छत्तीसगढ़

बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, MISA सम्मान निधि मामले में अपील खारिज

Shantanu Roy
19 March 2026 8:39 PM IST
बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, MISA सम्मान निधि मामले में अपील खारिज
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आपातकाल के दौरान मीसा (MISA) के तहत जेल जाना ही किसी व्यक्ति को योजना का पात्र नहीं बनाता, बल्कि यह भी साबित करना जरूरी है कि हिरासत केवल राजनीतिक या सामाजिक कारणों से हुई हो।

राज्य सरकार ने पहले ही खारिज किया था आवेदन
मामले में रायपुर निवासी 74 वर्षीय रामगुलाम सिंह ठाकुर ने दावा किया था कि वे वर्ष 1975 के आपातकाल के दौरान एक छात्र नेता के रूप में आंदोलन में शामिल थे और इसी कारण उन्हें जेल में रखा गया था। उन्होंने वर्ष 2008 के नियमों के तहत लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता की मांग की थी। हालांकि, राज्य सरकार ने उनके आवेदन को पहले ही निरस्त कर दिया था। सरकार का कहना था कि आवेदक योजना की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करता है।

पात्रता को लेकर हाईकोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ वर्ष 1974 से 1986 के बीच कई आपराधिक मामले दर्ज थे। इसी आधार पर उन्हें योजना के लिए अयोग्य माना गया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि योजना के तहत वही व्यक्ति पात्र होगा जिसकी हिरासत सिर्फ राजनीतिक या सामाजिक कारणों से हुई हो और जिसके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता ने संबंधित समिति के मूल फैसले को चुनौती नहीं दी, जिससे उनका पक्ष और कमजोर हो गया।

सिंगल बेंच का फैसला बरकरार
अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद यह पाया कि इसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या पक्षपात नहीं हुआ है। इसलिए सिंगल बेंच द्वारा पहले दिए गए निर्णय को सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया गया। इस फैसले के साथ हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सम्मान निधि जैसी योजनाओं में पात्रता के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा और केवल आपातकाल में जेल जाने का दावा पर्याप्त नहीं होगा।

निर्णय का व्यापक प्रभाव
इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे। अदालत ने यह संदेश दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए सटीक पात्रता और प्रमाण आवश्यक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अन्य लंबित मामलों पर भी प्रभाव पड़ेगा और आवेदकों को अपने दावों को मजबूत साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करना होगा।
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