आम जनता को तरह-तरह के प्रलोभन देकर फंसा रहे हैं बिल्डर

खदीददरों को ब्रोशर में मकान की खूबसूरती दिखाकर उठाते हैं फायदा
आकर्षक गिफ्ट और रिटर्न गिफ्ट तथा इवेंट के नाम पर बेली डांस दिखाकर उपभोक्ता को फंसाते
आदिवासियों की जमीनें भी दबाने की शिकायत के बाद भी कोई एक्शन नहीं
रसूखदारों के षड्यंत्र के जाल में फंसे है बड़े-बड़े अधिकारी और छुटभैया नेता
आबादी, घास, कोटवारी,स्कूल सरकारी प्रोजेक्ट, धार्मिक भूमि होती रही चोरी और अधिकारी देखते रहे तमाशा
प्रदेश में खप रहा हैं दो नंबर की कमाई सट्टा और तस्करी का धन
किसी की भी जमीन चाहे सरकारी हो या निजी कब्जा करने का रखते है माद्दा
रायपुर। राजधानी में भी कई बड़े बिल्डरों ने महंगे और लग्जरी योजनाएं लाकर महंगे दामों में प्लाट और फ्लैट व बंगलों बेचे हैं। विधानसभा रोड पर आमासिवनी में स्वर्णभूमि के नाम से भी एक बड़े प्रोजेक्ट में बिल्डर ने 9000/- प्रति वर्ग फुट में प्लाट बेचे। नगर निवेश में इस नाम से कोई ले आउट एप्रुवल नहीं हुआ है। बिल्डर ने अलग-अलग नामों से ले-आउट पास करवाया है। इस प्रोजेक्ट में आबादी के साथ नहर-नाले, सड़क़ के लिए सुरक्षित जमीनों के अलावा कई आदिवासियों की जमीनें भी दबाने की शिकायतें आईं जिस पर कोई कार्रवाई आज तक नहीं हुई है। सरकारी नुमाइन्दों ने बड़े पुरस्कारों के लिए शिकायतों को दबा कर उस तथाकथित बिल्डर के शान में कसीदा पढ़ रहे है। इस कारण आदिवासियों की जमीन पर बालात काबिज शिकायत को ठंडे बस्ते में डाल रखे है।
आईपीएल शुरू होते ही पूरे प्रदेश के साथ सटोरियों में भी खुमारी साफ नजर आ रही है। इसके पीछे कारणों में मुख्य है आईपीएल सट्टा जो तथाककथित नामचीन सटोरिए जो आजकल बिल्डरों की श्रेणी में खड़े है अपना वर्चस्व कायम कऱने के लिए साम-दाम, दंड -भेद का उपयोग कर रेह है । । सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो सटोरियों के सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकार में बिल़्डरों राजधानी का कोटा निर्धारित है। जितने भी सरकारी प्रोजेक्ट है। उसे ध्य़ान में रखकर अधिकारी गोपनीयता को शेयर कर बिल्डर तक सूचनात्मक जानकारी देते है कि फलां गांव में रोड से 500 की दूरी पर घास भूमि है जिस पर कब्जा कर तुरंंत पट्टा के लिए आवेदन करो और लिखो की मैं उक्त जमीन पर पिछले 15 सालों से काबिज हूं भले ही न हो सरकारी जमीन को हड़पने है तो इतना झूठ तो बोलना ही पड़ेगा. उसके बदले में अधिकारियों को मिलता है नजराना उसके कई रूप हो सकते है। बिजनेस पार्टनर हिस्सेदार,बनाकर करो़ड़ों का वारा-न्यारा करने खेल की चमक सटोरियों औऱ बिल्डरों में साफ दिखाई दे रहा है। तथाकथित सफेदपोशों जो आजकल नेता गिरी में सबसे आगे है। जमीन पर वर्चस्व कायम करने के लिए सरकार की करीबी लोगों से रिश्तेदारी निकाल कर सरकारी आरक्षित जमीन को कब्जा कर करने का मौसम आ गया है। सरकारी, कोटवारी, घास भूमि जो सरकार की विभिन्न योजनाओ्ं के लिए आरक्षित रहती है। उस पर गिद्धद्ष्टि डाले रहो है। पिछले 25 सालों में जितनी भी सरकारी जमीन सरकार की योजनाओ्ं के लिए आरक्षित थे, उसका अधिकारियों और बिल्डरों ने एसा मिटयामेट किय़ा कि आज सरकार के पास सरकारी जमीन के टोटे पड़ गए है। मौके ही तमाम जमीनें अब बिल्डरों के जद में आ चुकी है। बिना रेरा से पास कराए सरकारी जमीन पर बलात जमीन दलालों ने धनबल औऱ बाहुबल के जरिए कब्जा कर धड़ल्ले से प्लाट काटकर या बहुमंजिला काम्प्लेक्स बनाकर बेच कर लाल है गए है। सरकार के पास अब कोई सरकारी जमीन ही नहीं है जिसका स्थानीय योजना के लिएआवंटित किय़ा जा सके। सरकार के जितने प्रोजेक्ट है उसकी जानकारी संबंधित विभाग के पास भी नहीं होने से दलालों और बिल्डरों की तो निकल पड़ी है। छुटभैया जमीन दलाल जो सरकार की आंखों में धूलडालकर बिना एनओ्सी रेरा से प्रोजेक्ट स्वीकृति कते बिना अपनी मनमानी का जलजला ला दिया है। बिल्डरों के पास तो एसा पावर आ गया है कि वो किसी की भी जमीन को अपना बताकर उस पर कब्जा कर धड़ल्ले से बिल्डिंग - पर -बिल्डिंग का जाल बिछा दिया है। जिसके कारण किसानों को मुआवजा तक नहीं मिल रहा है । सरकार में सीधे हस्तक्षेप रखने वाले बिल्डरों औऱ दलालों ने कमाई के आड़ में हद ही पार दी है। अब रायपुर जैसे शहर में कोई भी शासकीय प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं बची है। सरकार अब मिल रहे शिकायतों के अधार पर कार्रवाई कर यह जताने के कोशिश की जा रही है कि जो जमीन उनके प्रोजेक्ट पर खड़ी है वो पूरी तरह से सरकार से अनुमोदित है.। सरकार के पास आज की तारीखों में कोई जमीन नहीं है जहां वो अपने विभाग के अनुसार जमीन का अलाटमेंट बताकर अपने कमाई में लगातार इजाफा कर आज संभ्रांत नागरिक होने का चोला पहनकर उसकी आड़ में कोई भी जमीन हो उस जमीनों को हड़पने का काम कर रहे है। जो कल तक सटोरिए और स्मलगर औऱ नशे के धंधे में लिप्त थे। उसी कमाई से भारी भरकम पैसा मिलने पर अब वे बिल्डर बने बैठे है।
कथित सफेदपोश छुटभैया नेता बन गए संरक्षक
शहर के तथा कथित सफेदपोश छुटभैया नेता जो अवैध कमाई करने वालों से संरक्षक की भूमिका में रहकर सटोिरयों गुंडे -बदमाश , तस्करों को प्रश्रय देकर उनकी काली कमाई का हिस्सेदार बनकर उन पैसों को जमीन बिल्डिंग में लगा रहे है। आईपीएल सट्टा से लेकर रतन खत्री वाले सट्टे में सौरभ बनने के रास्ते पर बहुत आगे निकल गए है। सरकार के कुछ चहेते नेताओ् के खास बनकर पुलिस विभाग के आंखों में धूल झोंककर अपने सट्टे , शराब, जुआ, होटल, बिल्डिंग, तस्करी में लगाकर सरकार को सीधे चूना लगा रहे है।
प्लाट या फ्लेट या फिर बंगलों खरीदी पर विदेश यात्रा का आफर
सूत्रों के अनुसार कुछ सटोरियों ने काली कमाई को जमीन और बिल्डिंग में लगाकर हर महीने लाखों की कमाई कर रहे है। नेताओ्ं के झंडा बैनर के अलावा जन्म दिन वर्षगांठ के विज्ञापनों के खर्चे उठाने के साथ अधिकारियों के परिवार वालों को अपने खर्च पर विदेश यात्रा करवा रहे है। सटोरियों से बिल्डर बने बिल्डरों के हर प्रोजेक्ट में प्लाट या फ्लेट या फिर बंगलों खरीदी पर विदेश यात्रा का आफर देकर हर महीने सरकारी जमीन पर बनाए बिल्डिंग से करोडो़ं की कमाई कर छुटभैया नेता और अधिकारियों को बांट रहे है ।
येनकेन प्रकारेण कब्जा का खेल
सटोरियों ने सट्टे के साथ समाज सेवा के नाम पर मंदिरों में भारी भरकम दान देकर मंदिर के प्रबंधन समिति को विश्वास में लेकर मंदिर से लगे खाली जमीन के बारे में जानकारी निकला कर उस जमीन का नक्सा खसरा, बी-1बी-2 निकाला कर जो जमीन पहले से ही उद्यान और मंदिर के लिए आरक्षित है उस पर कब्जा करने का खेल कर रहे है। सरकारी जमीन जो नागरिकों के लिए उद्यान के लिए आऱक्षित जमीनों को टारगेट कर येनकेन प्रकारेण उसे कब्जा करके ही दम ले लेने का समय है।
पूरे छत्तीसगढ़ की सरकारी जमीन पर कब्जा
सटोरिये न सिर्फ राजधानी अपितु पूरे छत्तीसगढ़ में सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे है । भू-माफिया और रियल स्टेट के कारोबारियों ने सरकारी अधिकारी बिल्डरों से सांठगांठ कर सरकारी जमीन का जमकर बंदरबाट कर रहे है। बाहुबली और सरकार में दखल रखने वाले भू-माफिया ने आबादी और अन्य शासकीय प्रयोजनों के लिए आरक्षित जमीनों को दबाकर कई लक्जरी और महंगी कालोनियां विकसित कर प्लाट औ फ्लैट बेंचे और करोड़ों-अरबों कमाए। भू-माफिया की यह काली कमाई और सरकार को चूना लगाने का यह कारोबार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में जमकर फूला-फला। बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट में सरकारी नुमाइंदों और बड़े-बड़े सफेदपोशों ने भी बड़ी पूंजी लगाई है जिसके चलते जमीनें चोरी होती रहीं और सरकार देखती रहीं। सरकार की अनदेखी और अधिकारियों की मनमानी के कारण अरबों की शासकीय जमीनें इन बिल्डरों ने अपनी योजनाओं में शामिल कर मुनाफा कमाते रहे।





