छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के 9794 स्वच्छता कर्मियों को बड़ी राहत! एक साल के मानदेय के लिए 94.02 करोड़ मंजूर

Shubhra Nandy
23 Oct 2026 10:38 AM IST
छत्तीसगढ़ के 9794 स्वच्छता कर्मियों को बड़ी राहत! एक साल के मानदेय के लिए 94.02 करोड़ मंजूर
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हर महीने मिलेंगे 8 हजार रुपये
रायपुर : छत्तीसगढ़ में शहरों को साफ-सुथरा रखने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले हजारों स्वच्छता कर्मियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने प्रदेश के 194 नगरीय निकायों में मिशन क्लीन सिटी के अंतर्गत कार्यरत 9,794 स्वच्छता कर्मियों के एक साल के मानदेय के लिए 94 करोड़ 2 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। इस राशि से प्रत्येक पात्र स्वच्छता कर्मी को हर महीने 8 हजार रुपये की दर से मानदेय देने की व्यवस्था की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह स्वीकृति 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2027 तक पूरे एक वर्ष के लिए दी गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने चुंगी क्षतिपूर्ति मद से राशि के भुगतान की स्वीकृति दी है। इस निर्णय का उद्देश्य नगरीय निकायों में काम करने वाले स्वच्छता कर्मियों के मानदेय के लिए वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करना और शहरों में स्वच्छता संबंधी कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखना है।
9794 स्वच्छता कर्मियों के लिए एक साल का मानदेय सुनिश्चित
प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में मिशन क्लीन सिटी के तहत हजारों स्वच्छता कर्मी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी शहरों की सफाई, घर-घर से कचरा एकत्रित करने, कचरे के पृथक्करण और स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार ने इन कर्मचारियों के मानदेय की व्यवस्था के लिए कुल 94.02 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। प्रति कर्मचारी 8 हजार रुपये मासिक मानदेय के हिसाब से एक वर्ष में 96 हजार रुपये का प्रावधान बनता है। इस तरह हजारों स्वच्छता कर्मियों के मानदेय के लिए सालभर की वित्तीय व्यवस्था तैयार की गई है।
194 नगरीय निकायों को मिलेगा राशि का लाभ
इस स्वीकृति का लाभ प्रदेश के 194 नगरीय निकायों में मिशन क्लीन सिटी के अंतर्गत कार्यरत स्वच्छता कर्मियों के मानदेय भुगतान की व्यवस्था को मिलेगा। नगरीय निकायों में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमित रूप से कर्मचारियों की सेवाएं ली जाती हैं। इनमें घर-घर कचरा संग्रहण करने वाले कर्मचारी, स्व-सहायता समूहों से जुड़ी स्वच्छता दीदियां तथा मिशन से संबंधित अन्य स्वच्छता कार्यों में लगे कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा पूरे वर्ष के मानदेय की राशि मंजूर किए जाने से संबंधित निकायों को भुगतान संबंधी कार्यवाही आगे बढ़ाने में सुविधा होगी। हालांकि, अलग-अलग निकायों में कर्मचारियों की संख्या और राशि का आवंटन संबंधित विभागीय आदेश के अनुसार ही निर्धारित होगा।
1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2027
गणना के अनुसार 9,794 कर्मचारियों को 12 महीने तक 8 हजार रुपये देने के लिए कुल 94 करोड़ 2 लाख 24 हजार रुपये बनते हैं। इसलिए 94.02 करोड़ रुपये की घोषित राशि इस गणना का लगभग बराबर, गोल किया हुआ आंकड़ा है।
निकायों के स्तर पर आगे बढ़ेगी भुगतान प्रक्रिया
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से राशि स्वीकृत किए जाने के बाद संबंधित नगरीय निकायों के स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। निकायों को पात्र कर्मचारियों और मानदेय से संबंधित आवश्यक जानकारी के आधार पर भुगतान की कार्रवाई करनी होगी। पूरे वर्ष के लिए राशि की स्वीकृति से मानदेय भुगतान की वित्तीय योजना बनाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, राशि स्वीकृत होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी कर्मचारियों के खातों में तत्काल पूरे वर्ष का पैसा जमा कर दिया गया है। वास्तविक भुगतान संबंधित प्रक्रियाओं और विभागीय निर्देशों के अनुसार होगा।
शहरों को साफ रखने में बड़ी भूमिका
छत्तीसगढ़ में मिशन क्लीन सिटी के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी स्वच्छता संबंधी कार्य कराए जाते हैं। इन कार्यों में घर-घर से गीला और सूखा कचरा एकत्रित करना, कचरे का पृथक्करण, स्वच्छता केंद्रों का संचालन और स्थानीय स्तर पर सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाना शामिल है। इस व्यवस्था से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर काम करने और आय अर्जित करने का अवसर भी मिला है। राज्य में मिशन क्लीन सिटी के अंतर्गत स्वच्छता दीदियों और स्वच्छता कमांडो की भागीदारी पहले से रही है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा पिछले वर्षों में भी इनके मानदेय के लिए राशि जारी की जाती रही है। राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 में भी मिशन क्लीन सिटी के अंतर्गत कार्यरत 9,750 स्वच्छता दीदियों के लिए 93.60 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। यह राशि 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक के मानदेय के लिए निर्धारित की गई थी। अब उपलब्ध नवीन विवरण के अनुसार, 2026-27 की अवधि के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 9,794 बताई गई है। यानी पिछली स्वीकृति के मुकाबले 44 अतिरिक्त कर्मियों को गणना में शामिल किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि मिशन के अंतर्गत मानदेय की वार्षिक वित्तीय व्यवस्था को आगे जारी रखा जा रहा है।
स्वच्छता व्यवस्था को मिलेगा सहारा
राज्य के नगरीय क्षेत्रों में नियमित सफाई, कचरा संग्रहण और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे कार्यों को जारी रखने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। स्वच्छता कर्मियों के मानदेय के लिए राशि उपलब्ध कराए जाने से निकायों को इन सेवाओं के संचालन में सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही समय पर भुगतान, सुरक्षित कार्य परिस्थितियां और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण हैं। हाल में रायपुर के स्वच्छता कर्मियों से संबंधित एक मानवाधिकार आयोग समर्थित सर्वेक्षण में पहचान दस्तावेज, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच से जुड़ी कमियां सामने आई थीं। ऐसे में मानदेय की उपलब्धता के साथ कर्मचारियों की अन्य सुविधाओं पर ध्यान देना भी जरूरी है।
अब समय पर भुगतान पर रहेगी नजर
राज्य सरकार की इस स्वीकृति से प्रदेश के हजारों स्वच्छता कर्मियों को मानदेय मिलने की वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध होगी। अब संबंधित नगरीय निकायों की जिम्मेदारी होगी कि वे निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कर्मचारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करें। स्वच्छता कर्मियों की भूमिका सिर्फ शहरों को साफ रखने तक सीमित नहीं है। वे सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छ वातावरण और कचरा प्रबंधन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए समय पर मानदेय मिलना उनके आर्थिक जीवन के साथ नगरीय स्वच्छता व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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