छत्तीसगढ़

अवैध कटाई को लेकर दो गांवों में खूनी संघर्ष, थाने का घेराव कर ग्रामीणों का हंगामा

Shantanu Roy
29 Aug 2025 12:36 AM IST
अवैध कटाई को लेकर दो गांवों में खूनी संघर्ष, थाने का घेराव कर ग्रामीणों का हंगामा
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Kondagaon. कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में रविवार को जंगल की अवैध कटाई को लेकर दो गांवों के बीच जमकर बवाल हो गया। ग्राम शामपुर और फुका गिरोला के ग्रामीणों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। इस संघर्ष में दर्जनों लोग घायल हो गए जिन्हें जिला अस्पताल कोंडागांव में भर्ती कराया गया है। इस घटना के बाद शामपुर और आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों में गुस्सा फूट पड़ा। सोमवार शाम ग्रामीण बड़ी संख्या में कोंडागांव थाने पहुंचे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए थाने का घेराव कर दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक अवैध कटाई पर रोक नहीं लगती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
जंगल बचाने की बात पर हुआ हमला
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वे केवल जंगल बचाने की बात कर रहे थे और अवैध कटाई का विरोध कर रहे थे। इसके बावजूद उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और मारपीट की गई। ग्रामीणों ने कहा कि जंगल उनकी जीवन रेखा हैं और वे इसके अंधाधुंध कटान को बर्दाश्त नहीं करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इस विवाद की जड़ गांवों के बीच सीमा विवाद और जंगल की जमीन पर कब्जे से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से दोनों गांवों के बीच तनाव बना हुआ था, लेकिन रविवार को यह हिंसक टकराव में बदल गया।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। एडिशनल एसपी कौशलेन्द्र पटेल ने बताया कि पुलिस हालात को काबू करने की कोशिश कर रही है और दोनों पक्षों को समझाइश दी जा रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
ग्रामीणों का अल्टीमेटम
थाने का घेराव करने पहुंचे ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर प्रशासन और पुलिस ने अवैध कटाई रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और उग्र होगा। ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों की सुरक्षा उनके अस्तित्व से जुड़ी है और इस पर समझौता नहीं किया जा सकता। इस पूरे मामले ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ में जंगलों की अवैध कटाई और उससे जुड़े विवादों को उजागर कर दिया है। जहां एक तरफ ग्रामीण अपने हक और पर्यावरण की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अवैध कटाई करने वाले गिरोह खुलेआम सक्रिय हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और किस तरह से दोनों पक्षों के बीच तनाव को कम करता है।
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