छत्तीसगढ़

शहर में सट्टा रूकने के नाम नहीं ले रहा

Nilmani Pal
2 Feb 2022 5:40 AM GMT
शहर में सट्टा रूकने के नाम नहीं ले रहा
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रायपुर (जसेरि)। राजधानी के पूरे 70 वार्डो में सटोरिए सक्रिय होकर ओपन-टू-क्लोज को अंजाम दे रहे है। देशभर के सटोरियों का हेटक्वार्टर रायपुर बना हुआ है, जहां से मुंबई-नागपुर सहित अन्य राज्यों से बाकायदा आनलाइन और आफ लाइन बुकिंग करने का कारोबार संचालित कर रहे है।

राजधानी में सट्टा कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। टिकरापारा, नेहरुनगर, भाटागांव,पचपेड़ी नाका,रायपुरा, महादेव घाट के आसपास बस्तियों में, अमलेश्वर, आश्रम के आसपास, कालीबाड़ी, गुढिय़ारी, कटोरा तालाब, सड्डू-मोवा, मंडी गेट, दलदलसिवनी, देवेंद्रनगर, समता कालोनी,तेलाबांधा, टाटीबंध, खमतराई, उरला, बिरगांव सहित शहर के आउटर में काफी तादात में सट्टा खिलाया जा रहा है। सट्टा सिर्फ शहर तक ही सीमित नहीं है बल्कि गावों में भी पैर पसार चुका है। क्या वजह है कि सट्टा कारोबार चलाने वालों में पुलिस का कोई खौफ दिख नहीं रहा है? इन दिनों सट्टे का अवैध कारोबार जोर शोर से चल रहा है। एक रुपए को अस्सी रुपया बनाने के चक्कर में खासकर युवा वर्ग अधिक बर्बाद हो रहे हैं। सट्टे के इस खेल को बढ़ावा देने सटोरी ग्राहकों को मुफ्त में स्कीम देखने सट्टे नंबर वाले चार्ट उपलब्ध करा रहे हैं। इसका गुणा भाग कर ग्राहक सट्टे की चपेट में बुरी तरह से फंस कर पैसा इस अवैध कारोबार में गंवा रहा है। शहर में बढ़ रहे अपराध पर अंकुश लगाने की पुलिस प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी सट्टा-जुआ, अवैध नशीली दवाओं का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

राजधानी में पुलिस को गुंडे-बदमाशों के साथ सटोरियों और जुआरियों का फड़ लगाने वालों के साथ इन्हें संरक्षण देने वाले छुटभैया नेताओं से रोज जूझना पड़ता है। सामान्य तौर पर बड़े पुलिस अधिकारी और पुलिस के पुराने अधिकारी यह मानते है कि सारे अवैध कारोबार के पीछे राजनीतिक संरक्षण देने वालों का हाथ है, जिसके कारण राजधानी में सट्टा-जुआ और नशे के कारोबारियों पर हाथ डालते ही राजनीतिक दबाव बनना शुरू हो जाता है। पुलिस अपराध नियंत्रण करने के लिए तरह-तरह के प्रयोग करने के साथ जागरूकता अभियान भी चला कर देख चुकी है। लेकिन अवैध कारोबार की चुनौती कम नहीं हो रही। अवैध कारोबार में राजनीतिक संरक्षण ही पुलिस के काम में सबसे बड़ा बाधक है।

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