छत्तीसगढ़

बिल्डर लाबी ने गैंगस्टर का प्रयोग कर रायपुर को मुंबई से भी आगे निकाल दिया

Nil dhankar
6 Jun 2022 11:05 AM IST
बिल्डर लाबी ने गैंगस्टर का प्रयोग कर रायपुर को मुंबई से भी आगे निकाल दिया
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  1. सरकारी और किसानी जमीन को कब्जाने बिल्डरों में गैंगवार की आशंका
  2. राजधानी कुछ दिनों में बन जाएगा बिल्डरों का अखाड़ा, देश-विदेश के बिल्डरों की नजर रायपुर पर


जसेरि रिपोर्टर

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मौजूदा बिल्डरों ने कारोबार को बढ़ाने की होड़ में गुंडेृ-बदमाशों और गैंगस्टर का सहारा लेकर दिल्ली-मुबंई के तर्ज पर सुपारी का खेल शुरू कर दिया है। शासन-प्रशासन को बिल्डरों की कारगुजारियों पर कड़ी निगरानी करने की जरूरत है नहीं तो राजधानी गैंगवार की आग में झुलस जाएगा। गैंगवार से राजधानी को बचाने के लिए बिल्डरों की हिस्ट्री खंगालने के साथ उनके सात जुड़े लोगों की कुंडली निकालनी होगी। नहीं तो बिल्डरों की लाबी राजधानी को तवाह कर सकती है। देश -विदेश के नामचीन बिल्डरों ने राजधानी में डेरा डाल दिया है जिससे साफ हो गया है कि भू-माफिया और बिल्डर मिलकर राजधानी में वर्चस्य कायम करने के लिए किसी भी हद को पार कर सकते है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बड़े-बड़े नामी गैंगस्टर बिल्डरों को फाइनेंस कर रहे है। जिसके कारण बिल्डर कारोबार में गैंगस्टरों का पूरा दखल है। साथ ही बिल्डरों के प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले धनाढ्य से लेक र मकान-फ्लेट के जरूरतमंजद मध्यवर्गीय परिवार को टारगेट में ले रका है। रेरा में बिल्डरों के खिलाफ सैकड़ोंं शिकायतों का अंबार लगा हुआ है जिसमें मकान-फ्लेट बेचने के लिए ब्रोशर में सुविधाएं देने की बात की लेकिन खरीदारों को आजज तक वह सुविधा मुहैया नहीं कराने को लेकर विवाद चरम पर पहुंच चुका है। रेरा के निर्देश के बाद भी बिल्डर सेबंधित खरीदार को सुविधाएं देने में आनाकानी कर रहे है जिससे आए दिन बिल्डरों के गुर्गे खरीदारों के घरों में जाकर मसल पावर दिखा रहे है।

बिल्डर लॉबी के खिलाफ उपभोक्ताओं ने रेरा और उपभोक्ता फोरम में मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। होता यह है कि है बिल्डरों के झांसे में आकर मध्यमवर्गीय परिवार मजबूरीवश अपनी जिंदगी भर की मेहनत की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित निवेश कर बिल्डरों से मकान-फ्लेट खरीदता है। बदले में बिल्डर उससे नाना प्रकार के समझौते कराने के बाद भी ठगी के सिकार हो जाते है। बिल्डरों से ठगे गए ऐसे सभी निवेशकों और उपभोक्ताओं ने एक संगठन बनाने की योजना बनाई है जिससे बिल्डरों की कारगुजारियों पर निगरानी रखा जा सकेगा। बिल्डरों द्वारा आम जनता को और उपभोक्ताओं को अनेक प्रकार की स्कीमों का झांसा देकर और प्रामि लोकेशन में अत्याधुनिक फ्लैट बताकर ठगा गया है । उपभोक्ता बिल्डरों के मसल पावर के आगे अपना पैसा बचाने के डर से बिल्डरों से समझौता कर अपना फ्लैट लेने में ही भलाई समझता हैं जबकि अधिकांश बिल्डर सिवाय मसल पावर के और गैंगस्टर के उपयोग करने के अलावा किसी काम में ध्यान नहीं है। सभी बिल्डरों ने नामी-गिरामी गैंगस्टर को हायर कर रखा है जो बिल्डरों की सिखायत करने वालों को प्रताडि़त करने का ठेका ले रखा है। अधिकांश बिल्डर की जमीन हथियाने के लिए गैंगस्टरों के मसल पावर का उपयोग करते हैं । अधिकांश मामले में आसपास के पड़ोसियों को आसपास की जमीन खरीदने के लिए हत्या करने से भी गुरेज नहीं करते है।

पूरे प्रदेश में बिल्डर लाबी ने गैंगस्टर का प्रयोग कर रायपुर को मुंबई से भी आगे निकाल दिया है आज बिल्डरों के इशारे पर गैंगस्टरों की खुलेआम तूती बोल रही है । वहीं पुलिस औपचारिकता निभाने के खेल में मूकदर्शक बनने की भूमिका निबा रहा है। अगर पुलिस सख्ती से कार्य करने की सोच भी ली छूट भैया नेताओं का आतंक पुलिस के ऊपर चालू हो जाता है पुलिस गैंगस्टर के गुंड़ों को पकड़कर छोटी-बड़ी धारा में बंद भी करती है और दूसरे दिन से गैंगस्टर के समर्थक और उसके गुर्गे और ज्यादा आतंक मचाने में मजा आता है और अपनी दादागिरी, दबंगई की बड़ी लाइन खींचने के लिए कुछ बी करने के लिए उतावले नजर आ रहे है।

सरकारी जमीन बिल्डरों के कब्जे में, नींद में प्रशासन

बिल्डरों के दुस्साहस का नजारा शासन-प्रशासन देख जुकी है। बिल्डरों ने सड़क, कोटवारी,नजूल,पीडब्ल्यूडी और सरकारी-जमीनों को भी नहीं छोड़ रहे हैं । सरकारी और सड़क किनारे व रास्ते की जमीनों को दबाकर तैयार आलिशान प्रोजेक्ट कर रहे है। राजनीतिक रसूख और अधिकारियों से सांठगांठ कर सरकारी नजूल की जमीन पर प्रोजेक्ट लांच कर रहे है। कोटवारी जमीन में कोर्ट से रोक होने के बावजूद धड़ाधड़ प्रोजेक्ट तैयार हो रहे हैं ।

बड़े बिल्डरों की नजऱ आउटर की जमीन पर

राजधानी में इन दिनों भू-माफियाओं का बड़ा खेल चल रहा है। सरकारी जमीन पर कब्जा से लेकर अवैध प्लाटिंग का कारोबार जोरों पर है। शहर के बड़े बिल्डर की नजऱ आउटर पर ज्यादा है। शहर से लगे माना, नवा रायपुर, मुजगहन, डूंडा, बोरियाखुर्द, बोरियाकला, सरोना, चंगोराभाठा, डूमरतालाब, गोगांव, गोंदवारा, बिरगांव, भनपुरी, सिलतरा, खम्हारडीह, कचना आदि इलाके की खाली जमीनों पर कब्जा कर प्लाटिंग करने के कई शिकायतें रायपुर और बिरगांव नगर निगम तक पहुंची है जिस पर कार्रवाई भी हो रही है लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती ही हो रही है। अवैध प्लाटिंग के मामले में नगरीय निकायों ने कई छोटे-बड़े बिल्डरों और सहयोगियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाए हैं। हालाकि दूसरों की जमीन पर जबरिया कब्जा कर उसे प्लाटिंग कर बेचने की कोशिश करने वाले बिल्डर, उनके पार्टनरों के राजनीतिक रसूख के चलते छोटी शिकायतों पर तो पुलिस और नगर निगम ने कार्रवाई की, लेकिन जिस जमीन पर बड़े भू-माफियाओं के नाम जुड़े निकले, उन शिकायतों को जांच के नाम पर या तो रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया या फिर पीडि़त पक्ष को कोर्ट जाने की सलाह देकर जिम्मेदारों ने अपने हाथ खींच लिए। खाली जमीनों-प्लाटों पर बिल्डरों का कब्जा रायपुर जिले में पिछले कई सालों से है। दूसरे की खाली और सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे बेचने का खेल चला आ रहा है। खासकर शहर के आउटर इलाके की खाली जमीन छोटे-बड़े बिल्डरों के निशाने पर है। प्रशासन चाहकर भी इस पर लगाम कसने में नाकाम है। सरकारी जमीन पर कब्जा सरकारी जमीन पर कब्ज़ा तो इनका सबसे आसान काम है निजी जमीनों को हथियाने में बिल्डर पीछे नहीं रहते। राजधानी रायपुर और उससे लगे आस-पास के इलाकों में सरकारी खाली जमीनों पर कब्जा कर प्लाटिंग और हाउसिंग प्रोजेक्ट डेव्हल्प किया जा रहा है। अधिकारी भी इस मामले में कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि भू माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण भी मिला हुआ है जिसके चलते वो अपना काम बनवा लेते हैं। अपनी राजनीतिक रसूख और अधिकारियों से सांठगांठ कर ये भू-माफिया करोड़ों का प्रोजेक्ट लांच कर अपनी तिजोरी भर रहे हैं। सरकारी जमीनों से लगे किसानों की कृषि जमीनों को औने-पौनेे दाम पर खरीद कर सरकारी जमीनों की पटवारियों व राजस्व अधिकारियों की मिली भगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर कई बड़े-बड़े बिल्डर अपना धंधा चमका रहे हैं। ऐसे कई मामले सामने आए जिसमें बिल्डरों ने खरीदे हुए जमीन के बीच में आने वाली सरकारी जमीनों और सडक़ व रास्ते के जमीनों को दबा कर अपने आलिशान प्रोजेक्ट तैयार किए। सरकारी जमीन के साथ कई निजी जमीनों को भी कूटरचना कर इन बिल्डरों ने लोगों के साथ धोखाधड़ी की।

लोगों की जमीन पर कब्जे की शिकायतों का ढेर

रेरा में निजी जमीनों पर बलात कब्जे की सबसे अधिक शिकायत है। निजी जमीन मालिक बिल्डरों की कारगुजारियों से हलाकान है, आम लोगों की जमीन पर कब्जे की शिकायतों पर न तो पुलिस कार्रवाई कर रहा है और न ही प्रशासन ही कारगर कदम उठा रहा है। पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए बिल्डरों ने सत्तापक्ष के नेताओं को भी साध रखा है। यही वजह है कि करोड़ों की जमीन हथियाने का खेल आउटर इलाके में चल रहा है। शहर के सबसे बड़े बिल्डर जो अपने हर प्रोजेक्ट में जंगल को किसी न किसी रूप में शामिल करता है उसने कबीरनगर हाऊसिंग बोर्ड में मकान खरीद कर पीछे रास्ता बनाया गया जो कि कानून के अंर्तगत अवैध माना जाता है। एक स्वीकृत ले आउट प्लान के अंदर दूसरा ले आउट प्लान के लिए रास्ता शासकीय जमीन से लेकर जाने का आरोप। रास्ते की जमीन को दबाकर अपना प्रोजेक्ट खड़ा किया, इसके अलावा 36 सिटी माल के पास निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में भी सरकारी जमीन दबाने के साथ कचना रोड के रास्ते की शासकीय भूमि छोटे जंगल की भूमि और बड़े झाडों का जंगल अपने प्रोजेक्ट में अवैध रूप में कब्जा लिया। जिसकी उच्च स्तरीय जांच करने की उपरांत ही सच्चाई उजागर हो सकती है। सड्डू में नाले की जमीन पर अतिक्रमण किसी से छुपी नहीं है। बड़े बड़े अधिकारी सड्डू में रहते हैं जिन्हे इनका अतिक्रमण नहीं दिखना आश्चर्यजनक है। आउटर की जमीन निशाने पर अवैध प्लाटिंग को लेकर सबसे ज्यादा खेल आउटर इलाके में किया जा रहा है। कुछ साल पहले ही गोगांव, गोंदवारा, भनपुरी, सिलतरा में 25 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन को ग्रीनलैंड में तब्दील करने का पर्दाफाश हुआ था। वहां कई लोगों ने सरकारी और घास जमीन पर अवैध प्लाटिंग और कब्जा कर लोगों को बेचने की कोशिश की थी। इन सभी जगहों की जमीन पर निगम ने बाउंड्रीवाल बनाकर उसे ग्रीनलैंड में तब्दील किया था। जिस कृषि भूमि पर बिना अनुमति के अवैध प्लाटिंग की गई है, खेती की जमीन पर अवैध प्लाटिंग होने पर पूरे क्षेत्र की जमीन को फिर से ग्रीनलैंड में बदला जाएगा। मास्टर प्लान में जो क्षेत्र कृषि या आमोद-प्रमोद का है और वहां अवैध प्लाटिंग की गई है उसे फिर से ग्रीनलैंड में तब्दील किया जाएगा। फर्जी दस्तावेज कर लेते हैं तैयार दूसरों की खाली जमीनों को जानबूझकर बिल्डर विवादों में लाते हैं। जमीन मालिक उस जमीन को खोने के डर से विवश होकर सस्ती दरों पर भी बेचने के लिए तैयार हो जाता है। ऐसे में मध्यस्थता निभाने के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि या बड़े और छुटभैय्ये नेता आगे आते हैं। उनके द्वारा इन जमीनों को अपने खास लोगों को सस्ती दरों पर दिलवा दिया जाता है। इस तरह से महंगी जमीन भी सस्ती दर पर भू-माफियाओं को मिल जाती है। ऐसी कई शिकायतें पुलिस के पास पहुंचती है, जिसमें जमीन पर जानबूझकर कब्जा करने या उसके फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला सामने आता है। पुलिस ऐसे लोगों को चिह्नित जरूर करती है, लेकिन उन पर कार्रवाई करने में सालों लगा देती है।

डूंडा इलाके में पिछले दिनों करीब दो एकड़ जमीन पर अवैध प्लाटिंग

अवैध प्लाटिंग: अफसर भू-माफिया को बचाने का खेल

डूंडा इलाके में पिछले दिनों करीब दो एकड़ जमीन पर अवैध प्लाटिंग की जा रही थी। रायपुर नगर निगम के अफसरों को इसकी जानकारी मिली तो जेसीबी भेज कर प्लॉट पर बनाई गई अवैध सड़क को काट दिया गया।मगर अब तक यही पता नहीं लगा सके कि करोड़ों की संपत्ति पर प्लाटिंग कर कौन रहा था। दरअसल लगातार अवैध प्लाटिंग की शिकायत मिलने पर निगम के अधिकारियों ने डूंडा इलाके में जेसीबी भेज कर प्लाट पर बनाई गई अवैध सड़क को काट दिया गया। मगर अब तक यही पता नहीं लगा सके कि करोड़ों की संपत्ति पर प्लाटिंग कर कौन रहा था और आखिरकार इस अवैध प्लाटिंग के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। बताया जा रहा है कि जमीन करोड़ों की है और इसके पीछे बड़े भू माफिया का हाथ हो सकता है। मामला रायपुर निगम एरिया के जोन 10, सुधीर मुखर्जी वार्ड नंबर 54 का है। लगभग दो एकड़ की जमीन पर मुरूम की सड़क बनाकर अलग-अलग टुकड़ों में प्लाट बेचने की तैयारी चल रही थी।जोन कमिश्नर दिनेश कोसरिया ने बताया कि बिना लेआउट के ही यह काम हो रहा था। इसलिए अवैध प्लाटिंग के खिलाफ कार्रवाई हुई है। अवैध प्लॉटिंग करने वालों की जानकारी तहसील के दफ्तर से मंगवाई है। नाम सामने आते ही अवैध प्लाटिंग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। दूसरी तरफ 3 दिन से ज्यादा का वक्त बीतने के बाद भी नगर निगम को अवैध प्लाटिंग करने वाले का नाम तक पता नहीं चला है।

लंबे समय से सक्रिय है भू माफिया : रायपुर के आउटर इलाके में भू माफिया लंबे समय से सक्रिय है।डूंडा इलाके में पिछले साल भी इसी तरह की अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई की गई थी।तब लगभग तीन एकड़ की जमीन पर इसी तरह अवैध प्लाटिंग चल रही थी।दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं लेकिन निगम की लचर प्रशासनिक व्यवस्था की वजह से भू माफिया धड़ल्ले से अपना धंधा चला रहे हैं।

रेत खनन का पट्टा सरेंडर, फिर भी बरबसपुर में धडल्ले से हो रहा उत्खनन

रायपुर जिले से लगे बरबसपुर गांव में धड़ल्ले से रेत का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। इसकी शिकायत करने के बाद भी खनिज विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। महासमुंद निवासी मनोज चंद्राकर ने नीलामी के जरिए तीन साल का गौण खनिज (रेत खदान) का ठेका ले रखा था, लेकिन 19 मई को उन्होंने आर्थिक परेशानियों के कारण यह ठेका विभाग को सरेंडर कर दिया था। आरोप है कि बरबसपुर पंचायत के सरपंच पति महेंद्र प्रताप सोनवानी और उनके सहयोगी दिन-रात रेत खनन धड़ल्ले करा रहे है। मनोज ने संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म सोनाखान भवन पुरैना, रायपुर के नाम लिखित शिकायत कर तत्काल बरबसपुर में हो रहे रेत खनन पर रोक लगाने के साथ ही सरपंच के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। इस संबंध में विभाग के अधिकारियों से जानकारी लेने के लिए संपर्क किया गया, पर किसी से बात नहीं हो पाई। अवैध तरीके से रेत खदान में खनन के आरोप पर ग्राम पंचायत बरबसपुर के सरपंच के पति महेंद्र प्रताप सोनवानी का कहना है कि मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे है। मनोज चंद्राकर ने खनन क्षेत्र से अधिक रेत की खुदाई की थी। इसकी शिकायत मैंने विभाग से की थी। इससे नाराज होकर उन्होंने उल्टे मेरे खिलाफ शिकायत की है।

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