छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के होनहार बच्चे: मोबाइल के टेक्नोलॉजी का किया सही दिशा में सदुपयोग
Shantanu Roy
7 Oct 2025 7:52 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। आधुनिक युग में जहां मोबाइल और डिजिटल डिवाइस बच्चों के लिए अक्सर समय की बर्बादी और लत का कारण बनते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के दो होनहार बच्चों ने इस तकनीक का उपयोग सही दिशा में कर इतिहास रच दिया है। कोलंबिया ग्लोबल स्कूल के 11वीं कक्षा के 15 वर्षीय प्रभसिमर सिंह चानना और उनके सहपाठी यशराज दासे ने संगीत की दुनिया में अपनी प्रतिभा और मोबाइल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके एक शानदार रचना पेश की है। प्रभसिमर सिंह चानना ने अपनी कम उम्र के बावजूद यह साबित किया है कि जुनून और मेहनत से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। उन्होंने बिना किसी पेशेवर स्टूडियो की मदद के ही एक गाना तैयार किया, जिसका नाम है “शिकारिन - तकदीर”। इस गाने में प्रभसिमर ने लिरिक्स राइटिंग, धुन की रचना, म्यूजिक कंपोजिंग, डायरेक्शन और गायन की पूरी जिम्मेदारी स्वयं संभाली।
संगीत की इस उत्कृष्ट रचना में प्रभसिमर के साथ उनके सहपाठी यशराज दासे ने गाने की मिक्सिंग में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों बच्चों ने मिलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर इस गाने को 30 सितंबर को अपलोड किया, जिससे संगीत प्रेमियों और युवा वर्ग में इसकी खूब सराहना हो रही है। प्रभसिमर सिंह की इस उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि का मुख्य कारण उनका समर्पण और संगीत के प्रति जुनून है। अब तक प्रभसिमर 105 गानों की रचना कर चुके हैं और वे इन्हें पूर्ण रूप से तैयार करके रिलीज़ करने की प्रक्रिया में हैं। उनका कहना है कि मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सही उपयोग बच्चों की प्रतिभा को निखारने का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है।
कोलंबिया ग्लोबल स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि प्रभसिमर और यशराज जैसी युवा प्रतिभाएं छत्तीसगढ़ और भारत के लिए गर्व का विषय हैं। उन्होंने मोबाइल और अन्य तकनीकी साधनों का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए किया है। यूट्यूब पर “शिकारिन - तकदीर” को अब तक हजारों लोग देख चुके हैं और गाने की लिरिक्स, धुन और म्यूजिक कंपोजिंग की तारीफ कर रहे हैं। प्रभसिमर और यशराज ने यह साबित कर दिया है कि अगर बच्चों में जुनून और सही दिशा का मार्गदर्शन हो तो वे कम उम्र में भी अद्भुत कार्य कर सकते हैं। प्रभसिमर का मानना है कि मोबाइल और तकनीकी साधनों का सही उपयोग बच्चों को सिर्फ समय बिताने का साधन नहीं बनाता, बल्कि उनकी प्रतिभा को उभारने, रचनात्मकता को बढ़ावा देने और भविष्य में नई पहचान बनाने का माध्यम भी बन सकता है।
यशराज दासे ने कहा कि मिक्सिंग और तकनीकी सहयोग में शामिल होकर उन्होंने यह अनुभव किया कि युवा प्रतिभाओं में सहयोग और सीखने की भूख किसी भी चुनौती को पार कर सकती है। इस उपलब्धि से यह भी संदेश जाता है कि डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन या गेमिंग तक सीमित नहीं होना चाहिए। बच्चों और युवा वर्ग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे मोबाइल और तकनीकी साधनों का उपयोग सीखने, रचनात्मक परियोजनाओं और अपनी प्रतिभा को उजागर करने में करें। छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व की बात है कि राज्य के युवा इतने कम उम्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं। प्रभसिमर और यशराज जैसे बच्चे आने वाले समय में भारत की संगीत और तकनीकी दुनिया में नई दिशा देने में सक्षम होंगे। इस तरह, प्रभसिमर सिंह चानना और यशराज दासे ने साबित कर दिया कि मोबाइल सिर्फ समय बिताने का जरिया नहीं, बल्कि सही दिशा में प्रयुक्त होने पर यह युवा प्रतिभाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बन सकता है। उनके प्रयास से यह स्पष्ट हुआ कि जुनून, मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ युवा कम उम्र में भी बड़े मुकाम हासिल कर सकते हैं।
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