छत्तीसगढ़
VB-GRAM G विधेयक पारित होने पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का बड़ा बयान
Shantanu Roy
18 Dec 2025 8:06 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा से पारित “विकसित भारत– रोजगार और आजीविका की गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAM G)” विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने देशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह विधेयक ग्रामीण भारत में समृद्धि, आत्मनिर्भरता और रोजगार की नई गारंटी लेकर आया है। बृजमोहन अग्रवाल ने अपने बयान में कहा कि यह कानून ग्रामीण श्रमिकों के लिए एक नई शुरुआत है, क्योंकि इसके माध्यम से श्रम का सीधा पारिश्रमिक श्रमिकों के बैंक खातों में पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि इससे गांवों में न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि लोगों को सम्मान के साथ जीवनयापन का अवसर भी मिलेगा।
कांग्रेस के पुराने फैसलों पर तीखा हमला
सांसद अग्रवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 1977 में महाराष्ट्र में कांग्रेस सरकार के समय गरीबों को उनके श्रम के बदले नकद भुगतान नहीं किया गया, बल्कि अनाज का झोला थमा दिया गया। उन्होंने कहा कि उस दौर में यह मान लिया गया था कि गरीबों को केवल अनाज चाहिए, जबकि उनकी असली जरूरत नकद राशि थी, जिससे वे दवा, कपड़े और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा सकें। उन्होंने याद दिलाया कि इसी नीति का विरोध करते हुए प्रख्यात अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कांग्रेस को कड़ी फटकार लगाई थी। अमर्त्य सेन ने सवाल उठाया था कि यदि किसी गरीब को दवा खरीदनी हो, तो क्या वह अनाज देकर दवा ले सकता है?
योजना आयोग की फटकार का जिक्र
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 1980 में भारत के योजना आयोग ने भी कांग्रेस सरकार की इस नीति को अव्यवहारिक बताते हुए आलोचना की थी। आयोग ने स्पष्ट कहा था कि यदि सरकार 1 रुपये का अनाज श्रमिक को देने के लिए 3 रुपये खर्च कर रही है, तो यह एक असफल और अपव्ययी व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह हुआ कि यदि 100 करोड़ रुपये का अनाज बांटा गया, तो सरकार को 300 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। यह गरीबों के हित में नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों की बर्बादी थी।
2004 में फिर दोहराई गई गलती
सांसद अग्रवाल ने आरोप लगाया कि दुर्भाग्यवश वर्ष 2004 में कांग्रेस सरकार ने फिर से “राष्ट्रीय खाद्य कार्य कार्यक्रम” के तहत काम के बदले अनाज देने की योजना शुरू की। इस योजना में केंद्र सरकार अनाज देती थी, लेकिन परिवहन लागत, हैंडलिंग शुल्क और टैक्स की जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी गई। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान करीब 2200 करोड़ रुपये का अनाज गोदामों में खराब हो गया या चूहों द्वारा नष्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह गरीबों के साथ सबसे बड़ा अन्याय था, क्योंकि एक ओर लोग भूख से जूझ रहे थे और दूसरी ओर सरकारी गोदामों में अनाज सड़ रहा था।
गरीबों की मजबूरी का हवाला
बृजमोहन अग्रवाल ने 2005 की एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कई इलाकों में लोग अनाज न मिलने पर ‘चकोरा’ और महुआ खाकर जीवन यापन कर रहे थे। यह स्थिति कांग्रेस की नीतियों की विफलता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारें यह मानकर चलती रहीं कि गरीबों को सिर्फ अनाज चाहिए, जबकि उन्हें नकद राशि की सख्त जरूरत थी, ताकि वे अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।
VB-GRAM G को बताया गेम-चेंजर
सांसद अग्रवाल ने कहा कि VB-GRAM G विधेयक इस सोच को पूरी तरह बदल देता है। अब श्रमिकों को उनके श्रम का सीधा पैसा बैंक खाते में मिलेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” के विजन को जमीन पर उतारने वाला कदम है।
विपक्ष पर हमला
उन्होंने आरोप लगाया कि आज वही विपक्ष इस विधेयक का विरोध कर रहा है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि गांवों में समृद्धि आए और श्रमिकों को उनका हक सीधे मिले। उन्होंने कहा कि यह विरोध ग्रामीण भारत के विकास के खिलाफ है। सांसद अग्रवाल ने कहा कि लोकसभा में इस विधेयक का पारित होना ऐतिहासिक क्षण है। यह कानून आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा और करोड़ों परिवारों को आत्मनिर्भर बनाएगा।
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