छत्तीसगढ़
भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका
Shantanu Roy
30 Oct 2025 10:25 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को कानून के विरुद्ध और असंवैधानिक बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, ईडी ने चैतन्य बघेल को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला राज्य में कथित शराब वितरण प्रणाली में अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है ईडी का दावा है कि इस घोटाले में करोड़ों रुपए की अवैध लेनदेन हुई है, जिसमें कई कारोबारी, अधिकारी और राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं।
चैतन्य बघेल फिलहाल रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक रिमांड पर बंद हैं। इससे पहले उन्होंने रायपुर की विशेष अदालत और बिलासपुर हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे अदालतों ने खारिज कर दिया था। अब उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में उन्होंने कहा है कि ईडी ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया और बिना पर्याप्त सबूत के उन्हें गिरफ्तार किया गया। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि PMLA के कई प्रावधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, इसलिए इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत अवैध घोषित किया जाना चाहिए। कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई के दौरान कोई महत्वपूर्ण टिप्पणी करता है।
यह न सिर्फ चैतन्य बघेल के केस, बल्कि देशभर में ईडी की कार्यप्रणाली को लेकर भी बड़ा असर डाल सकता है। इस बीच, कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है। पार्टी के प्रवक्ता का कहना है कि ईडी को सिर्फ विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि “कानून अपना काम कर रहा है” और यदि किसी ने भ्रष्टाचार किया है, तो उसे जवाब देना ही होगा। ईडी की ओर से बताया गया है कि चैतन्य बघेल से पूछताछ के दौरान आर्थिक लेनदेन से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले हैं, जिन्हें जांच में शामिल किया गया है। एजेंसी के अनुसार, आगे की पूछताछ में और कई नाम सामने आने की संभावना है। अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की लिस्टिंग के बाद नियत तारीख पर सुनवाई होगी। इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था — दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।
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