छत्तीसगढ़

ब्रेकिंग! बस्तर दशहरा में बड़ा हादसा टला, फूल रथ का पहिया निकला, पुलिस और ग्रामीणों में झड़प

Shubhra Nandy
19 Oct 2026 11:04 AM IST
ब्रेकिंग! बस्तर दशहरा में बड़ा हादसा टला, फूल रथ का पहिया निकला, पुलिस और ग्रामीणों में झड़प
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JCB से पूरी हुई परिक्रमा
जगदलपुर : विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की फूल रथ परिक्रमा के दौरान रविवार, 18 अक्टूबर की रात उस समय अफरातफरी और तनाव की स्थिति बन गई, जब विशाल फूल रथ का पहिया निकल गया। बताया जा रहा है कि निर्माणाधीन विजय रथ से टकराने के बाद यह घटना हुई। पहिया निकलने के बावजूद रथ खींचने वाले ग्रामीण परंपरागत तरीके से परिक्रमा जारी रखने पर अड़े रहे। वहीं, संभावित हादसे और जनहानि के खतरे को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने जेसीबी और क्रेन की सहायता से रथ परिक्रमा पूरी कराने का निर्णय लिया। इसी बात को लेकर ग्रामीणों और पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। आखिरकार बस्तर सांसद महेश कश्यप के हस्तक्षेप के बाद विवाद शांत हुआ और रथ की सुरक्षित परिक्रमा पूरी कराई गई।
फूल रथ का पहिया निकलने से मचा हड़कंप
बस्तर की ऐतिहासिक दशहरा परंपरा के अंतर्गत रविवार की रात फूल रथ की अंतिम परिक्रमा निकाली जा रही थी। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रद्धालु और आयोजन समिति के सदस्य मौजूद थे। बताया गया कि परिक्रमा के दौरान फूल रथ निर्माणाधीन विजय रथ से टकरा गया। इसके बाद रथ का एक पहिया निकल गया, जिससे उसका संचालन बाधित हो गया। विशाल रथ का पहिया निकलने से मौके पर मौजूद लोगों के बीच चिंता बढ़ गई। रथ का आकार और वजन अधिक होने के कारण आगे उसे खींचना जोखिम भरा हो सकता था। घटना के बाद रथ को रोककर पहिया दोबारा लगाने की कोशिश की गई। पुलिस और आयोजन से जुड़े लोगों ने स्थिति का जायजा लिया।
ग्रामीण फिर से रस्सियों के सहारे रथ खींचने पर अड़े
रथ का पहिया दोबारा लगाए जाने के बाद ग्रामीण पारंपरिक तरीके से परिक्रमा जारी रखना चाहते थे। मिताली चौक के पास ग्रामीणों ने रथ को रस्सियों से खींचने की बात कही। हालांकि, पुलिस अधिकारियों को आशंका थी कि पहिया निकलने के बाद रथ को सामान्य तरीके से खींचने पर दोबारा दुर्घटना हो सकती है। पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर जेसीबी और क्रेन की मदद लेने की बात कही। इस प्रस्ताव को लेकर ग्रामीणों और पुलिस अधिकारियों के बीच असहमति पैदा हो गई। ग्रामीण अपनी परंपरा के अनुसार रथ खींचना चाहते थे, जबकि पुलिस लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही थी।
पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प
रथ संचालन के तरीके को लेकर शुरू हुई बहस धीरे-धीरे विवाद में बदल गई।
मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। दशहरा समिति के पदाधिकारियों ने भी स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान कुछ ग्रामीण आक्रोशित हो गए और एक पुलिस अधिकारी के साथ हाथापाई की स्थिति बन गई। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों को रथ से सुरक्षित दूरी पर रखने का प्रयास किया। इस घटनाक्रम से कुछ समय तक रथ परिक्रमा बाधित रही।
बस्तर सांसद महेश कश्यप ने संभाला मोर्चा
मौके पर तनाव बढ़ने के बाद बस्तर सांसद और दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने ग्रामीणों और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत कराई तथा रथ परिक्रमा को सुरक्षित ढंग से पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। समझाइश के बाद ग्रामीण जेसीबी और क्रेन की सहायता से रथ परिक्रमा पूरी कराने पर सहमत हुए। इसके बाद मशीनों की मदद से रथ को आगे बढ़ाया गया और शेष परिक्रमा पूरी कराई गई। 18 अक्टूबर की रात फूल रथ की परिक्रमा संपन्न होने की पुष्टि अलग से प्रकाशित विवरण में भी हुई है।
CSP सुमित कुमार ने बताया क्यों जरूरी थी JCB
घटना के संबंध में सीएसपी सुमित कुमार ने बताया कि फूल रथ परिक्रमा के दौरान रथ का पहिया क्षतिग्रस्त होकर निकल गया था। इसके बाद जेसीबी की मदद से पहिया दोबारा लगाया गया। हालांकि, रथ को आगे खींचने में जोखिम बना हुआ था। सीएसपी के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से रथ को मशीनों की मदद से खींचने की आवश्यकता थी, लेकिन ग्रामीण परंपरागत ढंग से परिक्रमा जारी रखना चाहते थे। इसी बात को लेकर विवाद की स्थिति बनी। सांसद महेश कश्यप के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीण पुलिस की बात से सहमत हुए और परिक्रमा पूरी की गई।
दो दिन पहले भी रथ से टकराया था बिजली का खंभा
बस्तर दशहरा की रथ परिक्रमा के दौरान इससे पहले भी दुर्घटना हो चुकी थी। रिपोर्ट के अनुसार, 16 अक्टूबर की रात रथ निर्धारित मार्ग से हटकर पावर हाउस चौक की ओर बढ़ गया था। यामाहा शोरूम के पास रथ के कारण दो स्कूटी क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई थी। इसी दौरान रथ बिजली के खंभे से टकरा गया। खंभा गिरने से आसपास मौजूद कई लोग घायल हो गए थे। शुरुआती रिपोर्टों में आधा दर्जन से अधिक लोगों को चोट लगने की जानकारी दी गई थी। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने हस्तक्षेप कर रथ परिक्रमा को नियंत्रित किया था।
लगातार घटनाओं से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
कुछ ही दिनों के अंतराल में रथ परिक्रमा के दौरान दो घटनाएं सामने आने से सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बस्तर दशहरा में विशाल लकड़ी के रथ को ग्रामीणों द्वारा रस्सियों के सहारे खींचने की सदियों पुरानी परंपरा है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग रथ के आसपास मौजूद रहते हैं। ऐसे में रथ की तकनीकी स्थिति, मार्ग की चौड़ाई और भीड़ नियंत्रण का विशेष महत्व होता है। विशाल रथ के संचालन में किसी तरह की तकनीकी समस्या आने पर सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन समिति के बीच समन्वय जरूरी है। रविवार की घटना में प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए मशीनों की सहायता लेने का निर्णय किया।
600 साल पुरानी परंपरा है बस्तर दशहरा
बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में से एक है। यह पर्व करीब 600 वर्षों से मनाया जा रहा है और लगभग 75 दिनों तक चलने वाले आयोजन के लिए प्रसिद्ध है। देश के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले दशहरे से अलग, बस्तर दशहरा का मुख्य केंद्र मां दंतेश्वरी की आराधना और स्थानीय देवी-देवताओं से जुड़ी परंपराएं हैं। इस उत्सव में विशाल रथ की परिक्रमा विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। ग्रामीण बड़ी संख्या में भाग लेकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार रथ खींचते हैं।
21 और 22 अक्टूबर को निकलेगा आठ पहियों वाला विजय रथ
फूल रथ परिक्रमा संपन्न होने के बाद बस्तर दशहरा के आगामी महत्वपूर्ण अनुष्ठानों की तैयारी जारी है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 21 और 22 अक्टूबर को आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ की परिक्रमा होनी है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में पिछले दिनों सामने आई घटनाओं के मद्देनजर रथ की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
सांसद की समझाइश के बाद शांत हुआ विवाद
रविवार रात रथ का पहिया निकलने से शुरू हुई परेशानी पुलिस और ग्रामीणों के बीच विवाद तक पहुंच गई थी। हालांकि, सांसद महेश कश्यप और दशहरा समिति के पदाधिकारियों की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद जेसीबी और क्रेन की मदद से फूल रथ की परिक्रमा पूरी की गई। इस घटना में किसी नई जनहानि की पुष्टि सामने नहीं आई है। वहीं, आगामी रथ परिक्रमा को देखते हुए सुरक्षा और परंपरा के बीच उचित समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
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