छत्तीसगढ़

धीरेंद्र शास्त्री पर भूपेश बघेल का तीखा हमला, बोले- केमिकल लोचा है, रेबीज की जांच हो

Shubhra Nandy
3 Nov 2026 10:54 AM IST
धीरेंद्र शास्त्री पर भूपेश बघेल का तीखा हमला, बोले- केमिकल लोचा है, रेबीज की जांच हो
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राम-कृष्ण बयान पर विवाद
रायपुर : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर और कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करने वाले बयान पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शास्त्री पर तीखा हमला बोला है। बघेल ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए उनके बयान पर सवाल उठाए और तंज कसा कि उनकी रेबीज की जांच कराई जानी चाहिए। दूसरी ओर, मथुरा के साधु-संतों की नाराजगी के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि भगवान राम और कृष्ण में कोई अंतर नहीं है और यदि उनकी बात से किसी की भावना आहत हुई है तो वे माफी मांगते हैं।
भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि कोई तो केमिकल लोचा है और उनकी रेबीज की जांच कराना ठीक होगा। बघेल ने आगे आरोप लगाया कि हिंदू एकता की बात करने वाले कथावाचक अब हिंदुओं के आराध्य देवी-देवताओं का उपहास कर रहे हैं। उन्होंने उन लोगों पर भी सवाल उठाए जो धार्मिक भावनाओं के आहत होने के मुद्दे पर मुखर रहते हैं।उनकी इस टिप्पणी के बाद मामला धार्मिक विवाद के साथ राजनीतिक बयानबाजी का विषय भी बन गया है। पूर्व मुख्यमंत्री के बयान की खबरें विभिन्न मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित की हैं।

शिवपुरी की श्रीराम कथा से शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा से जुड़ा है। 29 अक्टूबर को कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना की थी। उन्होंने भगवान राम की सीधी मुद्रा और भगवान कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा का उल्लेख करते हुए टिप्पणी की थी। इस दौरान अयोध्या और वृंदावन को लेकर भी उन्होंने बातें कहीं। शास्त्री की टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनुचित बताया। विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र के संतों ने इस पर आपत्ति जताई।
मथुरा के साधु-संतों ने जताई नाराजगी
धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर मथुरा और वृंदावन के साधु-संतों ने प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि कथावाचकों को धार्मिक विषयों पर बोलते समय शब्दों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि यदि भगवान श्रीकृष्ण के संबंध में टिप्पणी हास्य या भक्तिभाव में की गई है तो उसका संदर्भ अलग हो सकता है, लेकिन व्यंग्य के उद्देश्य से ऐसी टिप्पणी की गई हो तो माफी मांगी जानी चाहिए। संत समाज की प्रतिक्रियाओं के बाद विवाद और बढ़ गया। सोशल मीडिया पर भी शास्त्री के बयान को लेकर अलग-अलग राय सामने आई।
विवाद बढ़ा तो धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया है और उनका भगवान श्रीराम तथा भगवान श्रीकृष्ण में भेद करने का कोई उद्देश्य नहीं था। शास्त्री ने स्पष्ट किया कि वे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और ब्रजभूमि के भक्त हैं। वे श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करते हैं और भगवान कृष्ण की महिमा का वर्णन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम और कृष्ण एक ही परमात्मा के स्वरूप हैं। दोनों में किसी प्रकार का अंतर बताना उनका उद्देश्य नहीं था। शास्त्री ने यह भी कहा कि यदि उनकी अभिव्यक्ति से किसी व्यक्ति या भक्त की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है, तो वे उसके लिए क्षमा मांगते हैं। उन्होंने लोगों से अपनी टिप्पणी को उसके पूरे संदर्भ में समझने की अपील की।
पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं भूपेश बघेल और धीरेंद्र शास्त्री
भूपेश बघेल और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बीच यह पहला सार्वजनिक वैचारिक विवाद नहीं है। इससे पहले वर्ष 2025 में भी दोनों के बीच धर्म और अंधविश्वास को लेकर बयानबाजी हुई थी। भूपेश बघेल ने शास्त्री पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज को संगठित करने के अपने प्रयासों का बचाव किया था। तब भूपेश बघेल ने अपनी धार्मिक आस्था का उल्लेख करते हुए कहा था कि वे लंबे समय से हनुमान चालीसा का पाठ करते आ रहे हैं। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए थे। पूर्व में हुई इस बयानबाजी के कारण राम-कृष्ण विवाद पर भूपेश बघेल की ताजा प्रतिक्रिया को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
माफी के बाद भी जारी है बयानबाजी
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के स्पष्टीकरण और माफी के बाद भी विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। धार्मिक संगठनों, संतों और राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। यह मामला धार्मिक कथाओं में प्रयुक्त भाषा और अभिव्यक्ति को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है। एक पक्ष का मानना है कि भक्तिभाव में कही गई बातों को पूरे संदर्भ में समझना चाहिए। वहीं दूसरा पक्ष धार्मिक आराध्यों के संबंध में अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है। फिलहाल धीरेंद्र शास्त्री अपना पक्ष स्पष्ट कर चुके हैं, जबकि भूपेश बघेल सहित अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाओं के कारण यह विवाद धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में बना हुआ है।
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