर्मियों ने मौन साधे रखा। रसूखदार आरोपियों के सामने पुलिस की यह चुप्पी न केवल कर्तव्यहीनता को दर्शाती है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी गहरे सवाल खड़े करती है।





