भूपेश सरकार का सिस्टम अभी भी पर्यावरण मंडल में बना है मास्टर कार्ड

कारोबारियों का दिवाला निकाल कर पर्यावरण मंडल वाले कर रहे दिवाली मनाने की जुगाड़
राइस मिल वालों से प्रतिवर्ष 1 लाख, नर्सिंग होम, रेडियोलाजिस्ट लैबोरेटरी वालों से प्रति वर्ष 20 हजार साथ ही छोटे-बड़े उद्योगों से अनिवार्य एनओसी के नाम पर कर रहे प्रतिवर्ष करोड़ों की वसूली
छोटी डिस्पेंसरियों और नर्सिंगहोम से पर्यावरण सर्टिफिक़ेट और एनओसी अनिवार्य के नाम पर हर साल 20 हजार का नजराना फिक्स
पर्यावरण मंडल बड़े हास्पिटल और नर्सिंग होम, मेडिकल वेस्ट के द्वारा पर्यावरण बिगाडऩे के एवज में पर्यावरण विभाग 15 लाख रुपए सालाना नजराना लेने की चर्चा जबकि बड़े अस्पतालों और नर्सिंग होम को मेडिकल वेस्ट (कचरा) सुरक्षित तरीके से डिस्पोजल करने का कानून है जिसकी धज्जियां उड़ रही
रायपुर (जसेरि)। पर्यावरण विभाग में दिवाली के लिए चाँदी सोना खऱीदने की प्लानिंग लगातार पर्यावरण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारी मैनेज कर रहे हैं और पूरे प्रदेश में उद्योगों से लेकर राइस मिल से नर्सिंग होम, रेडियोलाजिस्ट लैबोरेटरी और छोटे मोटे औषधालय और दवाखाना से भी बड़ी वसूली की तैयारी है भूपेश सरकार का सिस्टम अभी भी कर्मचारी और अधिकारी मनमाने ढंग से उपयोग कर रहे है।
ग़ौरतलब है कि पर्यावरण संरक्षण मंडल में पूरा सिस्टम पूर्व भूपेश सरकार के वरदहस्त प्राप्त अधिकारियों के अधीन है मतलब जो सिस्टम भूपेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण मंडल को दे रखा था वसूली का उसी को बरकरार रखा गया है उसी के आधार पर ये कर्मचारी और अधिकारी मनमाने ढंग से छोटे मोटे डॉक्टर की औषधालय और दवाखाना, नर्सिंग होम,राइस मील, लैबोरेटरी, रेडियोलाडिस्ट के लिए पर्यावरण क़ानून बनाकर मनमाना वसूली कर रहे हैं।
एक डॉक्टर ने अपना नाम नहीं छापने की शर्तों में बताया कि छोटी सी डिस्पेंसरी में पर्यावरण संरक्षण मंडल का सर्टिफिक़ेट अनिवार्य बोलकर पर्यावरण इंस्पेक्टर लगातार विज़िट का 20, हज़ार रुपया प्रति वर्ष वसूली करता है। उसके उपरांत लाइसेंस जारी कर दी हृह्रष्ट देने का 20,000 लेता था। इसी तरह पेट्रोल पंप के मालिकों से राइस मिल के मालिकों से उद्योग जगत के बड़े से बड़े उद्योपतियों से भी कुछ न कुछ तकनीकी खऱाबी और गड़बड़ी बताकर पर्यावरण संरक्षण मंडल लगातार अपना हफ़्ता और महीना वसूल रहा है। छत्तीसगढ़ के अधिकांश उद्योगपति बाहर के होने के कारण छत्तीसगढ़ के पर्यावरण की चिंता बिलकुल नहीं करते। जिसकी वजह से हमारे छत्तीसगढ़ की जनता का स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन खऱाब हो रहा।
जलवायु पूरी तरह से नष्ट हो रही है इसकी चिंता ना किसी भी राजनीतिक दल को है और न ही क्रांति सेना को, कुछ क़दम उठाने के बाद उद्योगों की तरफ़ लगभग देखना बंद कर दिया है। किसी भी राजनीतिक दल जब उद्योगों से बड़ा चंदा लेने को सोचना होता है तभी वह उद्योग के सामने जाकर धरना प्रदर्शन करते हैं यही परिपाटी छत्तीसगढ़ में बरसों से राजनीतिक पार्टियों में चली आ रही है। इसी का फ़ायदा उठाते हुए बाहरी उद्योगपति छत्तीसगढ़ के पर्यावरण को नुक़सान पहुँचा रहे और छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को इस वक़्त हर जगह पर कोई पूछने वाला नहीं है। हालाँकि राज्य में भाजपा की सरकार आने के उपरांत धीरे धीरे भूपेश सरकार सिस्टम को हटाने में कुछ हद तक क़ामयाब ही दिख रही है। लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी पर्यावरण संरक्षण मंडल जीता जागता नमूना पेश करने में वहाँ के कर्मचारियों अधिकारियों ने कोई कसर बाक़ी नहीं रखा। बड़े बड़े उद्योगपति छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार की सुलभ और अच्छी नीतियों के कारण उद्योग लगाने के लिए अग्रसर हो रहे हैं। पूरे देश से बड़े उद्योग घराने छत्तीसगढ़ में उद्योग लगाने के लिए आतुर है। ऐसे में यह भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी पर्यावरण मंडल को और सरकार को बदनाम करने में कोई कसर बाक़ी नहीं रख रहे है। भाजपा सरकार और प्रदेश के मुखिया सीएम साय प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए पूरे देश दुनिया में दौरा कर उद्योगपति को बड़ी मेहनत से छत्तीसगढ़ लाने में सफल हुए हैं। विभागीय मंत्री भी लगातार पर्यावरण संरक्षण और उद्योगों के लिए अच्छा वातावरण बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे लेकिन पर्यावरण के अधिकारियों के भ्रष्ट आचरण के कारण विभागीय मंत्री के मेहनत में पानी फिर रहा है।
रेडियोलॉजी से किसी प्रकार का रेडिएशन होता है क्या
रेडियोलॉजी की कुछ प्रक्रियाओं में रेडिएशन का उपयोग होता है, लेकिन सभी में नहीं। रेडियोलॉजी वह चिकित्सा शाखा है जो शरीर के अंदर की तस्वीरें लेने के लिए विभिन्न इमेजिंग तकनीकों का उपयोग करती है।
रेडियोलॉजी में दो प्रकार के रेडिएशन का उपयोग होता है-
आयनीकरण रेडिएशन
इस प्रकार के रेडिएशन में परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए पर्याप्त ऊर्जा होती है, जो डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती है। इसका उपयोग उन प्रक्रियाओं में किया जाता है, जहाँ हड्डी, अंगों और नरम ऊतकों की विस्तृत छवियों की आवश्यकता होती है।
एक्स-रे: इसमें एक्स-रे किरणों का उपयोग होता है, जो आयनीकरण रेडिएशन का ही एक रूप हैं।
सीटी स्कैन: यह एक्स-रे का उपयोग करके शरीर के अंदर की 2डी और 3डी तस्वीरें बनाता है।
फ्लोरोस्कोपी: यह एक चलती हुई एक्स-रे छवि होती है, जो पाचन तंत्र जैसे अंगों के कार्य को देखने में मदद करती है।
परमाणु चिकित्सा (न्यूक्लियर मेडिसिन): इसमें रेडियोधर्मी सामग्री को शरीर में डाला जाता है, जो गामा किरणों को उत्सर्जित करती है।
गैर-आयनीकरण रेडिएशन
यह आयनीकरण रेडिएशन से कम ऊर्जावान होता है और कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाता है।
एमआरआई : यह एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का उपयोग करता है, जिसमें कोई हानिकारक रेडिएशन शामिल नहीं होता है।
अल्ट्रासाउंड: यह शरीर के अंदर की तस्वीरें बनाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है।
सुरक्षा उपाय : रेडिएशन के जोखिम को कम करने के लिए, चिकित्सा पेशेवर सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करते हैं। जोखिम को हमेशा कम से कम रखने का लक्ष्य होता है, खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए। आमतौर पर, रेडिएशन से होने वाले लाभ, जोखिम से कहीं अधिक होते हैं।





